जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

बिहार में छात्रों पर क्यों चलाई गई थी AK-47? सम्राट सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

NEET पेपर लीक के खिलाफ बिहार के सीवान में प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से कथित कार्रवाई के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखा.

Author
18 Aug 2026
( Updated: 18 Aug 2026
11:25 AM )
बिहार में छात्रों पर क्यों चलाई गई थी AK-47? सम्राट सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब
Image Source- IANS
Advertisement

NEET पेपर लीक के खिलाफ बिहार के छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. याचिकाकर्ता ने छात्रों पर पुलिस के जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और AK-47 चलाने का आरोप लगाया. शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने पुलिस की कथित बर्बरता के आरोपों से इंकार कर दिया. 

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. हलफनामे में बिहार सरकार ने कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए थे. इस दौरान सीवान में पुलिसकर्मी के AK-47 चलाने का मामला भी उठाया गया. 

सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का जवाब 

प्रदर्शन से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की गई. जिसमें सीवान में पुलिसकर्मी की AK-47 से फायरिंग के मामले में राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा. सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा, भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने हवा में चार गोलियां चलाई थीं. 

बिहार सरकार के मुताबिक, AK-47 से चली गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं लगी. सरकार ने यह भी कहा कि हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं किया जाना चाहिए. AK-47 को ‘प्लाटून स्तर का हथियार’ बताते हुए कहा गया है कि इसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए होता है. राज्य के डीजीपी ने एके-47 के इस्तेमाल को लेकर निर्देश भी जारी किए हैं. हालांकि, जिस कांस्टेबल ने फायरिंग की थी, उसे निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. 

Advertisement

भीड़ को काबू करने के लिए चलाई गई थी गोली

सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास एक ASI ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए. इस दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आईं. हालांकि, सरकार का कहना है कि इन तीनों को एके-47 से गोली नहीं लगी थी और वे उस स्थान पर भी मौजूद नहीं थे, जहां एके-47 से फायरिंग हुई थी. घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिससे हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के एंगल जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं. 

कितनी FIR, कितनी गिरफ्तारियां?

हलफनामे के मुताबिक, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया. 

सरकार ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है. पुलिस का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है. अपने जवाब में सरकार ने यह भी कहा है कि प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान, जहानाबाद, पटना, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई स्थानों पर स्थिति हिंसक हुई. 

Advertisement

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कैसे पथराव तक पहुंचा?

छपरा में 25 जुलाई को दोपहर तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहने के बाद भीड़ में असामाजिक तत्वों के शामिल होने और तोड़फोड़ तथा पथराव शुरू करने का आरोप लगाया गया है. सरकार के अनुसार, इस दौरान 2 बीडीओ, 3 पुलिस इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए. एक बीडीओ की आंख चली गई, जबकि दूसरे बीडीओ के सिर पर भारी वस्तु से गंभीर चोट लगी और उनकी हालत गंभीर बताई गई है. 

राज्य सरकार ने दावा किया है कि पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और सात सरकारी कर्मचारी घायल हुए हैं, साथ ही, पुलिस की ओर से आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल की बात भी सरकार ने स्वीकार की है. सरकार ने माना है कि आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल के दौरान प्रदर्शनकारियों को कई चोटें आईं. 

यह भी पढ़ें- झारखंड के छात्रों का आंदोलन सफल, JPSC-CGL परीक्षा रद्द, 2014 से अब तक की भर्ती की भी जांच, जानें बड़ी बातें

Advertisement

सरकार ने हिंसा के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और आरवाईए की ओर से दिए गए प्रदर्शन के आह्वान का भी उल्लेख किया है. वहीं, 24 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के आह्वान का बिहार में कोई खास असर नहीं होने का दावा किया गया है.

प्रदर्शन का डेटा सुरक्षित रखने को कहा गया

यह भी पढ़ें

राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त डीजीपी को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें