अमेरिका ने दिया ‘धोखा’ तो सऊदी अरब को मिला इस देश का साथ, हूती विद्रोहियों के खिलाफ उतार दी सेना!
यानबू की सुरक्षा का वादा ऐसे समय में किया गया है जब मोहम्मद बिन सलमान का साथ उन्हीं के साथी देशों ने छोड़ दिया. अमेरिका और पाकिस्तान जैसे देशों ने कदम पीछे खींच लिए.
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सऊदी अरब पर हूतियों के हमले के बाद मिडिल ईस्ट में सुरक्षा को लेकर चिंता उठ गई. इस बीच मक्का समझौते के तहत पाकिस्तान अभी सऊदी अरब का साथ देने पर विचार ही कर रहा है. वहीं, हमेशा की तरह अमेरिका सीधे हस्तक्षेप से इंकार कर रहा है. ऐसे में एक पश्चिमी देश है जो सऊदी अरब का साथ देने आगे आया है.
सऊदी अरब इन दिनों यमन के हूती विद्रोहियों के हमले से घिरा है. तनाव अभी चरम पर है, ऐसे में जहां अमेरिका और पाकिस्तान ने कदम पीछे खींच लिए, वहीं, फ्रांस ने सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का ऐलान किया है.
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने क्या कहा?
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सऊदी अरब में अपनी सेना भेजने की बात कही है. उन्होंने फ्रांसीसी टीवी चैनल TF1 और France 2 को दिए इंटरव्यू में इसकी जानकारी दी है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा,
‘फ्रांस सऊदी अरब के अहम तेल केंद्र यानबू की सुरक्षा के लिए सैनिक, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भेजेगा.’
हालांकि मैक्रों ने यह भी साफ किया है कि फ्रांस सीधे हूतियों के खिलाफ युद्ध में नहीं उतरेगा, बल्कि सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा करेगा. इससे मतलब है कि फ्रांस के सैनिक सबसे पहले मिशन यानबू में सुरक्षा और एयर डिफेंस को मजबूत और सुनिश्चित करेंगे.
क्यों जरूरी है यानबू की सुरक्षा
यानबू न केवल सऊदी अरब के लिए बल्कि दुनिया के कई देशों के लिए उर्जा का अहम ठिकाना है. यह शहर लाल सागर के किनारे पर स्थित हैं. जहां तेल के बड़े स्टोरेज और रिफाइनिंग प्लांट हैं. साथ ही साथ यह ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से भी जुड़ा है,
इसी के जरिए सऊदी अरब का तेल फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करते हुए लाल सागर के रास्ते दुनिया के बाजारों तक जाता है.
फ्रांस ने यानबू की सुरक्षा का वादा ऐसे समय में किया है जब मोहम्मद बिन सलमान मोहम्मद बिन साथी हो गए. यानी अमेरिका और पाकिस्तान जैसे देशों ने उनका साथ छोड़ दिया. अमेरिका जो ईरान के खिलाफ सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल करता रहा है. वहीं, पाकिस्तान ने मक्का समझौते के तहत सऊदी पर हमले को पाकिस्तान पर हमला बताते हुए साथ देने का वादा किया था, लेकिन जब सच में हमला हुआ, साथ देने की बारी आई तो पाकिस्तान अभी तक कोई फैसला नहीं ले पाया है.
हालांकि इससे पहले ब्रिटेन ने सऊदी को मदद देने का फैसला किया था. ब्रिटिश पीएम एंडी बर्नहैम ने कहा ब्रिटेन एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर देगा. यानी हवा में उड़ते सऊदी लड़ाकू विमानों में ईंधन भरा जा सकेगा.
हूती विद्रोहियों का हमला तेज
हूती ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने ताइज के हैफन जिले पर हवाई हमला किया था. हूती संचालित अल-मसीरा टेलीविजन रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के विमानों ने ये कार्रवाई की. ये हवाई हमले पश्चिमी यमन में जमीनी स्तर पर हूती विद्रोहियों के तेजी से आगे बढ़ने के बाद हुए हैं. इस दौरान समूह ने यमन के लाल सागर तट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से सटे इलाकों की ओर बढ़ रहा है.
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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि महीने की शुरुआत से यमन में जारी संघर्ष के कारण 1,25,000 लोग विस्थापित हुए हैं. अल-मसीरा ने सरकारी सूत्र के हवाले से दावा किया है कि अल-जाहिर गांवों और हैदान के कुछ हिस्सों पर सऊदी हमला जारी है.