CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का टूटा पैर? कॉकरोचों के विरोध में उतरा पूरा गांव, दिपके ने सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
जयपुर में बीते दिन सीजेपी वॉलंटियर्स पर एक गांव में हमला हुआ. दावा किया जा रहा है कि इस दौरान आशुतोष रांका का पैर टूट गया है. इसी बीच अभिजीत दिपके ने बीजेपी को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है.
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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नेता अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि जयपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने महिलाओं समेत सीजेपी वॉलंटियर्स के साथ बुरा बर्ताव किया. उन्होंने कहा कि जनता आने वाले चुनावों में भाजपा को सबक सिखाएगी. इसके अलावा अभिजीत दिपके ने राजस्थान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि आशुतोष रांका और CJP कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपी लोगों पर कार्रवाई की जाए, गिरफ्तारी हो और उनकी मांगें नहीं मानीं गई तो जंतर-मंतर जैसे विरोध प्रदर्शन किए जाएगा. इसी बीच दावा किया जा रहा है कि रांका और दूसरे कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट में कथित तौर रांका का पैर टूट गया है. हालांकि इसी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
आशुतोष रांका का टूटा पैर?
वहीं जिस गांव में सीजेपी के सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सीजेपी वॉलंटियर्स पहुंचे थे, वहां के ग्रामीण ही CJP के विरोध में उतर गए हैं. गांव वालों का दावा है कि सीजेपी वाले गांव में राजनीति चमकाने पहुंचे थे, उनका मकसद स्कूल को ठीक करना नहीं बल्कि उसे साजिश के तहत तोड़ना था. इसी के चलते लोगों ने विरोध किया और उन्हें दौड़ाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया.
CJP के विरोध में गांव वाले?
ग्रामीणों का आरोप है कि CJP की टीम स्कूल की हालत सुधारने नहीं, अपनी राजनीति चमकाने आई थी. इस दौरान विरोध इतना बढ़ा कि माहौल हाथापाई तक पहुंच गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्कूल का मुद्दा उठाने गए थे, लेकिन गांव वालों ने कहा, पहले नीयत साफ दिखाओ, फिर राजनीति करना!
पको बता दें कि जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा इलाके में एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान हुई मारपीट ने सियासी हंगामा खड़ा कर दिया है. बीते दिन सीजेपी की टीम पर हमले का आरोप लगा. इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कई पोस्ट सामने आए हैं.
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने 'एक्स' पर लिखा, "राजस्थान में आखिर हो क्या रहा है? भाजपा के लोगों ने आशुतोष रांका और सीजेपी के वॉलंटियर्स पर हमले किए हैं. राजस्थान पुलिस इस तरह के हमले की इजाजत कैसे दे सकती है?" एक अन्य पोस्ट में अभिजीत दिपके ने कहा कि आशु पर राजस्थान में भाजपा के गुंडों ने हमला किया है. आशु और सीजेपी के अन्य वॉलंटियर्स को पीटा गया है और वे घायल हुए हैं.
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 'एक्स' पर पूरी घटना का जिक्र किया. उन्होंने लिखा, "आज घिनौनेपन की सारी हदें पार हो गईं." रामपुरा, कंवरपुरा में पिछले कई सालों से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है. जब उनकी टीम निरीक्षण करने पहुंची तो उन पर सरेआम मारपीट और पत्थरबाजी की गई. कारों के शीशे तोड़ दिए गए, टीम पर पत्थर बरसाए गए, कपड़े फाड़ दिए गए. टीम के कार्यकर्ता को पीटा गया.
आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कहने पर हुआ है. उन्होंने लिखा, "मदन दिलावर को बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहें, यह मंजूर है लेकिन स्कूल ठीक हो जाए यह मंजूर नहीं. आपने आज गुंडे भेजकर पूरे देश में राजस्थान को शर्मसार कर दिया लेकिन हम इस गुंडागर्दी से डरने वाले लोग नहीं हैं. स्कूल तो ठीक कराने ही होंगे."
इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बयान दिया. उन्होंने कहा, "यह भाजपा की गलती है. किसी को भी विरोध करने से नहीं रोकना चाहिए और ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. स्कूलों की हालत जनता के सामने आनी चाहिए. आपको अपना एक्शन प्लान बताना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं."
अभिजीत दिपके ने राजस्था सरकार को दिया अल्टीमेटम!
जयपुर में सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका और सीजेपी वॉलंटियर्स पर हुए कथित हमले पर सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि एक स्कूल भैंसों के बाड़े में चल रहा था, और आशुतोष रांका आज उसका पर्दाफाश करने के लिए वहां पहुंचने वाले थे. जब आशुतोष अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे, तो उन पर बहुत गंभीर हमला किया गया. उन पर पत्थर फेंके गए, गाड़ियों पर हमले किए गए, और वहां मौजूद महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई.
दीपके ने कहा कि हम सबने ऐसे वीडियो देखे हैं जिनमें भाजपा के गुंडे सीजेपी वॉलंटियर्स को झुंड में पीट रहे हैं और उन पर हमला कर रहे हैं. ये लोग क्या चाहते हैं? हम बस इतना चाहते हैं कि स्कूल ठीक हो जाए. उन्हें स्कूल ठीक कराने से इतनी दिक्कत क्यों है? अगर उन्होंने स्कूल ठीक कर दिया होता, तो वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती."
