महिला स्टाफ को हटाने का मामला, एफिल टावर में हिंदू डेलिगेशन के जाने पर मचा था बवाल, अब सामने आया पूरा सच
भारत से पेरिस गए BAPS के डेलिगेशन को लेकर फ्रांस में विवाद छिड़ा हुआ है. आरोप है कि डेलिगेशन ने एफिल टावर के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय तक हटाने के लिए कहा, जिस पर बवाल मच गया.
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दुनिया के सात अजूबों में शामिल फ्रांस का एफिल टावर इन दिनों एक विवाद के कारण चर्चा में हैं. यहां कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा. एफिल टावर के बंद रहने का ये मामला सामान्य नहीं है. इस प्रकरण की आंच भारत तक आ गई है.
मामला उस वक्त शुरू हुआ जब हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के करीब 100 सदस्यों ने एफिल टावर में दौरा किया. आरोप है कि उनके पहुंचने से पहले BAPS की ओर से एफिल टावर में तैनात महिला कर्मचारियों को हटने के लिए कहा गया और उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात करने की बात कही गई. विवाद यहीं से शुरू हुआ.
पेरिस में छिड़ा बवाल
आरोप है कि BAPS डेलिगेशन के वहां जाने पर महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल से हटा दिया गया. इस घटना से महिला कर्मचारी आहत हुईं, उन्हें यह अपमानजनक लगा और पेरिस में बवाल छिड़ गया. मामला बढ़ाने तो कर्मचारियों ने बैठक की और मैनेजमेंट से बातचीत की. पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने मामले की तत्काल जांच कराने की घोषणा की. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि धार्मिक संगठन BAPS का प्रतिनिधिमंडल भारत से ही पेरिस गया था. ऐसे में मामले की आंच भारत तक तो आनी ही थी.
कानून से ऊपर नहीं संस्था की भावनाएं- फ्रांस सरकार
फ्रांस की समानता मामलों की मंत्री ऑरोर बर्गे ने भी 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘फ्रांस में हम महिलाओं से खुद को पीछे हटाने या अदृश्य होने के लिए नहीं कहते. कोई भी विचारधारा या धर्म गणराज्य के कानूनों से ऊपर नहीं है.’
En France, on ne demande pas aux femmes de s'effacer. Aucun dogme, aucune religion n'est supérieure aux lois de la République.
— Aurore Bergé (@auroreberge) September 7, 2026
Si les faits rapportés à la Tour Eiffel sont confirmés, ils sont inacceptables.
En France, l’égalité entre les femmes et les hommes n’est ni… https://t.co/UvaPrfpoEY
इस घटना की आलोचना करते हुए दक्षिणपंथी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मरीन ले पेन ने कहा कि फ्रांस कभी भी महिलाओं की मौजूदगी को 'सीमित' किए जाने को स्वीकार नहीं करेगा. हर साल करीब 70 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एफिल टॉवर सोमवार को पूरे दिन बंद रहा.
BAPS ने क्या कहा?
माना जा रहा है BAPS के करीब 100 लोगों ने एफिल टावर का दौरा किया था. विवाद पर अब BAPS ने सफाई भी दी है. साथ ही पूरे विवाद पर माफी मांगी. संस्था का कहना है कि करीब 100 लोगों के एफिल टावर दौरे की योजना संगठन और टावर के मैनेजमेंट ने मिलकर बनाई थी. कहा गया कि प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा स्मारक प्रबंधन के साथ मिलकर तय की गई थी. इसे आम लोगों के खुलने के समय के ठीक पहले रखा गया था ताकि दूसरे पर्यटकों को कम से कम असुविधा हो.
BAPS ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी एक बयान में कहा कि किसी भी व्यक्ति को एफिल टॉवर में प्रवेश से नहीं रोका गया था. फिर भी संस्था उन लोगों से माफी भी मांगती है जिन्हें इस घटना से कोई ठेस पहुंची हो या असुविधा हुई हो.
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मंदिर की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘हम उठाई गई चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें बहुत गंभीरता से लेते हैं. हमारे प्रतिनिधिमंडल का आकार बड़ा था, इसलिए इस यात्रा की व्यवस्था एफिल टॉवर प्रबंधन के सहयोग से सामान्य समय पर खुलने के ठीक शुरुआत में की गई थी, ताकि अन्य लोगों को कोई असुविधा या व्यवधान न हो. हमारी जानकारी के अनुसार, किसी भी समय किसी को एफिल टॉवर में प्रवेश से नहीं रोका गया. हम आपसी सम्मान और सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों में विश्वास रखते हैं.’
क्या है BAPS?
BAPS का पूरा नाम बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha) है. यह स्वामीनारायण संप्रदाय के अंतर्गत एक प्रमुख हिंदू सामाजिक-आध्यात्मिक संगठन है. इसकी औपचारिक स्थापना 1907 में गुजरात के बोचासन गांव में शास्त्रीजी महाराज ने की थी. इसकी जड़ें भगवान स्वामीनारायण (1781–1830) की शिक्षाओं और वैदिक परंपरा में हैं.
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यह आध्यात्मिक मार्गदर्शन गुरु-परंपरा के माध्यम से चलता है. दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर भी स्वामी नारायण संस्थान का ही है. BAPS के अनुयायी पांच मुख्य व्रत रखते हैं. मांस न खाना, व्यभिचार न करना, व्यसन न रखना, शराब न पीना और शरीर-मन की शुद्धता बनाए रखना. दुनिया भर में इसके हजारों केंद्र और लाखों अनुयायी हैं. BAPS के साधु और स्वामी आठ तरह के ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हैं. इसके तहत वे महिलाओं से दूर रहते हैं. उन्हें छूना तो दूर देखने से भी परहेज करते हैं.