जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

अमित शाह के दक्षिण दौरे के बाद बदला CM विजय का रुख! परिसीमन के मुद्दे पर अब रखी ये बड़ी मांग

अमित शाह से मुलाकात के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने परिसीमन पर अपना रुख बदला है. अब उन्होंने केंद्र से मांग की है कि परिसीमन के बाद राज्यों की संसद में मौजूदा हिस्सेदारी कम न हो और इसकी कानूनी गारंटी दी जाए.

अमित शाह के दक्षिण दौरे के बाद बदला CM विजय का रुख! परिसीमन के मुद्दे पर अब रखी ये बड़ी मांग
Image Source: X/ @CMOTamilnadu
Advertisement

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात के बाद परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर दक्षिण भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गया है. 20 अगस्त को तमिलनाडु में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय ने ऐसा रुख सामने रखा, जिसे उनके कुछ दिन पहले के सख्त विरोध से अलग माना जा रहा है. सीएम विजय के नए रूख के राजनीतिक दलों को भी चौंका दिया है. 

दरअसल, 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा ने मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसमें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा बंटवारा बरकरार रखने की मांग की गई थी. विजय का तर्क था कि अगर आबादी के आधार पर परिसीमन किया गया तो जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. लेकिन अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विजय का जोर थोड़ा बदला हुआ नजर आया. नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अब केंद्र से स्पष्ट कानूनी गारंटी देने की मांग की कि परिसीमन के बाद किसी भी राज्य की संसद में प्रतिनिधित्व की मौजूदा प्रतिशत हिस्सेदारी कम नहीं होनी चाहिए. यानी उनका फोकस अब सिर्फ 543 सीटों को स्थिर रखने के बजाय राज्यों की मौजूदा राजनीतिक हिस्सेदारी सुरक्षित रखने पर भी है.

आखिर क्यों महत्वपूर्ण है परिसीमन का मुद्दा?

Advertisement

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा उनके प्रतिनिधित्व फिर से निर्धारित करना है. मौजूदा व्यवस्था में लोकसभा सीटों के आवंटन पर 1971 की जनगणना के आधार पर लंबे समय से रोक रही है. अब इस व्यवस्था में बदलाव की चर्चा के बीच दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि अगर आबादी को मुख्य आधार बनाया गया तो जिन राज्यों ने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है, उनकी संसद में हिस्सेदारी अपेक्षाकृत घट सकती है. विजय ने बैठक में इसी चिंता को सामने रखा. उनका कहना था कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक प्रगति जैसे क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है. इसलिए इन उपलब्धियों की कीमत उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व में कमी के रूप में नहीं चुकानी चाहिए. उन्होंने इसे संघीय संतुलन और राज्यों के बीच समानता से भी जोड़कर देखा.

NEET और कावेरी का मुद्दा भी उठा

परिसीमन के अलावा मुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु के लिए NEET से छूट का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने राज्य को मेडिकल दाखिलों में अपनी व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ने की मांग रखी. उनका जोर MBBS, BDS और AYUSH जैसे पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर रहा. बैठक में अंतरराज्यीय जल विवाद भी चर्चा का हिस्सा रहे. विजय ने कावेरी जल विवाद से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्णयों को समय पर लागू करने की बात कही. मुल्लापेरियार बांध से जुड़े मुद्दे पर भी उन्होंने अदालत के आदेशों और सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों के पालन पर जोर दिया.

वित्तीय बंटवारे पर भी रखी बात

Advertisement

विजय ने केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच वित्तीय सहयोग को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने अगले वित्त आयोग में राज्यों को मिलने वाले संसाधनों के बंटवारे में जरूरत के साथ उनके प्रदर्शन को भी महत्व देने की मांग की. उनका कहना था कि दक्षिणी राज्य कोई विशेष रियायत नहीं चाहते, बल्कि निष्पक्ष व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं.

विजय के बदले रुख पर उठे सवाल

यह भी पढ़ें

वहीं, अब परिसीमन को लेकर विजय की नई मांग पर तमिलनाडु की राजनीति में सवाल उठना स्वाभाविक है. 12 अगस्त के विधानसभा प्रस्ताव में जहां 543 लोकसभा सीटों और मौजूदा राज्यवार बंटवारे को स्थायी रूप से बनाए रखने की बात थी, वहीं अब विजय ने संसद में राज्यों की प्रतिशत हिस्सेदारी कम नहीं होने देने की कानूनी गारंटी पर जोर दिया है. इसी अंतर को लेकर राजनीतिक विरोधी उनकी रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं. हालांकि इसे पूरी तरह यू-टर्न कहना जल्दबाजी होगी. दोनों बयानों के पीछे मूल चिंता दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखना ही दिखाई देती है. फर्क इतना है कि अब विजय की मांग का दायरा सीटों की संख्या से आगे बढ़कर संसद में राज्यों की हिस्सेदारी की कानूनी सुरक्षा तक पहुंच गया है. अब देखना को मुख्यमंत्री के इस बदलाव वाला रूख दक्षिण की राजनीति में कैसा बदलाव लाता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें