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BRICS समिट में PM मोदी ने बुलंद की UNSC, वर्ल्ड ऑर्डर में सुधार की आवाज, कहा-रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बने ग्लोबल साउथ

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज करते हुए अपने उद्घाटन भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबका सम्मान करता है. उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करते हुए कहा कि ये समूह संकटों में सबसे आगे है, फैसला लेने में सबसे पीछे.

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12 Sep 2026
( Updated: 12 Sep 2026
04:04 PM )
BRICS समिट में PM मोदी ने बुलंद की UNSC, वर्ल्ड ऑर्डर में सुधार की आवाज, कहा-रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बने ग्लोबल साउथ
Image Source: VIDEOGRAB/ YT/ @narendramodi
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है. भारत मंडपम में सदस्य देशों का खुले दिल से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया. अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबका सम्मान करने का प्रयास करता है.
 
ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, "भारत में आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है. लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएं रही हैं. इन प्राथमिकताओं के साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है."

'BRICS किसी के विरुद्ध नहीं, सबके साथ'

उन्होंने आगे कहा, "इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया. लगभग 30 शहरों में आपकी टीमों का स्वागत करने का हमें अवसर मिला. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं."

ब्रिक्स के मर्म को समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इस वर्ष का ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव है. हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ बना रहे हैं. मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु, मैच्योरिटी और रिस्पॉन्सिबिलिटी के नए चरण का आरंभ करती है. यह वो अवस्था होती है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं. सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है. आज ब्रिक्स भी अपने 'कमिंग ऑफ एज' के क्षण में है. पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. हम एक-दूसरे के दर्शकों का सम्मान करते हैं और कर्तव्यनिष्ठ से आगे बढ़ते हैं. हम किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं."

पीएम मोदी ने आगामी 20 वर्षों के रोडमैप की बात करते हुए कहा कि अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें. अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और एम्बिशियस एजेंडा पर काम करना होगा. 

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इसकी शुरूआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी. ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है किंतु इसकी वजह से हमारी संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए. मैं ब्रिक्स 'निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' का प्रस्ताव रखता हूं. इसके तहत ट्रोइका के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों का फॉलोअप हो सकेगा."

'पिरामिड ऑफ प्रिविलेज से प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप'

वहीं वैश्विक व्यवस्था में सुधार के सवाल पर उन्होंने कहा कि, "ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी. ग्लोबल गवर्नेंस का मौजूदा ढांचा एक पिरामिड जैसा दिखाई देता है. इसके ऊपरी हिस्से में ताकत और फैसले लेने की शक्ति केंद्रित है, जबकि निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका सीमित है."

'ग्लोबल साउथ को रूल टेकर नहीं, रूल शेपर बनाना होगा'

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पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करते हुए कहा कि एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायो टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज भविष्य के अवसरों के साथ वैश्विक नियम भी तय कर रहे हैं. ऐसे में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के जरिए ग्लोबल साउथ के युवा डिप्लोमैट्स और पॉलिसी मेकर्स को नेगोशिएशन स्किल्स, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और लीगल एक्सपर्टाइज दी जा सकती है.

पीएम मोदी ने कहा कि आज यूनाइटेड नेशंस डे फॉर साउथ-साउथ कोऑपरेशन है और ग्लोबल साउथ को समर्पित इस दिन ऐसा फैसला विशेष महत्व रखता है. उन्होंने कहा कि भारत इस विषय में लीड लेने के लिए तैयार है. पीएम मोदी ने कहा, “यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए.” यही ब्रिक्स एट ट्वेंटी का संकल्प होना चाहिए.

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ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करें ब्रिक्स देश

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पीएम मोदी ने इस दौरान अपील की कि हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास होना चाहिए. इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रस्ताव रखा कि ब्रिक्स देश मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म के 10 प्रस्ताव तैयार करें और अगली समिट तक इन्हें ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप देने की कोशिश की जाए.

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'ग्लोबल साउथ संकटों की फ्रंट रो में, फैसले लेने में पीछे'

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पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की परेशानियों के सवाल पर कहा कि, "ब्रिक्स को मजबूत करते हुए हमें ग्लोबल रिफॉर्म की दिशा भी तय करनी होगी. ग्लोबल गवर्नेंस का मौजूदा ढांचा एक पिरामिड जैसा दिखाई देता है. इसके ऊपरी हिस्से में ताकत और फैसले लेने की शक्ति केंद्रित है, जबकि निचले हिस्से में वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में उनकी भूमिका सीमित है."

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