PM मोदी ने BRICS में गिनाईं भारत की बड़ी पहल, बोले- इन 4 स्तंभों पर टिकेगा साझा विकास का मॉडल
पीएम मोदी ने BRICS की ताकत को विविधता और सहयोग में बताते हुए रेजिलिएंस, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर जोर दिया. उन्होंने रोजगार, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ छोटे उद्यमों को वित्त, ज्ञान और नए बाजारों से जोड़ने के लिए BRICS MSME Corporation Portal और शहरों के बीच बेहतर समन्वय के लिए BRICS Urban Mobility Hub जैसी पहलों का जिक्र किया.
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BRICS Summit 2026: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की वास्तविक शक्ति उनकी विविधता और आपसी सहयोग में निहित है. प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया,'हमारी विविधता हमारी पहचान बने, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति संपूर्ण मानवता के कल्याण के काम आए.'
छोटे उद्यमों के लिए BRICS की नई पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने एम्प्लॉयबिलिटी, महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और कैपेसिटी बिल्डिंग को बढ़ावा दिया. छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कॉर्पोरेशन पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है. हमारे शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा करने के लिए 'ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब' की स्थापना की गई है.
विकास और पर्यावरण के संतुलन पर PM मोदी का जोर
पीएम मोदी ने कहा, भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है. सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं. ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है. यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है. यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। इस दिशा में हमने कई पहलुओं पर प्रगति की है. उन्होंने कहा कि स्मार्ट ग्रिड्स और एनर्जी स्टोरेज के लिए हम ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना है. यह हमारे क्लीन एनर्जी सिस्टम्स को अधिक विश्वसनीय, सक्षम और एक्सेसिबल बनाने में मदद करेगा.
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पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की पहल
पीएम ने कहा कि एग्रो-इकोलॉजी और री-जनरेटिव एग्रीकल्चर के सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को मॉडर्न साइंस से जोड़ेंगे.कम्युनिटी-बेस्ड क्लाइमेट एडैप्टेशन के लिए तैयार किए गए सिद्धांत, इंडिजिनस नॉलेज को क्लाइमेट एक्शन का महत्वपूर्ण आधार बनाएंगे. उन्होंने कहा, इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए ब्रिक्स के माध्यम से हमने इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ावा देने का प्रयास किया है, क्योंकि हमारा मानना है कि ब्रिक्स में विकसित सॉल्यूशंस का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए. इन्हें ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं के अनुरूप एडैप्टेबल और एक्सेसिबल बनाना चाहिए.
ग्लोबल साउथ का BRICS पर बढ़ा भरोसा
पीएम मोदी ने कहा, 'मैं मेरे निजी अनुभव से कह सकता हूं कि ब्रिक्स में ग्लोबल साउथ के देशों का विश्वास बढ़ा है, क्योंकि ब्रिक्स में उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभव का सम्मान होता है, और सॉल्यूशंस उनके लिए ही नहीं, उनके साथ मिलकर बनाए जाते हैं। ब्रिक्स की शक्ति हमारी विविधता और सहयोग में है.' अंत में पीएम मोदी ने कहा कि हमारी विविधता हमारी पहचान रहे, हमारा सहयोग हमारी प्रेरणा बने और हमारी प्रगति पूरी मानवता के काम आए.
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बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के मंच से समावेशी विकास, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और मजबूत वैश्विक सहयोग का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि BRICS की विविधता और साझा प्रयास न केवल सदस्य देशों, बल्कि ग्लोबल साउथ और पूरी मानवता के लिए बेहतर भविष्य की नींव रख सकते हैं.