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नेपाल की तबाही पर WHO का मरहम, पीड़ितों के लिए 1.5 लाख डॉलर की मदद जारी

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 730 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, करीब 2500 लोग लापता हैं, 200 से ज्यादा लोग घायल हैं और 74 लोगों का इलाज चल रहा है.

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30 Aug 2026
( Updated: 30 Aug 2026
04:41 PM )
नेपाल की तबाही पर WHO का मरहम, पीड़ितों के लिए 1.5 लाख डॉलर की मदद जारी
Image Source- IANS Via Xinhua
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ को देश की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया जा रहा है. इस मुश्किल घड़ी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मदद का हाथ बढ़ाया है. WHO ने नेपाल में बाढ़ प्रभावित समुदायों की तत्काल स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय स्वास्थ्य आपातकालीन कोष से 1 लाख 50 हजार डॉलर की आपातकालीन राशि जारी की है.

WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी डॉ. नीलेश बुद्धा ने कहा, ‘आपातकालीन फंड तत्काल प्राथमिकताओं को पूरा करने में मदद करेगा. WHO राहत और रिकवरी प्रयासों के जरिए नेपाल का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है.’

पहले भेजी थी मेडिकल सप्लाई 

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इससे पहले WHO ने 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही WHO ने जरूरी मेडिकल सप्लाई भेज दी थी. इसमें एक इंटरएजेंसी इमरजेंसी हेल्थ किट भी शामिल थी, जो करीब 10 हजार लोगों की 3 महीने तक की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा कर सकती है. इसके साथ ही बहुउद्देश्यीय टेंट भी भेजे गए थे. 

जरूरत को देखते हुए WHO ने प्रभावित इलाकों के लिए सर्जिकल मास्क, ग्लव्स, हैंड सैनिटाइजर और अन्य मेडिकल सामान भी जुटाए हैं. 

700 से ज्यादा लोगों की मौत

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सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 730 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, करीब 2500 लोग लापता हैं, 200 से ज्यादा लोग घायल हैं और 74 लोगों का इलाज चल रहा है. बागमती और गंडकी प्रांत के छह जिलों में बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. 

नेपाल में तबाही और बर्बादी का मंजर

यहां करीब 10 हजार परिवारों को तुरंत राहत की जरूरत है. बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है और कई लोग बेघर हो गए हैं. स्वास्थ्य सुविधाओं समेत जरूरी बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है. सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा जिले में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए हैं और धादिंग में दो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं. सड़कें टूटने से धादिंग और त्रिशूली के दो अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है. 

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WHO, सरकार और अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को बनाए रखने पर काम कर रहा है. बाढ़ के बाद डूबने, चोट, डायरिया, सांस की बीमारी, पानी और खाने से होने वाली बीमारियों और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. इसके साथ ही अपनों को खोने, घर और रोजगार छिनने से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ रहा है. 

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