'ताकतवर होना, आपके सही होने की गारंटी नहीं...', भारत से शी जिनपिंग की अमेरिका को मैसेजिंग, मोदी की कूटनीति कामयाब
ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को दो टूक संदेश दिया है. टैरिफ, सैन्य संघर्ष आदि मुद्दो पर ट्रंप की हठधर्मी को लेकर भी घेरा. इतना ही नहीं शिखर सम्मेलन में तमाम पार्टियों को साथ लाने के लिए पीएम मोदी और भारत को थैंक्यू भी कहा.
Follow Us:
भारत की अध्यक्षता में हुआ दो दिवसीय 18वां ब्रिक्स सम्मेलन नई दिल्ली पर बनी आम सहमति, वैश्विक शांति, फ्री एंड ओपन ट्रेड सहित विभिन्न मुद्दों पर हुए मंथन के बाद समाप्त हुआ. एक ओर जहां भारत ने ग्लोबल साउथ को फैसलों में केंद्रीय भूमिका देने और रूल शेपर बनने की आवाज उठाई तो वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को शिखर सम्मेलन के जरिए बड़ा संदेश दिया.
ताकतवर होने का मतलब ये नहीं कि आप सही: शी जिनपिंग
प्रधानमंत्री मोदी की तरह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी दुनिया में तेजी से बदल रहे हालात के बीच ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया. इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका को भी बिना नाम लिए संदेश देने की कोशिश की कि अगर कोई ताकतवर है तो इसका मतलब यह नहीं कि वो ही हमेशा सही होगा. उन्होंने दो टूक कहा कि अब इस तरह कि प्रवृति नहीं चलेगी.
शी जिनपिंग ने AI से लेकर ट्रेड तक पांच नई पहलों का प्रस्ताव दिया
इसके अलावा नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हिस्सा लिया. अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति जिनपिंग ने ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने के लिए पांच नई पहलें प्रस्तावित कीं.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में 18वें शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संबोधन की जानकारी साझा की. विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ओपन सोर्स और समावेशी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पहल पर बात करते हुए कहा कि चीन ब्रिक्स के तहत एक एआई ओपन सोर्स समुदाय बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा. वह बड़े भाषा मॉडल के विकास और उनके उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देगा.
उन्होंने बताया कि चीन एआई से जुड़े विशेष सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा तथा एआई के लिए एक खुला और सहयोगी इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा. इसके अलावा, उन्होंने व्यापार और निवेश को आसान बनाने पर बात की. जिनपिंग ने ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी बनाने का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत सदस्य देश एक स्मार्ट ऑनलाइन पोर्टल बना सकेंगे, नीतियों में बेहतर तालमेल कर सकेंगे और खुले विकास के लिए नए अवसर तैयार कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को नई गति देने के लिए चीन अगले वर्ष ब्रिक्स व्यापार सेवा मंच आयोजित करेगा.
डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने की चीन करेगा पहल
राष्ट्रपति जिनपिंग ने बताया कि चीन ब्रिक्स देशों के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थापित करने की दिशा में काम करेगा. इसके तहत डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाया जा सके.
स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग सहयोग पर बात करते हुए जिनपिंग ने कहा कि चीन अन्य ब्रिक्स देशों को स्मार्ट फैक्ट्री बनाने और उनसे जुड़े मानक एवं नियम विकसित करने में मदद देने के लिए तैयार है. इसके जरिए सदस्य देश मिलकर अपने विनिर्माण क्षेत्र को आधुनिक बना सकेंगे और उसकी गुणवत्ता तथा क्षमता बढ़ा सकेंगे.
ये भी पढ़ें: PM मोदी ने BRICS में गिनाईं भारत की बड़ी पहल, बोले- इन 4 स्तंभों पर टिकेगा साझा विकास का मॉडल
ब्रिक्स इंजीनियर विकास गठबंधन बनाने का जिनपिंग का प्रस्ताव
इसके अलावा उन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रतिभा विकास पर बात करते हुए कहा कि चीन ने ब्रिक्स इंजीनियर विकास गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य इंजीनियरों का संयुक्त प्रशिक्षण करना और उनकी योग्यता के मानकों को एक-दूसरे द्वारा मान्यता देना है.
इसके साथ ही चीन ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू करेगा, ताकि भविष्य के लिए अधिक कुशल और प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार किया जा सके. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच तकनीक, व्यापार, उद्योग, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है.
'विचारों में अंतर को विवाद नहीं बनने देंगे'
वहीं बीते दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक में शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार हैं. इस बैठक में दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए. दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए.
'भारत-चीन प्रतिद्वंदी नहीं बल्कि साझेदार'
बैठक के बाद विदेश मंत्रालय से जारी बयान में कहा गया, "दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया. उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए. मतभेदों को विवाद नहीं बनना चाहिए. प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दोनों पक्षों को तीन परस्पर सिद्धांतों, परस्पर सम्मान, परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर हित से निर्देशित होना चाहिए."
सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए एक आवश्यक आधार बनी हुई है.
विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा, "उन्होंने दोनों पक्षों द्वारा सीमा से संबंधित मुद्दों पर मौजूदा समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता को रेखांकित किया. दोनों नेताओं ने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों के आधार पर सीमा प्रश्न के निष्पक्ष, उचित और परस्पर स्वीकार्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की."
दोनों नेताओं ने लोगों के बीच आपसी संबंधों में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक संबंधों और अधिक आवाजाही को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया.
ब्रिक्स के आयोजन में सहयोग के लिए भारत ने की चीन की सराहना
विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया, "आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर उन्होंने एक-दूसरे की चिंताओं, जिसमें संरचनात्मक व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन के मुद्दे शामिल हैं, को दूर करने और सार्थक और पूर्वानुमानित बाजार पहुंच को सुविधाजनक बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया."
यह भी पढ़ें
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों को क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर और चुनौतियों से निपटने में साझा आधार का विस्तार जारी रखना चाहिए. बयान के अंत में कहा गया, "प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 की सफलता में उसके योगदान की सराहना की." इस बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे.