ममता के कुनबे में बड़ी सेंध! 100 से ज्यादा TMC नेता कांग्रेस में शामिल, उपचुनाव से पहले दीदी को बड़ा झटका
TMC: मालदा के महीष बाथानी इलाके में टीएमसी से जुड़े 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए...इनमें 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और ब्लॉक उपाध्यक्ष भी शामिल बताए जा रहे हैं.
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को झटका लगा है.मालदा के महीष बाथानी इलाके में टीएमसी से जुड़े 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए...इनमें 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और ब्लॉक उपाध्यक्ष भी शामिल बताए जा रहे हैं. इस मौके पर बलरामपुर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस के जिला और प्रदेश स्तर के नेता भी मौजूद रहे. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण सीटों पर उपचुनाव होने हैं.
कभी कांग्रेस का गढ़ था महीष बाथानी
महीष बाथानी को कभी कांग्रेस का मजबूत इलाका माना जाता था. हालांकि, समय के साथ ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का प्रभाव यहां बढ़ता गया और कांग्रेस कमजोर होती गई. अब टीएमसी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने से इलाके की राजनीति फिर चर्चा में आ गई है. कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में हुए इस दल-बदल को पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है.
TMC छोड़ने की क्या बताई वजह?
टीएमसी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शराफत अली ने पार्टी बदलने की वजह बताते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए कांग्रेस के साथ आना जरूरी है. उनके मुताबिक, क्षेत्रीय दल के तौर पर तृणमूल के लिए भाजपा से मुकाबला करना मुश्किल है. हालांकि, यह नेताओं और कार्यकर्ताओं का व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला है.
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उपचुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर उपचुनाव होना है और 9 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे. नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है, जबकि रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के कारण खाली हुई.. दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं.
नंदीग्राम को लेकर भी टीएमसी और कांग्रेस के बीच चर्चा की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, कांग्रेस ने दोनों सीटों पर अपने स्तर से चुनाव लड़ने की बात कही. वहीं, टीएमसी की ओर से उतारी गई उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नाम वापस लेने के बाद नंदीग्राम में पार्टी की स्थिति और चर्चा में आ गई है.
TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी फैसला बाकी
इस बीच टीएमसी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह को लेकर भी मामला अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के दावों के बीच नाम और चिन्ह को फिलहाल फ्रीज कर रखा है. कोर्ट ने आयोग को मामले पर फैसला लेने के लिए समयसीमा दी है. कोर्ट ने कहा है कि संबंधित पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज और दलीलें पूरी करें, जिसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा.
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने बताया कि ऐसे मामलों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे आने के कारण समय लगता है. इस पर अदालत ने आयोग को जल्द प्रक्रिया पूरी करने को कहा और दस्तावेजों की जांच में AI की मदद लेने का सुझाव भी दिया. फिलहाल नाम, चुनाव चिन्ह और लगातार हो रहे दल-बदल ने बंगाल की सियासत को उपचुनाव से पहले खासा गर्म कर दिया है.
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