'हम दबाव में आने वाले नहीं', भारत के बाद US के 100 फीसदी टैरिफ पर चीन भी भड़का, ट्रंप को दी बड़ी नसीहत
चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. चीन ने कहा है कि वह लगातार इस तरह के फ़ैसलों का विरोध करता है. ड्रैगन ने इस फैसले को अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना है.
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China's Reaction on US 100% Tariff Bill: अमेरिका की दावेदारी को चुनौती देने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़के हुए हैं. US दुनिया के कई देशों पर टैरिफ का दबाव बनाते हुए धमकाता आ रहा है. अब अमेरिकी कांग्रेस ने एक ऐसा कानून पारित किया है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है.
जैसा कि साफ है भारत ही नहीं कई देश रूस से तेल खरीदते हैं. इनमें से चीन भी एक है. अमेरिका में इस नए टैरिफ बिल के पास होने के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा,
‘बीजिंग का किसी भी देश के साथ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किसी तीसरे को टारगेट नहीं करता है.’
दरअसल, चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. चीन ने कहा है कि वह लगातार इस तरह के फ़ैसलों का विरोध करता है. ड्रैगन ने इस फैसले को अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ माना है. चीन का कहना है कि इस तरह के कानून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से मंज़ूरी नहीं मिली है.
‘चीन डरने वाला नहीं’
चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक़, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा, चीन तीसरे पक्ष के किसी दबाव में आने वाला नहीं.
गुओ ने यह भी कहा कि चीन ने हमेशा दुनिया भर के देशों के साथ समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किया है. ऐसा सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और न ही यह किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप या दबाव के अधीन है.
भारत की अमेरिका को दो टूक
अमेरिकी कांग्रेस से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले बिल के पारित होने पर भारत ने भी अमेरिका को दो टूक चेतावनी दे दी है. विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि वो पूरे मामले पर पैनी नज़र रखे हुए है. भारत ने अमेरिकी अधिकारियों को पहले ही बता दिया है कि अगर अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ लगाए जाते हैं तो ये अमेरिका-भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर असर डालेगा और दुनियाभर की एनर्जी मार्केट प्रभावित होगी.
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दरअसल, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026 पारित किया है. यह क़ानून ट्रंप को रूस पर प्रतिबंध लगाने और भारत और चीन जैसे उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 100% टैरिफ़ लगाने का अधिकार देता है. इस बिल को पास करने के बाद अमेरिका ने रूस के मित्र देशों को आंख दिखाते हुए अपना रवैया सुधारने की चेतावनी भी दी है. हालांकि न तो भारत और न ही चीन, दोनों ने इस दबाव की नीति को मानने से साफ इंकार कर दिया है.