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नेपाल बाढ़ में मची तबाही के बीच बालेन सरकार ने बदला रुख, अब भारत समेत कई देशों से ली जाएगी मदद

नेपाल बाढ़ में 587 मौतें और करीब 2,500 लोग लापता हैं. 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है. नेपाल सरकार ने अब DNA जांच, फॉरेंसिक और बचाव कार्यों में सीमित अंतरराष्ट्रीय मदद लेने का फैसला किया है.

नेपाल बाढ़ में मची तबाही के बीच बालेन सरकार ने बदला रुख, अब भारत समेत कई देशों से ली जाएगी मदद
Image Source: IANS
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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच बालेन शाह की सरकार ने विदेशी मदद को लेकर अपना रुख बदल दिया है. इस आपदा में अब तक 587 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है. भारत के लिए भी चिंता की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है.

दरअसल, आपदा के बीच नेपाल सरकार ने अब अंतरराष्ट्रीय खोज और बचाव विशेषज्ञों की सीमित मदद लेने का फैसला किया है. सरकार के इस फैसले को उन देशों की ओर से बनाए गए दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है, जिनके नागरिक बाढ़ के बाद से लापता हैं और उनकी तलाश लगातार जारी है. नेपाल सरकार के इस फैसले के बाद  भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से आने वाली राहत-बचाव एक्सपर्ट और टेक्निकल टीमों को मंजूरी दे दी है.

पहले विदेशी टीमों को अनुमति देने से किया था इनकार

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आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सरकार ने बुधवार 26 जून को कहा था कि उसके अपने सुरक्षा बल और बचावकर्मी राहत एवं खोज अभियान चलाने में सक्षम हैं. इसी आधार पर विदेशी खोज और बचाव टीमों को नेपाल में आने की अनुमति नहीं देने की बात कही गई थी. हालांकि, हालात और बढ़ती जरूरत को देखते हुए अब सरकार ने अपना फैसला बदल दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद कुछ विशेष क्षेत्रों तक सीमित रहेगी. इनमें सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान, DNA टेस्ट और फॉरेंसिक जांच जैसे काम शामिल हैं. यानी नेपाल ने पूरी तरह विदेशी टीमों को जिम्मेदारी सौंपने के बजाय जरूरत के हिसाब से विशेषज्ञ सहायता लेने का रास्ता चुना है.

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PM बालेंद्र शाह ने क्या कहा?

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने विदेशी मदद को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को पूरी तरह ठुकरा दिया है. उनके मुताबिक भारत, चीन और दूसरे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ राहत और बचाव को लेकर लगातार समन्वय किया जा रहा है. प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के लिए हेलिकॉप्टरों की तैनाती की गई है. दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और पुलों को नुकसान पहुंचने के कारण हवाई मदद बेहद अहम साबित हो रही है.

विदेशी नागरिकों के लापता होने से बढ़ा दबाव

नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है. इसी वजह से नेपाल सरकार पर विदेशी खोज और बचाव टीमों तथा विशेषज्ञों की मदद लेने का दबाव बढ़ा. अब सरकार ने सीमित संख्या में विशेषज्ञों को कुछ खास अभियानों में शामिल होने की अनुमति दी है. 

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भारत ने शुरू से बढ़ाया मदद का हाथ

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नेपाल में बाढ़ की भयावह स्थिति सामने आने के बाद से ही भारत ने मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है. नेपाल की ओर से मानवीय सहायता स्वीकार नहीं किए जाने के बावजूद भारत ने अलग-अलग माध्यमों से राहत सामग्री भेजने का सिलसिला जारी रखा. अब तक भारत की ओर से तीन विमान राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुके हैं. वहीं, भारतीय नागरिक भी अपने स्तर पर नेपाल के प्रभावित लोगों की मदद के लिए आर्थिक सहयोग कर रहे हैं. इसी बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल से फोन पर बातचीत की. उन्होंने बाढ़ से हुई भारी तबाही के बाद जारी राहत और बचाव अभियानों के लिए भारत की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया.

कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?

इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके से हुई. शुरुआती आकलनों के मुताबिक, ग्लेशियर के टूटने के बाद बर्फ, चट्टान और मलबे का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर आया. इस मलबे ने नदी के बहाव को प्रभावित किया और कुछ समय के लिए पानी का रास्ता रुक गया. जब यह प्राकृतिक रुकावट टूटी तो पानी, मिट्टी और पत्थरों ने बेहद तेज रफ्तार पकड़ ली. इसका सबसे ज्यादा असर भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े इलाकों पर पड़ा. पानी का वेग इतना ज्यादा था कि रास्ते में आने वाली कई संरचनाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं. सड़कें और पुल टूटने से कई इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ. 

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बहरहाल,  सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना है. मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच नेपाल के सामने हर घंटे नई चुनौती खड़ी हो रही है.

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