सरेंडर का नहीं मिलेगा मौका, बांग्लादेश लौटते ही अरेस्ट हो जाएंगी शेख हसीना! तारिक रहमान सरकार का बड़ा बयान
बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने कहा है कि शेख हसीना को तुरंत गिरफ्तार किए जाने की संभावना है. इसका मतलब है कि हसीना अदालत में सरेंडर करें उससे पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना साफ कर चुकी हैं कि चाहे उन्हें मौत ही क्यों न मिले, लेकिन वह अपनी वतन वापसी करके रहेंगी. वे जल्द ही बांग्लादेश में सरेंडर करेंगी. शेख हसीना के इस ऐलान के बाद पहली बार बांग्लादेश सरकार का रिएक्शन आया है. तारिक रहमान सरकार ने संकेत दिए हैं कि जैसे ही हसीना बांग्लादेश में कदम रखेंगी उन्हें अरेस्ट कर लिया जाएगा.
मीडिया को दिए गए बयानों के मुताबिक, बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने कहा है कि शेख हसीना को तुरंत गिरफ्तार किए जाने की संभावना है. इसका मतलब है कि हसीना अदालत में सरेंडर करें उससे पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
शेख हसीना पर कानून मंत्री का पूरा बयान
कानून मंत्री असदुज्जमां ने कहा, ‘शेख हसीना को लौटने का हक है, लेकिन कानून अपना काम करेगा और हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे कानून का उल्लंघन हो.’ असदुज्जमां ने आगे कहा,
‘मौत की सज़ा पाए होने और बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद अगर वह देश लौटकर और कानून का सम्मान करते हुए सरेंडर करना चाहती हैं तो हो सकता है कि ऐसा करने से पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाए. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे जो कानून ने हमें दिया है.’
वहीं, शेख हसीना के पासपोर्ट रद्द करने को लेकर सवाल किया गया तो कानून मंत्री असदुज्जमां ने कहा, यह मेरी नहीं उनकी यानी शेख हसीना की प्रॉब्लम है. उन्होंने कहा, ‘जब भी वह हमारे इलाके में आएंगी, मैं कानून के तहत मुझे जो अधिकार दिया है, उसे लागू करूंगा.’
शेख हसीना ने बांग्लादेश वापसी पर क्या कहा?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि जेल या फांसी का खतरा होने के बावजूद वह स्वदेश लौटेंगी और अदालत का सामना करेंगी. उन्होंने 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में अपनी सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया.
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78 साल की शेख हसीना ने जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो न्यूज को दिए एक लिखित इंटरव्यू में कहा, ‘मैं बांग्लादेश लौटूंगी और अदालत में पेश होऊंगी.’ इससे पहले न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा था, ‘वे मुझे जेल भेज सकते हैं, यहां तक कि फांसी देने की भी कोशिश कर सकते हैं. मुझे इन सभी जोखिमों का पता है.’
छात्र आंदोलन के बाद छोड़ना पड़ा था बांग्लादेश
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जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्रों का रिजर्वेशन सुधार आंदोलन शुरू हुआ था. जो देखते ही देखते बड़े उपद्रव में बदल गया. जिसकी लपटों में पूरा देश सुलग गया और आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की कुर्सी तक आ पहुंची. आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हुई हो गई. नवंबर 2025 में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.