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नेपाल में आंखों के सामने देखा तबाही का मंजर… चाय की तलब ने बचा ली 5 दोस्तों की जान, 10 मिनट की दूरी पर थी मौत

नेपाल के भोटे कोशी में आई भीषण बाढ़ ने कई परिवार उजाड़ दिए. मृतकों में भारत समेत कई देशों के लोग शामिल हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी लोग है जो इस आपदा में चमत्कारिक तरीके से बचकर निकले हैं.

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30 Aug 2026
( Updated: 30 Aug 2026
01:32 PM )
नेपाल में आंखों के सामने देखा तबाही का मंजर… चाय की तलब ने बचा ली 5 दोस्तों की जान, 10 मिनट की दूरी पर थी मौत
Image Source- IANS/Canva
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चाय किसी के लिए नींद भगाने का जरिया है तो किसी के लिए रिफ्रेशमेंट ड्रिंक, किसी टूटे दिल का सहारा है तो किसी की मोहब्बत की कहानी. कुछ लोगों के लिए यह तलब हो सकती है, किसी के लिए नशा तो किसी के लिए जुनून… और इसी जुनून ने नेपाल में आई बाढ़ में 5 दोस्तों की जान बचा ली. 

नेपाल के भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने कई परिवार उजाड़ दिए. मृतकों में भारत समेत कई देशों के लोग शामिल हैं. हालांकि कुछ ऐसे भी लोग है जो इस आपदा में चमत्कारिक तरीके से बचकर निकले हैं. इनमें छत्तीसगढ़ से पहुंचे 5 युवकों का एक ग्रुप भी है. जो चाय पीने न रूका होता तो शायद इस तबाही की चपेट में आ जाता. 

चाय ने बचा ली जान 

रायपुर के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर ये वो पांच लोग हैं जो नेपाल से सुरक्षित लौट आए हैं. इन्होंने बताया कि वह बाढ़ वाले दिन भोटे कोशी और त्रिशूली नदी वाले इलाके में ही थे. लेकिन वह एक जगह 10 मिनट के लिए चाय पीने रुक गए थे. इसी 10 मिनट में भोटे कोशी में प्रलय आया जिसने कई जानें लील लीं, लेकिन भारत से गए नारायण सेन और उनका ग्रुप बच गया. 

उनका ग्रुप 26 अगस्त को धड़िंग जिले में था, यहां मलेखू कस्बे के एक होटल में सभी दोस्त चाय पीने के लिए रुक गए थे. वो समय सुबह करीब 9 बजकर 30 मिनट का था. इसी समय भोटे कोशी में बाढ़ आई. नारायन सेन का कहना है कि वे लोग बाल-बाल बचे हैं. अगर वह चाय पीने नहीं रुकते तो बाढ़ का शिकार हो जाते. बाढ़ के बाद उन्हें अपना ट्रिप बीच में ही छोड़कर आना पड़ा. भारत से गए इस ग्रुप ने बाढ़ का मंजर अपनी आंखों के सामने देखा. वे बहुत घबरा गए थे. इस दौरान स्थानीय लोगों ने उनकी मदद भी की. 

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नेपाल की तबाही में कितने लोगों की मौत 

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, भूस्खलन से प्रभावित इलाकों से अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. जबकि 2400 से ज्यादा लोग लापता हैं. 

स‍िन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, काठमांडू जिला प्रशासन कार्यालय ने एक इमरजेंसी जारी कर विभिन्न संगठनों, संस्थानों, कंपनियों और आम नागरिकों से रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों के पीड़ितों की मदद के लिए राहत सामग्री दान करने की अपील की. 

यह भी पढ़ें- नेपाल में फिर बाढ़ का अलर्ट जारी... अब तक 734 शव बरामद, 2,498 लापता; भारत ने फिर भेजी राहत सामग्री की खेप

भोटेकोसी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ ने प्रभावित क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई. इस आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है.

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भारत से लगातार भेजी जा रही है मदद 

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इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता की चौथी उड़ान रवाना कर दी है. यह सहायता भारतीय वायुसेना के सी-130 विमान के जरिए भेजी गई है, जिसमें 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री शामिल है.

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