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दीपके ने कहा कि इस मामले के खिलाफ क्या हम आवाज न उठाएं. ये नहीं चाहते कि गरीबों के बच्चे पढ़ें और उनके लिए अच्छे स्कूल हों. अगर ये ऐसा नहीं चाहते तो इनको तकलीफ होती की बच्चे स्कूल में पढ़ने के बजाय भैंस के बाड़े में क्यों पढ़ रहे हैं. भाजपा को बच्चों की बेहतर शिक्षा पर बात करनी चाहिए. भाजपा की गुंडागर्दी खत्म होने वाली है, जनता आने वाले चुनाव में इन लोगों को सबक सिखाएगी.
राजस्थान सरकार ने एक प्रस्ताव पास किया था कि वीडियो और फोटोग्राफी के लिए बाहरी व्यक्तियों को प्रवेश न मिले. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि देखिए, सरकारी स्कूलों में कई गलत चीजें हो रही हैं. उदाहरण के लिए, कल मैं कहीं गया था और देखा कि बाहर से लोग आकर वहां गांजा पी रहे थे और शराब पी रहे थे. उस समय, ऐसा कोई नोटिस नहीं होता कि बाहरी लोग अंदर नहीं आ सकते और सरकार को कोई दिक्कत नहीं होती. जैसे ही कोई वहां जाकर दिखाता है कि स्कूल में पानी नहीं है, हालत कितनी खराब है या बताता है कि पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो सरकार को दिक्कत होने लगती है. तब सरकार कहती है कि बाहरी लोग स्कूल में नहीं आ सकते. वे क्यों नहीं आ सकते? जिन लोगों के साथ आशुतोष स्कूल जा रहे हैं, और जिन लोगों के साथ मैं स्कूल जा रहा हूं, वे उसी गांव के हैं और उन्हीं गांवों के बच्चे उन सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं. वे चाहते हैं कि स्कूल बेहतर हो, तो सरकार क्यों नहीं चाहती कि स्कूल बेहतर हो? सरकार को क्या दिक्कत है? क्या सरकार में बैठे लोग सिर्फ हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए चुने गए हैं?"
अभिजीत दिपके ने बीजेपी पर लगाया गुंडागर्दी का आरोप!
आशुतोष रांका और वॉलंटियर्स पर कथित हमले पर अभिजीत दिपके ने कहा,"मुझे लगता है कि ये लोग डरे हुए हैं. पूरे देश के सामने उनके झूठ बेनकाब हो गए हैं. हमने पहले धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देते देखा और उसके बाद 12 साल के बच्चे भी उनकी पोल खोल रहे हैं. उन्हें इस बात से डर लगता है. वे देख सकते हैं कि देश के लोग अब भाजपा को समझ गए हैं. भाजपा की पूरी सच्चाई देश के सामने आ गई है. अब उन्हें लगता है कि किसी तरह लोगों को डरा-धमकाकर वे उन्हें चुप करा सकते हैं ताकि कोई उनके खिलाफ न बोले. ऐसा नहीं होगा. देश अब जाग चुका है और जंतर-मंतर के बाद इस देश के लोगों ने डरना छोड़ दिया है."
All levels of disgust have been crossed today.
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) August 21, 2026
रामपुरा, कंवरपुरा में पिछले काफ़ी सालों से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है। लेकिन जब हम वहाँ निरीक्षण करने पहुंचे तो सरेआम मारपीट, पत्थरबाजी की गई। कारों के शीशे फोड़े गए, टीम पर पत्थर बरसाये गए। कपड़े फाड़े गए। ट्यूब में पत्थर… pic.twitter.com/H15osb1ODA
अपने एमएमआरडीए मामले को लेकर किए गए पोस्ट पर अभिजीत दिपके ने कहा, "एमएमआरडीए के उम्मीदवार कुछ दिन पहले मुझसे मिलने आए थे और उन्होंने मुझे बताया कि कैसे जो लोग दूसरी परीक्षाओं में कम नंबर ला रहे थे, 50 या 60 नंबर पा रहे थे, वे अचानक एमएमआरडीए परीक्षा में टॉपर बन गए और 200 में से 200 नंबर ले आए. उनमें से कुछ अधिकारियों के बच्चे बताए जाते हैं, जैसा कि मुझे बताया गया. मुझे यह भी बताया गया कि इनमें से कई टॉपर एक ही सेंटर से हैं. यह कैसे हो सकता है कि कई टॉपर एक ही सेंटर से हों? इसका मतलब है कि उस सेंटर पर कुछ गड़बड़ हुई होगी, और ऐसा होने के लिए कोई सेटिंग की गई होगी. एमएमआरडीए के उम्मीदवार शुक्रवार शाम फिर मुझसे मिलने वाले हैं."
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एनसीईआरटी किताबों के बदलाव को लेकर अभिजीत दिपके ने कहा, "जो लोग खुद पढ़े-लिखे नहीं हैं, जिन्हें शिक्षा से ही दिक्कत है, वे लोग एनसीईआरटी की किताबें कैसे लिखेंगे या सिलेबस कैसे तय करेंगे? उन्होंने न तो संविधान के बारे में पढ़ाया है और न ही कभी अपने दफ्तरों में तिरंगा फहराया है और वे खुद कभी स्कूल नहीं गए. तो, वे एनसीईआरटी का सिलेबस कैसे तय करेंगे या एनसीईआरटी की किताबें कैसे लिखेंगे."