UK से ही वापस लौट आए CM रेवंत रेड्डी, अमेरिका जाने की नहीं मिली इजाजत, विदेश मंत्रालय ने बताई वजह
CM रेवंत रेड्डी 10 दिन की UK और अमेरिका यात्रा पर हैं, लेकिन वह अमेरिका दौरा नहीं कर पाए और बीच से ही वापस भारत लौटना पड़ा.
Follow Us:
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी 10 दिन के यूके दौरे पर हैं. यहीं से उनको अमेरिका भी जाना था लेकिन वह बीच में ही भारत वापसी कर रहे हैं. वजह है उनके अमेरिका दौरे को केंद्र सरकार ने क्लीयरेंस नहीं दी.
CM रेवंत रेड्डी ने लंदन में तेलंगाना राइजिंग प्रतिनिधिमंडल के साथ कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था. इसके बाद उनका अमेरिका दौरा था, लेकिन केंद्र से क्लीयरेंस न मिलने की वजह से अब वह अमेरिका यात्रा छोड़कर आ रहे हैं.
केंद्र सरकार ने क्यों नहीं दी अमेरिका यात्रा की क्लीयरेंस
दरअसल, विदेशी सरकारी दौरे के लिए मुख्यमंत्रियों को केंद्र सरकार से मंजूरी या क्लीयरेंस लेनी पड़ती है. ये सभी जनप्रतिनिधियों के लिए जरूरी होती है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि उनके मुताबिक मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के सरकारी दौरे का आकलन MEA करता है, इसके बाद ही मंजूरी दी जाती है. उनका कहना था कि तेलंगाना CM का दौरा उनके पद और बाकी नियमों के अनुसार नहीं था. ऐसे में मंत्रालय ने उन्हें क्लीयरेंस नहीं दी. जबकि UK दौरा सभी मानकों के अनुरूप था ऐसे में उसे मंजूरी मिल गई.
पॉलिटिकल क्लीयरेंस का क्या मतलब है और क्यों है जरूरी?
भारत में सरकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधी को विदेश में अपने सरकारी कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है. यह संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत विदेश नीति और विदेशी मामलों का विषय है. जनप्रतिनिधी के विदेश दौरे पर सरकार यह देखती है कि किसी का भी आधिकारिक विदेश दौरा भारत की विदेश नीति के खिलाफ या उस पर असर डालने वाला न हो. मई 2015 में इसके लिए कैबिनेट सचिवालय ने दिशा निर्देश भी जारी किए थे. अगर सब कुछ सरकार के मानकों के अनुसार है तो सरकार इसकी मंजूरी देती है. इसे ही पॉलिटिकल क्लीयरेंस कहा जाता है.
मुख्यमंत्री हों या राज्य सरकार के मंत्री दोनों के लिए अपने निजी और सरकारी विदेश दौरे के लिए केंद्र से परमिशन लेनी ही पड़ती है. इसके लिए सारा ब्यौरा विदेश मंत्रालय और सचिवालय को देना पड़ता है. वहीं, यात्रा अगर सरकारी कार्यक्रम से जुड़ी है तो विदेश मंत्रालय से मंजूरी अनिवार्य है. जब अप्लीकेशन विदेश मंत्रालय के पास जाता है तो वह कई पॉइंट्स के आधार पर क्लीयरेंस देता है. इनमें
- सबसे पहले देखा जाता है यात्रा का उद्देश्य क्या है
- विदेश में किस संस्था या व्यक्ति ने इन्विटेशन दिया है
- जिस देश की यात्रा पर जाना है उसके साथ भारत के रिश्ते कैसे हैं?
- वह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के पद और घोषित उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं?
- यात्रा और कार्यक्रम का भारत पर राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से क्या प्रभाव पड़ता है
CM रेवंत रेड्डी के केस में विदेश मंत्रालय ने पाया कि उनका दौरा मानकों के अनुरूप नहीं था. इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री रहते हुए विदेश मंत्रालय से कुछ देशों में जाने की परमिशन नहीं मिली थी. इस लिस्ट में बंगाल की पूर्व CM ममता बनर्जी, झारखंड के पूर्व CM अर्जुन मुंडा, असम के पूर्व CM तरुण गोगोई का भी नाम है.
यह भी पढ़ें
यह भी पढ़ें- पुतला जलाया, नारेबाजी… सिख परिवारों का राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन, सज्जन कुमार को ‘हीरो’ कहने पर नाराजगी