बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का इस्तीफा, तय समय से दो साल पहले छोड़ा पद, शेख हसीना को कॉल कर विवादों में आए
मोहम्मद शहाबुद्दीन पर आरोप लगा था कि उन्होंने लंदन यात्रा के दौरान शेख हसीना के साथ संपर्क साधने की कोशिश की थी. इसके बाद वे विवादों में आ गए थे.
Follow Us:
भारत में मौजूद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जैसे ही वापसी का ऐलान किया. बांग्लादेश में हड़कंप मच गया. सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई. इस बीच एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया. बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.
हाल ही में मोहम्मद शहाबुद्दीन पर आरोप लगा था कि उन्होंने लंदन यात्रा के दौरान शेख हसीना के साथ संपर्क साधने की कोशिश की थी. इसके बाद वे विवादों में आ गए थे. हालांकि अभी ये साफ नहीं हुआ है कि मोहम्मद शहाबुद्दीन से इस्तीफा मांगा गया था या उन्होंने खुद की इच्छा से ये कदम उठाया है. दरअसल, बांग्लादेश में संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति स्पीकर को संबोधित एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर इस्तीफ़ा दे सकते हैं.
शेख हसीना से की थी बात
मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे की चर्चा पहले ही होने लगी थीं. उनसे इस्तीफे की वजह भी पूछी जाने लगी थी. जिस पर मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जवाब दिया था कि वे स्वास्थ्य कारणों से अपना पद छोड़ना चाहते हैं. बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' से बात करते हुए शहाबुद्दीन ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है.
बांग्लादेश की न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मई 2026 में फोन कॉल के जरिए शेख हसीना से बात की थी. हालांकि इस दावे पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस पर बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने कड़ा ऐतराज जताते हुए साठगांठ का आरोप लगाया था.
तय समय से दो साल पहले छोड़ दिया पद
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, संसद के स्पीकर ने उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया. शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति का पद संभाला था. वह जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के बाद देश के इकलौते ऐसे बड़े संवैधानिक पदाधिकारी थे, जो अपने पद पर बने हुए थे. उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था, लेकिन उन्होंने तय समय से करीब दो साल पहले ही इस्तीफा दे दिया.
'द डेली स्टार' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि शहाबुद्दीन के इस्तीफे की खबर ऐसे समय आई है, जब यह रिपोर्ट सामने आई कि इस साल मई में इलाज के लिए लंदन जाने के दौरान उन्होंने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बात की थी. दावा है कि उनसे इस्तीफा मांगा गया है.
BNP नेता ने क्या कहा?
हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि सिर्फ यही फोन कॉल इस्तीफे की वजह नहीं थी. उनके मुताबिक, पूरा मामला इससे कहीं ज्यादा जटिल है.
जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के दौरान शेख हसीना की अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने के बाद से ही शहाबुद्दीन के राष्ट्रपति पद पर बने रहने को लेकर देश में लगातार राजनीतिक बहस चल रही थी.
बांग्लादेश की तेजी से बदलती राजनीतिक स्थिति के बीच यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब BNP के नेतृत्व वाली तारिक रहमान सरकार अवामी लीग से जुड़े नेताओं पर कार्रवाई तेज कर रही है. यह घटनाक्रम शहाबुद्दीन के हालिया दावों के बाद सामने आया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की कोशिश हुई थी.
सरकार ने मीटिंग में शामिल नहीं किया
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के बंगाली अखबार 'कालेर कंथो' को ढाका स्थित राष्ट्रपति भवन बंगाभवन में दिए गए एक इंटरव्यू में शहाबुद्दीन ने कहा था कि डेढ़ साल तक चली अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें किसी भी अहम चर्चा में शामिल नहीं किया गया.
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ साजिशें रची गईं, उन्हें पद से हटाने की कोशिश हुई और देश में अस्थिरता फैलाकर संवैधानिक संकट पैदा करने की कोशिश की गई.
उन्होंने कहा, ‘इन डेढ़ वर्षों के दौरान मुझे किसी भी चर्चा में शामिल नहीं किया गया. मेरे खिलाफ तरह-तरह की साजिशें रची जा रही थीं. देश की शांति और व्यवस्था को हमेशा के लिए बिगाड़ने और संवैधानिक संकट पैदा करने की कई कोशिशें की गईं.
शेख हसीना ने कब किया था बांग्लादेश वापसी का ऐलान?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि जेल या फांसी का खतरा होने के बावजूद वह स्वदेश लौटेंगी और अदालत का सामना करेंगी. उन्होंने 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में अपनी सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया.
78 साल की शेख हसीना ने जापानी न्यूज एजेंसी क्योडो न्यूज को दिए एक लिखित इंटरव्यू में कहा, ‘मैं बांग्लादेश लौटूंगी और अदालत में पेश होऊंगी.’
इससे पहले न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा था, ‘वे मुझे जेल भेज सकते हैं, यहां तक कि फांसी देने की भी कोशिश कर सकते हैं. मुझे इन सभी जोखिमों का पता है.’
शेख हसीना ने कब छोड़ा बांग्लादेश?
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में छात्रों का रिजर्वेशन सुधार आंदोलन शुरू हुआ था. जो देखते ही देखते बड़े उपद्रव में बदल गया. जिसकी लपटों में पूरा देश सुलग गया और आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की कुर्सी तक आ पहुंची. आंदोलन के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हुई हो गई.
नवंबर 2025 में बांग्लादेश के युद्ध अपराध न्यायाधिकरण ने 2024 के आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी.
यह भी पढ़ें- ट्रंप ने भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10% टैरिफ, पाकिस्तान-बांग्लादेश भी नहीं बचे
यह भी पढ़ें
बांग्लादेश सरकार ने हसीना के प्रत्यर्पण के लिए भारत से औपचारिक अनुरोध किया है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में कहा था कि नई दिल्ली को यह अनुरोध प्राप्त हो गया है. वह इससे जुड़े कानूनी और न्यायिक पहलुओं की समीक्षा कर रही है.