मोदी-पुतिन की फिर सामने आई जुगलबंदी, लपक कर मिले गले, कार में एक साथ किया सफर...ट्रंप-पाकिस्तान का चिढ़ना तय
बिश्केक में एक बार फिर PM मोदी की 'कार डिप्लोमेसी' सामने आई. उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक ही गाड़ी में सफर किया. अमेरिका और उसकी कठपुतली पाकिस्तान को तस्वीरें देख अच्छी नहीं लगेंगी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बिश्केक में मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जहां भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध और विश्व में शांति स्थापित करने को लेकर चर्चा हुई. इस बीच पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमेसी' भी देखने को मिली. दरअसल, बिश्केक में पीएम मोदी एक बार फिर से अपने मित्र और राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक ही कार में बैठे नजर आए.
पुतिन के साथ पीएम मोदी की कार डिप्लोमेसी, ट्रंप का चिढ़ना तय!
इससे पहले, दिसंबर 2025 में जब राष्ट्रपति पुतिन भारत के दौरे पर आए थे, तब पीएम मोदी उनका स्वागत करने के लिए दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे थे. इस खास मौके पर दोनों ने एक ही कार से आगे के कार्यक्रम के लिए प्रस्थान किया था.
किस-किस के साथ मोदी ने किया कार में सफर?
पीएम मोदी की कार डिप्लोमेसी रूसी राष्ट्रपति के अलावा, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम, जर्मन चांसलर, जॉर्डन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्लाह II, सेशेल्स के राष्ट्रपति पेट्रिक हर्मिनी, जापान की वर्तमान पीएम सनाए तकाइची और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ भी देखने को मिली.
वहीं, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक से पहले भारत के प्रधानमंत्री ने संबोधन दिया. इस संबोधन के दौरान उन्होंने यूक्रेन युद्ध का जिक्र किया और शांति की ओर बढ़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत शांति का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा.
उन्होंने कहा, "यूक्रेन के विषय पर भी हम चर्चा करते रहे हैं. पिछली बार भी जब हम मिले थे तो आपने विस्तार से मुझे जानकारी दी थी. भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और शांति के हर प्रयास के लिए आगे भी समर्थन करता रहेगा. युद्ध में बिताया एक-एक दिन मानवता को पीछे धकेलता है और शांति की तरफ बढ़ाया गया एक-एक कदम नई आशा और उमंगों से भर देता है."
उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की दिशा में जाना ही होगा, जो मानवता की भलाई के लिए भी आवश्यक है. जल्द से जल्द सभी विषयों का शांतपूर्ण ढंग से समाधान हो, यही मानवता की पुकार और भारत का संदेश है. महात्मा गांधी की धरती और बुद्ध की धरती का एक ही संदेश है शांति का मार्ग.
पीएम मोदी का 'व्यक्तिगत ध्यान' भारत-रूस विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा : पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को कहा कि भारत-रूस संबंध विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के सिद्धांतों के आधार पर मजबूत होते जा रहे हैं. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'व्यक्तिगत ध्यान' ने मदद की है.
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— NMF NEWS (@NMFNewsNational) September 1, 2026
बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, "मैं संतोष के साथ यह भी नोट करना चाहूंगा कि रूसी-भारतीय संबंध विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी के सिद्धांतों के आधार पर मजबूत होते जा रहे हैं. निश्चित रूप से, प्रधानमंत्री, यह रूसी-भारतीय संबंधों के विकास पर आपके व्यक्तिगत ध्यान और हमारे बीच विकसित हुए बहुत ही गर्मजोशी भरे व्यक्तिगत और मैत्रीपूर्ण संबंधों से संभव हुआ है, न केवल व्यावसायिक स्तर पर बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी, इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं."
उन्होंने कहा, "मुझे फिर से मिलकर बहुत खुशी हो रही है. इस बार, हमारी बैठक एससीओ शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हो रही है, एक ऐसा संगठन जो ग्लोबल साउथ और पूर्व के देशों के बीच संबंधों और संपर्कों को गहरा करने, क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने और एक न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय दुनिया को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और काम कर रहा है."
जयशंकर से मुलाकात को पुतिन ने किया याद!
पुतिन ने हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा को याद किया और कहा कि वह इस यात्रा के दौरान कही गई हर बात से 'पूरी तरह सहमत' हैं. उन्होंने उल्लेख किया कि 2027 में भारत और रूस राजनयिक संबंधों की स्थापना की 80वीं वर्षगांठ मनाएंगे और रूस सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भी गंभीरता से तैयारी कर रहा है.
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रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा, "व्यापार और आर्थिक सहयोग आम तौर पर सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं. पिछले साल थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल के पहले छह महीनों में व्यापार पहले ही 2.6 प्रतिशत बढ़ चुका है. एक हफ्ते पहले, मॉस्को में अंतर-सरकारी आयोग की बैठक हुई थी, जिसने भी अच्छे परिणाम दिखाए हैं."
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उन्होंने कहा कि रूस में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या के मामले में भारत अग्रणी देशों में से एक है और पिछले 10 वर्षों में यह आंकड़ा सात गुना बढ़ गया है. उन्होंने इसे 'एक उल्लेखनीय उपलब्धि' बताया और कहा कि अब यह संख्या लगभग 40,000 है.