जिस पर देशकरता है भरोसा
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जिस प्रोजेक्ट के लिए मालदीव ने चीन से बढ़ाई थी नजदीकी, वो भारत के फंड से हो रहा पूरा, बदले मुइज्जू ने कहा- शुक्रिया

मालदीव में भारत की मदद से बनने वाला पुल ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है. पुल का सबसे अहम ढांचा खड़ा कर दिया गया है.

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03 Sep 2026
( Updated: 03 Sep 2026
12:35 PM )
जिस प्रोजेक्ट के लिए मालदीव ने चीन से बढ़ाई थी नजदीकी, वो भारत के फंड से हो रहा पूरा, बदले मुइज्जू ने कहा- शुक्रिया
Image Source- IANS/PMO
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इंडिया आउट का नारा गढ़कर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने वाले मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अब भारत की तारीफ के कसीदे पढ़ने लगे हैं. उन्होंने भारत के सहयोग से मालदीव के माले में बन रहे ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (थिलामाले ब्रिज) के लिए भारत को शुक्रिया कहा है. 

दरअसल, मुइज्जू ने मालदीव में थिलामाले ब्रिज का दौरा किया था. इस दौरान उनके साथ भारत के राजदूत बालासुब्रमण्यन भी मौजूद थे. मालदीव का ये प्रोजेक्ट नई दिल्ली की मदद से पूरा हो रहा है. ऐसे में मुइज्जू अब भारत की खुलकर तारीफ कर रहे हैं. उनके ऑफिस से कहा गया कि राष्ट्रपति मुइज्जू  ने प्रधानमंत्री मोदी और हाई कमिश्नर जी. बालासुब्रमण्यन का ‘दिल से आभार’ भी जताया. कहा गया कि थिलामाले ब्रिज के निर्माण में हुई प्रगति ‘दोनों देशों की टेक्निकल टीमों की समर्पित कोशिशों से ही संभव हो पाई है.’

'भारत विरोधी' छवि वाले मुइज्जू कैसे बदल गए? 

साल 2023 के चुनाव में मुइज्जू ने ‘इंडिया आउट’ कैंपेन चलाया था. इस दौरान मुइज्जू ने आईलैंड पर तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को हटाने की मांग की थी. उस वक्त उनके रुख पर भारत ने सख्त ऐतराजल जताया था. माना गया कि मोहम्मद मुइज्जू चीन के इशारे पर भारत के खिलाफ रुख अख्तियार कर रहे हैं. राष्ट्रपति बनते ही मुइज्जू ने अपनी पहली विदेश यात्रा भी चीन की ही की थी. 

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दोनों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी, कृषि, आपदा प्रबंधन और आपदा प्रबंधन और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' से जुड़े 20 समझौतों पर साइन किए थे. हालांकि चीन की ओर से उन्हें आर्थिक तौर पर उम्मीद के मुताबिक मदद नहीं मिल पाई. तभी मालदीव पर कर्ज भी बढ़ता जा रहा था ऐसे में भारत मदद के लिए आगे आया. इसके बाद अक्टूबर 2024 में मुइज्जू भारत आए और दोस्ती की पहल की. 

भारत की मदद से बन रहा GMCP कितना अहम? 

अब भारत की मदद से बनने वाला पुल ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है. पुल का सबसे अहम ढांचा खड़ा कर दिया गया है. यह 

  • 6.74 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट है
  • मालद्वीप में अब तक का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
  • राजधानी माले को पड़ोसी द्वीपों विलिंगिली, गुलहीफालहू और थिलाफुशी से जोड़ेगा
  • भारत ने 500 मिलियन डॉलर के पैकेज की मदद दी
  • पैकेज में एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ इंडिया से 400 मिलियन डॉलर की रियायती क्रेडिट लाइन 
  • भारत सरकार से 100 मिलियन डॉलर की ग्रांट शामिल है
  • यह प्रोजेक्ट भारत की अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया गया था

भारत की इस स्ट्रॉन्ग नेबरहुड पॉलिसी को देखते हुए मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने कहा, ‘यह पहल भारत और मालदीव के बीच मजबूत रिश्तों और साझा तरक्की को दिखाती है. मालदीव-भारत की दोस्ती भरोसे और साझा तरक्की पर टिकी है. यह लिंक उस प्रतिबद्धता और मालदीव के विकास के लिए भारत के समर्थन का प्रतीक है.’

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तीन साल पहले भारत के खिलाफ कैंपेन चलाने वाले, भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़े करने वाले मुइज्जू अब भारत के मुरीद हैं. क्योंकि वे जानते हैं चीन-पाकिस्तान केवल भारत के खिलाफ उन्हें इस्तेमाल करेंगे. जब बात मदद की होगी तो भारत ही सबसे पहले साथ खड़ा दिखेगा. 

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