सीमा से लेकर व्यापार तक... 7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग से PM मोदी की होगी आमने-सामने बातचीत, जानें क्या होगा खास
BRICS समिट के लिए दिल्ली में विदेशी नेताओं का आगमन शुरू हो गया है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बाद शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचेंगे. करीब सात साल बाद होने वाली उनकी भारत यात्रा में PM मोदी से द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है, जिसमें भारत-चीन संबंधों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है.
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BRICS SUMMIT 2026: भारत की राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मलेन (BRICS Summit 2026) के लिए मंच सज चुका है. राजधानी में एक के बाद एक विदेशी नेताओं का आगमन शुरू हो चुका है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार तड़के भारत पहुंच चुके हैं, वहीं अब शनिवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी नई दिल्ली पहुंचेंगे. जिनपिंग की यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि करीब सात साल बाद वह भारत का दौरा कर रहे हैं.
दरअसल, शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है. ऐसे में BRICS के मंच से इतर पूरी दुनिया की नजरें मोदी और शी की बातचीत पर रहेंगी. माना जा रहा है. इस मुलाकात में कई अहम मुद्दों पर चर्चा के साथ दोनों देशों के बीच रिश्तों में भी सुधार होंगे.
67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आएंगे जिनपिंग
हिंदुस्तान में टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, शी जिनपिंग के साथ 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा. इसमें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य कैई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी शामिल होंगे. दोनों ही चीन की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं. जानकारी के अनुसार जिनपिंग का भारत दौरा करीब 24 घंटे का होगा. वह शनिवार दोपहर करीब 12:10 बजे भारत पहुंचेंगे और अगले दिन दोपहर करीब 12:20 बजे यहां से रवाना होने की बात है. भारत पहुंचने के बाद शनिवार को करीब 2 बजे वह भारत मंडपम पहुंचेंगे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेता उनका स्वागत करेंगे. चीन की ओर से इस यात्रा की तैयारियां काफी पहले शुरू कर दी गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार, 27 अगस्त को बीजिंग ने भारतीय दूतावास से राष्ट्रपति के साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल के लिए वीजा जारी करने का अनुरोध किया था. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रा की तैयारियां कई सप्ताह पहले ही शुरू हो गई थीं.
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मोदी-शी की मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी बात
सबसे अहम सवाल यही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी. माना जा रहा है कि व्यापार, निवेश, बाजार तक पहुंच और सीमा से जुड़े विषय बातचीत के केंद्र में रह सकते हैं. भारत लंबे समय से चाहता रहा है कि उसकी कंपनियों को चीन के बाजार में बेहतर अवसर मिलें. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने और भारत में चीनी निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दे भी उठ सकते हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वीजा प्रतिबंध और भारत में चीनी कंपनियों की गतिविधियों पर भी बातचीत होने की संभावना है. भारत की प्राथमिकताओं में सप्लाई चेन को भरोसेमंद बनाना भी शामिल हो सकता है. मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में जरूरी सामान और औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति को लेकर दुनिया के कई देश अपनी रणनीति बदल रहे हैं. ऐसे में भारत और चीन के बीच आर्थिक रिश्तों पर होने वाली चर्चा का महत्व और बढ़ जाता है.
LAC पर तनाव कम करने की कोशिश
मोदी और शी की बातचीत में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC का मुद्दा भी अहम रह सकता है. दोनों देश हाल के वर्षों में सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत भी हुई है. इस दौरान सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन से जुड़े विषयों पर आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी थी. इन वार्ताओं में पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो नई सैन्य हॉटलाइन और सैन्य कमांडर स्तर की बैठकों के लिए दो नए बैठक स्थलों पर भी सहमति की बात सामने आई थी. सीमा पार बहने वाली नदियों से जुड़े मुद्दों पर बैठक को लेकर भी सहमति बनी थी. ऐसे में मोदी-शी बैठक में इन प्रगति की समीक्षा संभव है.
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2024 के बाद रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश
मोदी और शी जिनपिंग की पिछली अहम मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS सम्मेलन के दौरान हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाए गए. पूर्वी लद्दाख में LAC पर सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया नवंबर में पूरी हुई. इसके बाद दोनों देशों ने सीधे हवाई संपर्क बहाल करने, वीजा से जुड़े नियमों में कुछ राहत देने और कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने जैसे कदम उठाए. चीनी निवेश को लेकर भी कुछ पाबंदियों में ढील दी गई. हालांकि, रिश्तों में पूरी तरह से सामान्य स्थिति लौटना अभी बाकी है. वीजा, भारतीय कारोबारियों से जुड़े प्रतिबंध, सीमा पार नदियों से संबंधित आंकड़ों को साझा करने और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई मुद्दे अब भी दोनों देशों के बीच चर्चा का विषय हैं.
ऊर्जा और पश्चिम एशिया पर भी नजर
मोदी और शी की बातचीत सिर्फ भारत-चीन रिश्तों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे पैदा हो रही ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती भी चर्चा में आ सकती है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है. इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से पैदा हुई वैश्विक व्यापार चुनौतियों पर भी विचार हो सकता है. BRICS के मंच पर भारत, चीन और रूस बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से निपटने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब किसी पश्चिम विरोधी गठजोड़ के रूप में नहीं देखा जा रहा है. इसके बजाय यह संकेत जरूर माना जा सकता है कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भारत, चीन और रूस अपने हितों के अनुरूप विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं.
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बताते चलें कि अब जब पुतिन दिल्ली पहुंच चुके हैं और शी जिनपिंग के आगमन की तैयारी है, BRICS Summit 2026 सिर्फ एक बहुपक्षीय बैठक नहीं रह गया है. मोदी, पुतिन और शी की मौजूदगी इसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बना रही है. खासकर मोदी और शी की आमने-सामने बातचीत से यह संकेत मिल सकता है कि आने वाले समय में भारत-चीन संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं.