‘भारत से पकड़कर लाएंगे और फांसी पर…’, शेख हसीना पर फिर तल्ख हुई तारिक रहमान सरकार, दिल्ली के सामने रखी शर्त
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना सलाहकार ने जाहेद उर रहमान ने शेख हसीना को भारत से ले जाने की बात कह कर तल्ख तेवर दिखाए हैं.
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बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार और भारत के बीच एक बार फिर शेख हसीना को लेकर तनाव के आसार दिखने लगे हैं. बांग्लादेश की सरकार ने पूर्व PM शेख हसीना को भारत से पकड़कर ले जाने और उन्हें फांसी पर चढ़ाने की बात कह दी है.
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सूचना सलाहकार ने जाहेद उर रहमान ने शेख हसीना को भारत से ले जाने की बात कह कर तल्ख तेवर दिखाए हैं. उन्होंने कहा,
‘बांग्लादेश में मौत की सजा शेख हसीना का इंतजार कर रही है. उन्हें अपील करने का मौका भी नहीं मिलेगा. आते ही उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ेगा.’
भारत के सामने रख दी बड़ी शर्त
जाहेद उर रहमान ने शेख हसीना को लेकर भारत के सामने शर्त रख दी. उन्होंने कहा, भारत-बांग्लादेश के रिश्ते तभी बेहतर होंगे, जब वो शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेजेगा. उन्होंने ये भी कहा कि वह शेख हसीना के सरेंडर का इंतजार नहीं कर सकता. इससे पहले वह खुद उन्हें बांग्लादेश कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस लाना चाहता है. उन्होंने कहा, ‘शेख हसीना को देश वापस लाने के बारे में कोई टैक्टिक नहीं है.’
दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाहेद रहमान से सवाल पूछा गया था कि क्या बांग्लादेश की सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए कर रही है?
जवाब में उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग जो अंदाज़ा लगा रहे हैं कि क्या सरकार शेख हसीना को वापस लाना चाहती है, यह गलत है. सरकार के पास सिर्फ़ भारत पर दबाव बनाने के लिए एक्सट्रैडिशन करने की कोई टैक्टिक नहीं है.’ उन्होंने भारत से शेख हसीना की वापस भेजने की मांग को गंभीरता से लेने की बात कही. उन्होंने पूर्व बांग्लादेशी PM हसीना को फरार और दोषी करार दिया. सरकार से सलाहकार ने साफ किया कि हसीना बांग्लादेश लौटती हैं तो उन्हें समीक्षा या राहत की मांग करने का कोई मौका नहीं दिया जाएगा. जाहेद उर रहमान ने कहा,
‘तकनीकी तौर पर स्थिति यह है कि उनके आते ही उन्हें मौत की सजा का सामना करना पड़ेगा. हम उन्हें कैप्चर कर वापस लाना चाहते हैं.’
भारत में क्यों हैं शेख हसीना?
इससे पहले भी बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना के बांग्लादेश पहुंचते ही अरेस्ट करने की बात कही थी. दरअसल, जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्रों का रिजर्वेशन सुधार आंदोलन शुरू हुआ था. जो देखते ही देखते बड़े उपद्रव में बदल गया. जिसकी लपटों में पूरा देश सुलग गया और आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की कुर्सी तक आ पहुंची. आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हुई हो गई. नवंबर 2025 में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी. इसके बाद शेख हसीना भारत में आ गई थी और यहां निर्वासित होकर रह रही हैं.
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78 साल की शेख हसीना ने जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो न्यूज को दिए एक लिखित इंटरव्यू में कहा, ‘मैं बांग्लादेश लौटूंगी और अदालत में पेश होऊंगी.’ इससे पहले न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा था, ‘वे मुझे जेल भेज सकते हैं, यहां तक कि फांसी देने की भी कोशिश कर सकते हैं. मुझे इन सभी जोखिमों का पता है.’