जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

BRICS में पहुंचे अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूक तो क्यों होने लगी चर्चा? ईरानी राष्ट्रपति से मिले, अमेरिका को मैसेज

कभी मीरवाइज फारूक का नाम कश्मीर के उन अलगाववादी नेताओं में आता था जो पाकिस्तान के हिमायती थे. जो पाकिस्तान को कश्मीरियों का सबसे बड़ा हमदर्द बताते थे.

Author
12 Sep 2026
( Updated: 12 Sep 2026
01:05 PM )
BRICS में पहुंचे अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूक तो क्यों होने लगी चर्चा? ईरानी राष्ट्रपति से मिले, अमेरिका को मैसेज
Image Source- IANS
Advertisement

BRICS समिट के लिए दुनिया के दिग्गज भारत में कदम रख चुके हैं. इसी कड़ी में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी दिल्ली में BRICS से पहले PM मोदी से मुलाकात की. पेजेश्कियान से मिलने के लिए कश्मीर से अलगाववादी नेता मीरवाइज फारूक भी नई दिल्ली पहुंचे. इस दौरान वे BRICS बिजनेस के कार्यक्रम में एक संत के बगल में बैठे हुए दिखे. 

मीरवाइज उमर फारूक ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान से मुलाकात में अमेरिका के साथ तनाव को खत्म करने के लिए डिप्लोमैसी पर जोर दिया. दोनों के बीच कई मामलों पर बातचीत हुई. मीरवाइज फारूक ने अमेरिका को सुनाते हुए कहा, 

‘ईरान पर युद्ध थोपना सही नहीं है. फारूक ने यह भी कहा कि आज का दौर बातचीत का है न, कि युद्ध का.’ 

मिनाब स्कूल हमले में मारे गए बच्चों को दी श्रद्धांजलि

मीरवाइज फारूक ने ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद ईरान के मिनाब स्कूल में मारे गए बच्चों के लिए आयोजित प्रदर्शन में जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी. 

Advertisement

दरअसल, 28 फरवरी को, ईरान पर हमले के शुरुआती घंटों के दौरान, दक्षिणी ईरान में एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल से हमला हुआ था. इस हमले के पीछे अमेरिका का हाथ माना गया था. जिस वक्त ये हमला हुआ था उस वक्त स्कूल में क्लास चल रही थी. इस हमले में छात्राओं समेत 170 लोग मारे गए थे. 

पेजेश्कियान से मुलाकात में हुर्रियत नेता ने जोर दिया कि युद्ध का हल केवल डिप्लोमैसी से है. उन्होंने कहा, 'ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने एक बहुत अहम मैसेज दिया- अगर हमें शांति की दिशा में काम करना है, तो सबसे ज्यादा ध्यान इंसानियत पर देना होगा. इस मामले में, हमें लगता है कि आज का दौर बातचीत और डिप्लोमेसी का है, न कि युद्ध का. इसलिए, जो भी इंसानियत और मानवीय मूल्यों पर यकीन रखता है, उसे इस बात पर जोर देना चाहिए कि अब युद्धों को खत्म करने और शांति तथा बातचीत को अपनाने का वक्त आ गया है. वैश्विक स्तर पर पैदा हुए इस गंभीर संकट को हल करने का यही एकमात्र रास्ता है.'

ईरान पर अमेरिका ने युद्ध थोपा- मीरवाइज

उन्होंने कहा, 'आज के माहौल में और यह देखते हुए कि नई दिल्ली में विश्व नेताओं की मौजूदगी में एक महत्वपूर्ण ब्रिक्स सत्र भी चल रहा है, सबसे बड़ा संदेश शांति का होना चाहिए. शांति तभी कायम हो सकती है जब न्याय मिले. ईरान में जो कुछ भी हो रहा है, वह पूरी तरह से गलत है, खासकर जिस तरह अमेरिका ने उन पर युद्ध थोपा है. इसके अलावा, फिलिस्तीन और लेबनान में जो हालात बन रहे हैं, वे दुनिया भर में एक अराजक स्थिति पैदा कर रहे हैं, जिसे सुलझाना बेहद जरूरी है.'

PM मोदी के लिए बदला मीरवाइज का रुख 

Advertisement

कभी मीरवाइज फारूक का नाम कश्मीर के उन अलगाववादी नेताओं में आता था जो पाकिस्तान के हिमायती थे. जो पाकिस्तान को कश्मीरियों का सबसे बड़ा हमदर्द बताते थे, लेकिन पिछले कुछ समय से उनका रुख मोदी सरकार और उसकी नीतियों के समर्थन में देखा गया. साथ ही वे सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की नीतियों और वहां की शासन व्यवस्था पर तीखा सवाल करते भी देखे गए. 

PM मोदी की तारीफ में क्या कहा था? 

दो महीने पहले श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद से PM मोदी की तारीफ की थी. उन्होंने कहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वतंत्र भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेताओं में शामिल हैं. जब नरेंद्र मोदी पहली बार PM बने थे तब उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्ते और क्षेत्रीय सहयोग की बात भी की थी. मीरवाइज ने कहा, उस समय दक्षिण एशिया में शांति की उम्मीद जगी थी. अब भी उसी सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है.’ जम्मू कश्मीर की सियासत में उनका ये बयान काफी चर्चा में रहा था. 

इस बार BRICS में भी मीरवाइज की मौजूदगी को भी बदले कश्मीर की पहचान माना जा रहा है. जहां कांग्रेस सवाल उठाती है कि BRICS से हमें क्या मिला, मोदी सरकार में क्या बदलाव हुआ. जवाब है वैश्विक मंचों पर तो भारत का कद बढ़ा ही साथ ही भारत के अंदर भी अलगाववादी ताकतों की सोच बदली है. 

यह भी पढ़ें- ‘क्या कश्मीरियों को जेल में देखना चाहते हैं’, वंदे मातरम पर कांग्रेस ने उठाए सवाल तो उमर अब्दुल्ला ने दिया दो टूक जवाब

Advertisement

यह भी पढ़ें

जिस जगह आजाद भारत में भी अलग प्रधान और अलग विधान रहा, वहां आज ‘वंदे मातरम’ के सभी छंदों को गर्व से गाया जा रहा है. वहां के अलगाववादी नेता देश और दुनिया के बड़े आयोजन में भारत की अहमियत और कद को दर्शा रहे हैं. संतों के बगल में बैठ रहे हैं औऱ मोदी के शांति वाले संदेश को दोहरा रहे हैं जो अपने आप में बड़े बदलाव और बड़ी बात की तस्दीक है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें