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मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग... ईरान का अमेरिका पर तगड़ा पलटवार, कई देशों तक पहुंची युद्ध की आग

एक महीने बाद मिडिल ईस्ट में फिर जंग भड़क चुकी है. अमेरिका के IRGC ठिकानों पर हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस पर मिसाइलें दागीं. बहरीन और कुवैत में भी ड्रोन हमले हुए. जॉर्डन ने 13 में से 10 मिसाइलें हवा में नष्ट कर दीं.

मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग... ईरान का अमेरिका पर तगड़ा पलटवार, कई देशों तक पहुंची युद्ध की आग
Representative Photo Via Canva
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Middle East War: मिडिल ईस्ट में करीब एक महीने की खामोशी के बाद एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. मतलब एक बार फिर से युद्ध की चिंगारी भड़क चुकी है. जो पूरी दुनिया की मुसीबत एक बार फिर से बढ़ाने वाली है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव अब कई देशों तक पहुंच गया है. अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को निशाना बनाया. इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थित प्रिंस हसन एयरबेस और वहां मौजूद अमेरिकी मरीन ठिकाने पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं.

जॉर्डन, बहरीन और कुवैत तक पहुंचा हमलों का असर

ईरान के हमले का असर सिर्फ जॉर्डन तक सीमित नहीं रहा. बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले की खबर सामने आई है. आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में ड्रोन हमलों की पुष्टि की है. जॉर्डन की सेना के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने सीमा में दाखिल हुई 13 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 10 को हवा में ही नष्ट कर दिया. बाकी तीन मिसाइलें आबादी से दूर वीरान इलाकों में गिरीं. फिलहाल इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

IRGC का बड़ा दावा

IRGC ने इन हमलों को अमेरिका के लिए 'अफसोसनाक जवाब' बताया है. संगठन ने दावा किया कि उसके हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए. हालांकि, इस दावे की अमेरिका की ओर से पुष्टि नहीं हुई है. एक अमेरिकी अधिकारी ने इसे झूठा बताया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM की ओर से भी किसी अमेरिकी सैनिक के मारे जाने की जानकारी नहीं दी गई है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, बहरीन के एयरबेस पर हमला रडार सिस्टम और उन इलाकों को निशाना बनाकर किया गया, जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद थे. दूसरी तरफ जॉर्डन के मफरक शहर में सायरन बजने और मिसाइलों को हवा में रोके जाने की खबर सामने आई. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से शुरू हुआ नया टकराव

दरअसल, मौजूदा टकराव की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास IRGC के ठिकानों पर हमला किया. CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की ओर से कमर्शियल जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ की गई कोशिशों के जवाब में की गई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि यह कार्रवाई ईरान की ओर से होर्मुज में समुद्री माइनें बिछाने की कोशिश और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हुए मिसाइल हमले का जवाब थी. ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका और ज्यादा सख्त जवाब देगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इससे भी बड़ा हमला आगे हो सकता है.

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ईरान के कई इलाकों में धमाकों की खबर

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ईरानी सरकारी मीडिया ने कई इलाकों में धमाकों की जानकारी दी है. इनमें क्वेश्म आइलैंड, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, सिरिक, असलुयेह, कोनारक और लावन शामिल हैं. जिरोफ्त के एक सिविलियन एयरपोर्ट पर भी हमले की खबर सामने आई है. इन हमलों के बीच सिरिक से आई खबर ने चिंता और बढ़ा दी. ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक, अमेरिकी हमले में एक घर को निशाना बनाया गया, जहां शादी समारोह चल रहा था. इस घटना में एक बच्चे समेत कम से कम चार लोगों की मौत हुई और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए.

मोजतबा खामेनेई ने दी अमेरिका को चेतावनी

हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला संदेश जारी किया. उन्होंने कहा कि ईरानी सेना के पास वॉशिंगटन के लिए ऐसे सबक हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. IRGC ने उत्तरी इराक के इरबिल प्रांत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा भी किया है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

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पूरे मिडिल ईस्ट के लिए अमेरिका ने जारी की चेतावनी

बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने पूरे मिडिल ईस्ट के लिए फिर यात्रा चेतावनी जारी की है. वहीं ईरान और ओमान जहाजों की आवाजाही को लेकर एक नए फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की.

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बढ़ी चिंता

सबसे बड़ी चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी बनी हुई है. IAEA ने बताया है कि जून 2025 में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद से उसके निरीक्षक ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण नहीं कर सके हैं. ऐसे में ईरान के मौजूदा यूरेनियम भंडार की स्थिति को लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है.

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बताते चलें कि मिडिल ईस्ट में जिस तेजी से हमले बढ़ रहे हैं, उससे यह साफ है कि तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है या कूटनीतिक कोशिशें इस संकट को संभालने में कामयाब होती हैं.

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