BJP के बाद अब RSS में बड़े बदलाव की तैयारी? नई पीढ़ी पर फोकस, जानें संघ प्रमुख मोहन भागवत को लेकर क्या है अपडेट
बीजेपी ने नई टीम के जरिए संगठन में पीढ़ीगत बदलाव शुरू किया है. युवा नेतृत्व को फैसलों की स्वतंत्रता और वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शन की भूमिका दी गई है.
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बीजेपी ने अपने संगठन की नई टीम के जरिए बदलती राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के मुताबिक खुद को नए स्वरूप में ढालने की शुरुआत कर दी है. पार्टी के इस बदलाव में सबसे अहम बात यह है कि नए नेतृत्व को फैसले लेने में पहले के मुकाबले ज्यादा स्वतंत्रता दी जा रही है. वहीं, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका अब मुख्य रूप से मार्गदर्शन और जरूरी सलाह देने तक सीमित रखने की दिशा में दिखाई दे रही है. इस बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ (RSS) में भी बदलाव की शुरुआत हो सकती है.
पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संगठन को जरूरत पड़ने पर अनुभवी नेताओं की सलाह और सहयोग मिलता रहेगा, लेकिन रोजमर्रा के संगठनात्मक फैसलों में नई टीम को स्वतंत्र भूमिका दी जाएगी. राजनीतिक दलों में समय-समय पर पीढ़ीगत बदलाव होते रहे हैं, लेकिन बीजेपी ने इस बार सत्ता में रहते हुए ही संगठन के भीतर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई है.
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युवा नेतृत्व के साथ अनुभवी चेहरों का संतुलन
बीजेपी के युवा अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम में युवाओं के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी है. इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने के साथ पुराने अनुभव को भी साथ लेकर चलना चाहती है. हालांकि, फैसले लेने की जिम्मेदारी नए नेतृत्व के हाथों में रखने पर खास जोर दिया गया है. बीजेपी के इतिहास पर नजर डालें तो संगठन में बदलाव कोई नई बात नहीं है. वर्ष 1980 में पार्टी के गठन के बाद लगभग हर दशक में संगठनात्मक स्तर पर बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं. 1990 के दशक में तत्कालीन संगठनात्मक नेतृत्व के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं को केंद्रीय भूमिका में लाया गया था. इनमें नरेंद्र मोदी भी प्रमुख चेहरों में शामिल थे. इसके बाद 21वीं सदी के पहले और दूसरे दशक में भी पार्टी में नेतृत्व और संगठन को नई दिशा देने की प्रक्रिया जारी रही. हालांकि, पहले की टीमों में वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन और हस्तक्षेप अपेक्षाकृत अधिक रहा. इस बार परिस्थितियां कुछ अलग दिखाई दे रही हैं. नेतृत्व युवा है और उसे फैसले लेने की स्वतंत्रता भी दी गई है. संगठन को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय भूमिका भी अहम मानी जा रही है.
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संघ में भी अगले साल बदलाव के संकेत
हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी अगले साल कुछ अहम परिवर्तन होने की संभावना जताई जा रही है. बदलते सामाजिक माहौल और नई पीढ़ी की बढ़ती भूमिका को देखते हुए संगठन स्तर पर युवा वर्ग पर फोकस बढ़ाने की चर्चा है. खासकर Gen Z और Gen Alpha जैसी नई पीढ़ियों के बीच बदलती सोच और राजनीतिक रुझानों को देखते हुए बीजेपी और संघ के सामने नई चुनौतियां हैं. हालांकि, संघ प्रमुख के बदलाव को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं है. मोहन भागवत वर्ष 2009 से सरसंघचालक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. संघ में सरसंघचालक का चुनाव नहीं होता, बल्कि यह पद आम सहमति की प्रक्रिया से तय होता है. ऐसे में बीजेपी में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया के साथ संघ में भी आने वाले समय में संगठनात्मक बदलाव पर नजर रहेगी.
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बहरहाल, बीजेपी में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की यह पहल पार्टी के बदलते संगठनात्मक स्वरूप का संकेत है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि युवा नेतृत्व और अनुभवी नेताओं का यह संतुलन आने वाले समय में पार्टी की रणनीति को किस तरह प्रभावित करता है.