मिडिल ईस्ट में शांति-स्थिरता की भारत की अपील, BRICS देशों के साथ मिलकर काम करेगा चीन, दिल्ली में बोले शी जिनपिंग
मिडिल ईस्ट में शांति-स्थिरता के लिए BRICS देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए चीन तैयार हो गया है. 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बड़ा बयान सामने आया है.
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि वो मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्रों में उचित भूमिका निभाने को तैयार हैं. सिन्हुआ ने इसकी जानकारी दी.
खाड़ी में शांति और स्थिरता को लेकर काम करने को तैयार चीन
बयान जारी कर बताया कि नई दिल्ली में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन मिडिल ईस्ट और गल्फ क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने में अपनी उचित भूमिका निभाना चाहता है. इसके लिए वो ब्रिक्स के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है. इसमें आगे कहा गया कि राष्ट्रपति ने माना कि इस युद्ध से पूरे इलाके के लोगों को भारी नुकसान हुआ है और यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के लिए भी सही नहीं है.
2027 में BRICS की अध्यक्षता संभालेगा
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ऐलान किया है कि चीन 2027 में BRICS की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें BRICS समिट की मेजबानी करेगा. शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में चल रहे BRICS समिट के दौरान यह घोषणा की. 2027 का BRICS समिट चीन की मेजबानी में होगा. नई दिल्ली में हो रहे मौजूदा समिट में BRICS के भविष्य के एजेंडे, वैश्विक गवर्नेंस और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है.
7 साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
बता दें, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे. गलवान झड़प के बाद जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है. 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के परिपेक्ष्य में ये बयान काफी अहमियत रखता है. शिखर सम्मेलन का डे 1 उपलब्धि के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा. सभी सदस्य देशों ने संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति जताई. सूत्रों के अनुसार, सुबह 4 बजे तक चली बातचीत, तब संयुक्त बयान पर बात बनी.
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मतभेद के बीच आम सहमति बनाने में भारत ने हासिल की कामयाबी
कथित तौर पर कई अहम और विवादित मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे लेकिन भारत ने सकारात्मक कूटनीति का परिचय देते हुए सहजता से मामले को सुलझाने का प्रयास किया. यह सहमति इसलिए भी अहम रही क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही ब्रिक्स मंच का हिस्सा हैं लेकिन सबके पश्चिम एशिया के कई मुद्दों पर काफी मतभेद थे.
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सूत्र के अनुसार, "पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों को एक संयुक्त बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी. भारत की कोशिशों से इन मतभेदों को ब्रिक्स की बातचीत पर हावी नहीं होने दिया गया और सभी देश साझा बयान पर सहमत हो गए."