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मुस्लिम लीग की आपत्ति और महात्मा गांधी के वो शब्द... वंदे मातरम पर BJP का प्रस्ताव, कांग्रेस को याद दिलाया इतिहास

वंदे मातरम की विरासत की रक्षा के लिए BJP ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव पास किया है. इसके जरिए पार्टी कांग्रेस की घेराबंदी करने की पूरी योजना बना रही है.

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22 Aug 2026
( Updated: 22 Aug 2026
08:18 PM )
मुस्लिम लीग की आपत्ति और महात्मा गांधी के वो शब्द... वंदे मातरम पर BJP का प्रस्ताव, कांग्रेस को याद दिलाया इतिहास
Image Source- X/@NitinNabin
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वंदे मातरम् के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा के संबंध में BJP ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है. इस 10 सूत्रीय प्रस्ताव में मुस्लिम लीग की आपत्तियों से लेकर महात्मा गांधी के बयानों तक का संदर्भ दिया गया है. 

प्रस्ताव की कॉपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लिखा, ’19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति ने 1937 के अपने प्रस्ताव को पुनः स्वीकार करते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ के केवल प्रथम दो पदों के गायन को सीमित करने के निर्णय की कड़ी निंदा और स्पष्ट शब्दों में विरोध करती है.’

नितिन नबीन ने कहा, BJP वंदे मातरम को भारत का राष्ट्रीय गीत, भारत माता के प्रति श्रद्धा की अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र और भारत की राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक मानती है. 

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10 सूत्रीय प्रस्ताव की अहम बातें 

BJP ने प्रस्ताव में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के 19 अगस्त 2026 के फैसले की कड़ी निंदा की.

CWC की मीटिंग में कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव को फिर से दोहराया और अपने कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' को केवल शुरुआती दो छंदों तक सीमित कर दिया था. 

प्रस्ताव में BJP ने कहा कि भारत के राष्ट्र-गीत के रूप में और भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता संग्राम के अमर प्रतीक के तौर पर, पूरे 'वंदे मातरम' के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय दर्जे को बनाए रखना है. 

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सांप्रदायिक सोच के हावी होने का दावा 

प्रस्ताव में BJP ने दावा किया कि संविधान सभा की 1950 की घोषणा से स्थापित 'वंदे मातरम' के संवैधानिक और कानूनी दर्जे की पुष्टि करना और संसद के 2026 के संशोधन के जरिए इसे और मजबूत करना, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रीय गान के बराबर कानूनी सुरक्षा दी गई है. राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या वोट-बैंक की संकीर्ण सोच के अधीन करने की हर कोशिश को खारिज करना है. 

नितिन नबीन के मुताबिक, BJP कांग्रेस को यह याद दिलाना चाहती है कि उसकी वर्किंग कमेटी का कोई प्रस्ताव भारत गणराज्य की संवैधानिक संस्थाओं या कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता. 1937 के किसी राजनीतिक समझौते को 1950 के संवैधानिक समझौते और 2026 में संसद के बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं रखा जा सकता है. 

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मुस्लिम लीग का जिक्र 

BJP ने प्रस्ताव में कहा कि भारत की जनता के सामने उस ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को उजागर करना जरूरी है जिसमें 'वंदे मातरम' को छोटा किया गया था. इसमें मुस्लिम लीग की आपत्तियां और उसके बाद सांप्रदायिक और अलगाववादी मांगों की राजनीति भी शामिल है. 

महात्मा गांधी के बयान का संदर्भ

भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को महात्मा गांधी के उस बयान की याद दिलाई. जिसमें 'वंदे मातरम' साम्राज्यवाद-विरोधी नारा बन गया था और वे इसे 'सबसे शुद्ध राष्ट्रीय भावना' से जोड़ते थे. BJP ने कहा, इससे यह पता चलता है कि इसके कुछ छंदों के साहित्यिक या धार्मिक संदर्भ से कहीं ज्यादा इसका व्यापक राष्ट्रीय अर्थ था. 

राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी BJP 

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पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने बताया कि इस प्रस्ताव में BJP कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाना शामिल है, ताकि 'वंदे मातरम' का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और गौरवशाली विरासत भारत के हर कोने तक पहुंचाई जा सके.

इसका मकसद लोगों, खासकर युवा पीढ़ी को शिक्षित और जागरूक करना, ताकि छह छंदों वाले पूरे राष्ट्र-गीत और उसके इतिहास को भुलाया न जाए और आने वाली पीढ़ियां उन बलिदानों, संघर्षों और देशभक्ति की भावना को समझ सकें जिनसे 'वंदे मातरम' अटूट रूप से जुड़ा हुआ है. 

इसके साथ ही प्रस्ताव में यह संदेश भी दिया गया कि राजनीतिक सुविधा या तुष्टीकरण के लिए 'वंदे मातरम' के सम्मान और विरासत से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता. 

सांप्रदायिक दवाब के आगे झुकने का आरोप

BJP अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने कभी वन्दे मातरम् के राष्ट्रीय महत्व को स्वीकार किया था, लेकिन बाद में बढ़ते सांप्रदायिक दबाव के आगे झुकती चली गई. 1923 के काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन में जब पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर ने वन्दे मातरम् गाना प्रारंभ किया, तब कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने आपत्ति जताई और अधिवेशन से बाहर चले गए.

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उन्होंने कहा, यह केवल किसी राजनीतिक दल से जुड़ा विषय नहीं है. यह भारत के सम्मान और उन असंख्य देशभक्तों की विरासत का प्रश्न है, जिन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. 

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