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गुजरात में रेलवे का बड़ा कमाल, रातों-रात पटरी के नीचे बना दिया अंडरपास

Railway: अंडरपास अहमदाबाद के वस्त्रापुर में पश्चिम रेलवे ने महज 7 घंटे 15 मिनट में रेलवे लाइन के नीचे प्रीकास्ट पैदल सबवे स्थापित कर नई मिसाल पेश की. यहां महज 8 घंटे के रेलवे ब्लॉक में रेलवे लाइन के नीचे पूरा पैदल सबवे स्थापित कर दिया गया. इतना ही नहीं, पूरा काम तय समय से 45 मिनट पहले खत्म भी हो गया.

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29 Aug 2026
( Updated: 29 Aug 2026
11:06 AM )
गुजरात में रेलवे का बड़ा कमाल, रातों-रात पटरी के नीचे बना दिया अंडरपास
Image Source: IANS
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Indian Railway: रेलवे लाइन के नीचे अंडरपास या सबवे बनना आम बात नहीं है. आमतौर पर ऐसे काम में कई हफ्ते या महीनों का समय लगता है और रेल यातायात भी प्रभावित होता है. लेकिन अहमदाबाद के वस्त्रापुर में पश्चिम रेलवे ने कुछ ऐसा किया, जिसने इंजीनियरिंग की दुनिया का ध्यान खींचा है. यहां महज 8 घंटे के रेलवे ब्लॉक में रेलवे लाइन के नीचे पूरा पैदल सबवे स्थापित कर दिया गया. इतना ही नहीं, पूरा काम तय समय से 45 मिनट पहले खत्म भी हो गया. रेलवे इसे तेज, सुरक्षित और आधुनिक निर्माण तकनीक की बड़ी सफलता मान रहा है.  रेलवे का दावा है कि इस तकनीक से आने वाले समय में ऐसे कई प्रोजेक्ट तेजी से पूरे किए जा सकेंगे और ट्रेन संचालन पर भी कम असर पड़ेगा.

आधी रात को शुरू हुआ, सुबह तक तैयार

पश्चिम रेलवे ने 25 और 26 अगस्त की रात वस्त्रापुर में रेलवे ट्रैक के नीचे प्रीकास्ट पैदल सबवे लगाने का काम किया. इस काम के लिए रेलवे की ओर से 8 घंटे का ब्लॉक दिया गया था, लेकिन इंजीनियरों और कर्मचारियों की टीम ने तय समय से पहले ही काम पूरा कर लिया। खुदाई से लेकर जगह तैयार करने, सबवे के बड़े हिस्सों को स्थापित करने और इसके बाद रेलवे ट्रैक को दोबारा चालू करने तक का पूरा काम महज 7 घंटे 15 मिनट में पूरा कर लिया गया। यानी रेलवे ने तय समय से करीब 45 मिनट पहले ही पूरा ऑपरेशन खत्म कर दिया.

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स्थानीय लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

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सबवे तैयार होने के बाद वस्त्रापुर इलाके के लोगों को रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अब जोखिम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्हें आने-जाने के लिए एक सुरक्षित पैदल रास्ता मिल जाएगा. इससे रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत तरीके से आवाजाही और ट्रैक पार करने की घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है.
स्थानीय विधायक अमित ठाकेर के मुताबिक, इलाके के लोग लंबे समय से सुरक्षित पैदल रास्ते की मांग कर रहे थे. नए सबवे से उनकी यह परेशानी काफी हद तक दूर होगी. इसके अलावा बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या को कम करने में भी यह संरचना मददगार साबित हो सकती है. इससे मानसून के दौरान स्थानीय लोगों के लिए आने-जाने का रास्ता पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा.

क्या है प्रीकास्ट तकनीक?

इस तकनीक में सबवे के हिस्से पहले से फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं. बाद में उन्हें मौके पर लाकर जोड़ा जाता है.इससे साइट पर निर्माण का समय बहुत कम हो जाता है. साथ ही गुणवत्ता भी बेहतर रहती है और रेलवे ट्रैक पर काम जल्दी पूरा किया जा सकता है. बताया गया कि यह पहल केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के जुलाई 2026 में गुजरात दौरे के बाद आगे बढ़ी. दौरे के दौरान रेलवे के लिए तैयार किए जा रहे प्रीकास्ट ढांचों का प्रदर्शन किया गया था. इसके बाद अहमदाबाद मंडल के अधिकारियों ने वस्त्रापुर में रेलवे लाइन के नीचे पैदल सबवे बनाने का फैसला किया... 

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