‘Gen Z के साथ धोखा करना चाहती है सरकार…’, दिल्ली की सड़कों पर फिर उतरेगी CJP, कर दिया बड़ा ऐलान
CJP ने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा, 'सरकार Gen Z और देश के युवाओं को धोखा देना चाहती है.’
Follow Us:
Cockroach Janata Party Protest March: कॉकरोच जनता पार्टी एक बार फिर राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी. CJP ने 5 सितंबर से शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आह्वान किया है. पार्टी ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए युवाओं को एकजुट किया है.
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया. जबकि उन वादों के बाद ही युवाओं ने सद्भावना दिखाते हुए अपना देशव्यापी विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था.
CJP प्रवक्ता सौरभ दास ने क्या कहा?
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास का कहना है कि हमने पहले भी कहा था कि लोकतंत्र में लगातार बातचीत होनी चाहिए. सरकार में चुने गए लोगों और उन्हें चुनने वालों के बीच बातचीत होनी चाहिए. जब ऐसी बातचीत या चर्चा बंद हो जाती है, तो टकराव होना तय है.
#WATCH | Delhi: Cockroach Janta Party (CJP) Chief Spokesperson Saurav Das says, "We had stated earlier that in a democracy, there must always be a continuous dialogue. There needs to be communication between those elected to the government and those who elected them; when such… pic.twitter.com/n9O97WyAlu
— ANI (@ANI) August 24, 2026Advertisement
वे आगे कहते हैं, ’25 जुलाई को हमने अच्छे इरादे से अपना देशव्यापी आंदोलन वापस ले लिया था. ऐसा इसलिए था क्योंकि सरकार ने देश भर के युवाओं से वादा किया था कि वह हमारी बाकी मांगों को पूरा करेगी. खासकर, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को वापस लेना और भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी को निशाना न बनाने का भरोसा देना. इसके अलावा, NEET पेपर लीक संकट के कारण आत्महत्या करने वालों के परिवारों को उचित मुआवज़ा देने का वादा भी किया गया था. सरकार ने अभी तक इन मांगों को पूरा नहीं किया है. हमें लगता है कि सरकार Gen Z और देश के युवाओं को धोखा देना चाहती है.’
स्कूलों की हालत को लेकर सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा लेटर
इससे पहले CJP ने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दिपके ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को खुला पत्र लिखा. उन्होंने कहा ‘देश को यह जानने की जरूरत है कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं.’
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पत्र की कॉपी शेयर की है, जिसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने पत्र में लिखा है, ‘मंत्री, मैं आपको राज्य भर के सरकारी स्कूलों की स्थिति के बारे में बहुत पीड़ा और चिंता के साथ लिख रहा हूं. भारत को आजादी मिले 80 साल हो गए हैं, फिर भी कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को अभी भी पीने का साफ पानी, कार्यात्मक शौचालय, उचित कक्षाएं या यहां तक कि बैठने के लिए बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘सरकारी स्कूलों से आने वाले और सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले दृश्यों से हम सभी को गहराई से चिंतित होना चाहिए. इस देश में किसी भी बच्चे को ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए. उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया जा रहा है.’
दिपके ने सवाल उठाया, ‘हम अपने देश की प्रगति की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जब बच्चे अभी भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक सबसे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अब समय आ गया है कि देश भर की सरकारें सार्वजनिक शिक्षा की स्थिति को तत्काल प्राथमिकता मानें और युद्ध स्तर पर हमारे स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए काम करें, लेकिन इससे पहले कि हम समस्या का समाधान करें, लोगों को यह जानना चाहिए कि हम आज कहां खड़े हैं.’
CJP ने 6 पॉइंट पर मांगा जवाब
दिपके ने शिक्षा मंत्रालयों से छह बिंदुओं पर सार्वजनिक रूप से जानकारी देने की मांग की है.
पहला, पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण किया गया है, और वर्तमान में कितने को मरम्मत या पूर्ण नवीनीकरण की आवश्यकता है.
दूसरा, वर्तमान में कितने शिक्षण पद स्वीकृत हैं, कितने भरे हुए हैं और कितने रिक्त हैं.
तीसरा, पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना पैसा आवंटित किया गया है और इसमें से कितना वास्तव में खर्च किया गया है.
चौथा, प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उचित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है.
उन्होंने पांचवां सवाल पूछा है कि शिक्षण के अलावा सरकारी स्कूल के शिक्षकों को कौन से गैर-शिक्षण कर्तव्य और जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं.
छठा, वर्तमान में कितने सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर और डिजिटल शिक्षण सुविधाओं, स्वच्छ और कार्यात्मक शौचालयों और बच्चों के लिए उचित खेल सुविधाओं और उपकरणों तक पर्याप्त पहुंच है.
यह भी पढ़ें- ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता…’, नागपुर में नितिन गडकरी ने ऐसा क्यों कहा?
यह भी पढ़ें
अभिजीत दिपके ने पत्र में साफ किया कि यह राजनीति या किसी एक सरकार के बारे में नहीं है. यह हमारे बच्चों के भविष्य के बारे में है. हर बच्चा, चाहे वे कहीं भी पैदा हुए हों या उनके माता-पिता की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, एक सुरक्षित कक्षा, स्वच्छ पेयजल, एक कार्यात्मक शौचालय, बैठने के लिए एक बेंच और उन्हें पढ़ाने के लिए एक शिक्षक का हकदार है.