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क्यों बनाया गया था BRICS? कैसे चार देशों का समूह बना 11 देशों का बड़ा मंच, जानें पूरी कहानी

भारत 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. आज 11 देशों का यह समूह वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर सहयोग का मंच है, लेकिन इसकी शुरुआत सिर्फ चार देशों ब्राजील, रूस, भारत और चीन से हुई थी.

क्यों बनाया गया था BRICS? कैसे चार देशों का समूह बना 11 देशों का बड़ा मंच, जानें पूरी कहानी
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BRICS Summit 2026: भारत की राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. भारत इस बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन में सदस्य देशों के साथ साझेदार देशों तथा आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे. यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब BRICS का दायरा पहले के मुकाबले काफी बड़ा हो चुका है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज 11 सदस्य देशों वाला BRICS कभी सिर्फ चार देशों का समूह था.

दरअसल, ब्रिक्स की कहानी केवल किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के बनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका को भी समझाती है. आइए जानते हैं कि ब्रिक्स की शुरुआत कैसे हुई और BRIC से BRICS बनने तक इसका सफर कैसा रहा.

एक रिसर्च पेपर से शुरू हुई कहानी

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ब्रिक्स नाम की शुरुआत किसी सरकारी समझौते से नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री के रिसर्च पेपर से हुई थी. साल 2001 में अमेरिकी अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने एक रिपोर्ट में ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर रेखांकित किया था. उन्होंने इन चार देशों के नाम के पहले अक्षरों से BRIC शब्द का इस्तेमाल किया. उस समय BRIC कोई औपचारिक संगठन नहीं था. यह मूल रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्था में इन उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती ताकत को बताने वाला एक आर्थिक शब्द था. हालांकि, आने वाले वर्षों में यही शब्द एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच का नाम बन गया.

2006 में BRIC ने लिया औपचारिक रूप

BRIC के औपचारिक मंच के रूप में सामने आने की शुरुआत साल 2006 में हुई. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई. यहीं से चारों देशों के बीच नियमित सहयोग की नींव मजबूत हुई. इसका मकसद सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं था. चारों देश वैश्विक शासन व्यवस्था, आर्थिक मामलों और विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे. इसके बाद साल 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ. यह एक बड़ा पड़ाव था, क्योंकि अब चारों देशों का सहयोग विदेश मंत्रियों के स्तर से निकलकर राष्ट्राध्यक्षों और उनकी सरकारों के मुखिया लेवल तक पहुंच चुका है. 

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दक्षिण अफ्रीका की एंट्री से बना BRICS

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BRIC के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव साल 2011 में आया. दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इस समूह का नाम BRICS हो गया. दक्षिण अफ्रीका ने 2011 में चीन के सान्या में आयोजित तीसरे शिखर सम्मेलन में पहली बार BRICS सदस्य के रूप में हिस्सा लिया. यानी चार देशों का समूह अब पांच देशों का हो चुका था. इसके साथ ही समूह का भौगोलिक दायरा भी बढ़ा और अफ्रीकी महाद्वीप की एक बड़ी अर्थव्यवस्था इसमें शामिल हो गई.

2024 में हुआ बड़ा विस्तार

BRICS का विस्तार यहीं नहीं रुका. साल 2023 में जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में विस्तार का फैसला हुआ और 2024 से मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को नए सदस्यों के रूप में शामिल किया गया. इसके बाद BRICS का स्वरूप पहले से काफी बड़ा हो गया. इंडोनेशिया ने भी 2024 में सदस्य बनने का निमंत्रण स्वीकार किया और जनवरी 2025 में उसकी औपचारिक सदस्यता की घोषणा हुई. इसके साथ BRICS में कुल 11 सदस्य देश हो गए. आज BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं.

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10 साझेदार देश भी जुड़े

BRICS का प्रभाव केवल 11 सदस्य देशों तक सीमित नहीं है. समूह में पार्टनर या साझेदार देशों की व्यवस्था भी बनाई गई है. 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान साझेदार देश बने. जून 2025 में वियतनाम के जुड़ने के बाद साझेदार देशों की संख्या 10 हो गई. सदस्य और साझेदार देशों में अंतर भी समझना जरूरी है. पूर्ण सदस्य BRICS की बैठकों और निर्णय प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं और फैसले आम सहमति के आधार पर होते हैं. वहीं साझेदार देशों को शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठकों में आमंत्रित किया जा सकता है. वे कुछ घोषणाओं और अंतिम दस्तावेजों का समर्थन भी कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण सदस्यों जैसी निर्णयकारी भूमिका उनके पास नहीं होती.

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भारत के लिए क्यों खास है 2026 का सम्मेलन?

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भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS की अध्यक्षता कर चुका है. 2012 में नई दिल्ली में चौथा BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था. 2016 में गोवा में आठवां शिखर सम्मेलन हुआ, जबकि 2021 का शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में वर्चुअल तरीके से आयोजित किया गया था. 2026 में भारत चौथी बार BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. इस बार भारत की अध्यक्षता की थीम 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' है. भारत ने इस दौरान देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं. इनका फोकस BRICS की तीन प्रमुख धाराओं राजनीतिक एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं वित्तीय तथा सांस्कृतिक एवं जन-जन संपर्क पर रहा है.

बहरहाल, अब 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली तैयार है. भारत के लिए यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूती से सामने रखने का अवसर भी है. चार देशों के आर्थिक विचार से शुरू हुआ BRIC आज 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों वाले व्यापक मंच में बदल चुका है. यही इस समूह की सबसे दिलचस्प कहानी है. आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाला शिखर सम्मेलन यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगा कि BRICS आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, सियासी और विकास से जुड़े मुद्दों पर किस तरह अपनी भूमिका को और मजबूत करता है.

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