केरल में वामपंथी पार्टियों में दो फाड़, एक पद के लिए भिड़े CPIM और CPI, खूब वार-पलटवार
केरल में लेफ्ट पार्टियों के बीच लड़ाई सतह पर आ गई है. सत्ता में रहते हुए LDF में उस तरह के विवाद नहीं सामने आए जो अब विपक्ष में आते ही उभरने लगे हैं. इसी बीच CPIM ने CPI पर गठबंधन की राजनीति के नियमों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है.
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सीपीआई (एम) और एलडीएफ में उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी दल सीपीआई के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं. मंगलवार को सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता वी. शिवनकुट्टी ने सीपीआई के असिस्टेंट सेक्रेटरी सत्यम मोकेरी की उस तीखी आलोचना का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने विपक्ष के उप नेता के मुद्दे पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की आलोचना की थी.
केरल में लेफ्ट पार्टियों के बीच उभरी दरार!
शिवनकुट्टी ने सीपीआई पर राजनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि गठबंधन की राजनीति के नियमों के खिलाफ पिनाराई नहीं बल्कि सीपीआई ने काम किया है.
उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण भी बताया कि मंगलवार को सीपीआई के मुखपत्र 'जनयुगम' में मोकेरी की आलोचना छपी थी. उन्होंने कहा कि सीपीआई ऐसी पार्टी की तरह व्यवहार कर रही है जो एलडीएफ को मजबूत नहीं करना चाहती.
विपक्ष के उप नेता के तौर पर सीपीआई (एम) नेता को नामित करने के पिनाराई के फैसले का बचाव करते हुए शिवनकुट्टी ने कहा कि विपक्ष के नेता का कदम लोकतांत्रिक था. यह पद पारंपरिक रूप से सीपीआई (एम) के पास ही रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि इसलिए मौजूदा व्यवस्था को बदलने का कोई कारण नहीं था.
शिवनकुट्टी की यह प्रतिक्रिया मोकेरी द्वारा पिनाराई पर तीखे हमले के बाद आई. मोकेरी ने उन पर गठबंधन के नियमों और गठबंधन में अपेक्षित राजनीतिक नैतिकता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था.
मोकेरी ने तर्क दिया कि उप-नेता का पद एक राजनीतिक मुद्दा है जिस पर विपक्ष के नेता अकेले फैसला नहीं ले सकते, खासकर तब जब सीपीआई और सीपीआई (एम) के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व स्तर पर बातचीत चल रही हो.
मोकेरी ने पिनाराई के उस सार्वजनिक दावे पर सवाल उठाया कि वे अकेले ही स्पीकर को उप-नेता का नाम भेजेंगे. उन्होंने पूछा कि जब दोनों पार्टियों के बीच बातचीत में यह मुद्दा उठा ही नहीं था, तो ऐसी एकतरफा घोषणा क्यों की गई.
सीपीआई नेता ने यह भी याद दिलाया कि एलडीएफ संयोजक टीपी रामकृष्णन ने एमएन स्मारक में सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम से मुलाकात की थी और इस बात पर सहमति बनी थी कि उप-नेता को लेकर विवाद गठबंधन के कामकाज में बाधा नहीं बनना चाहिए.
CPIM ने सीपीआई पर लगाया गठबंधन के खिलाफ काम करने का आरोप!
इसके बाद पिनाराई की अध्यक्षता में हुई एलडीएफ की बैठक में जल्द होने वाले स्थानीय निकाय उपचुनावों की संयुक्त तैयारियों और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर सहमति बनी.
मोकेरी ने कम्युनिस्ट नेता जॉर्जी दिमित्रोव के संयुक्त मोर्चा राजनीति के सिद्धांत का हवाला देते हुए तर्क दिया कि गठबंधन एकतरफा फैसलों के बजाय समानता, आपसी सम्मान, विचार-विमर्श और आम सहमति पर आधारित होने चाहिए.
सत्ता से बाहर जाते ही लेफ्ट पार्टियां दो फाड़!
उन्होंने चेतावनी दी कि वामपंथी राजनीति पर किसी एक नेता की पसंद थोपने की कोशिशें एलडीएफ को कमजोर कर सकती हैं. भाजपा और संघ परिवार को फायदा पहुंचा सकती हैं. यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि इससे एलडीएफ की अगुवाई करने वाली सीपीआई (एम) और उसके दूसरे सबसे बड़े सहयोगी दल सीपीआई के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्षी गठबंधन चुनावी हार के बाद फिर से एकजुट होने की कोशिश कर रहा है.
तिरुवनंतपुरम जिले में सीपीआई (एम) के प्रमुख नेताओं में से एक और पिनाराई के पूर्व कैबिनेट सहयोगी शिवनकुट्टी खुद नेमोम के पूर्व विधायक हैं. हालिया विधानसभा चुनाव में उन्हें इस सीट पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार का सामना करना पड़ा था.
केरल में उप नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर विवाद
केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के भीतर उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एलडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने सोमवार को इस मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर दिया.
अब सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने साफ कहा कि एलडीएफ के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सहयोगी दलों की मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकते और उन्हें उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना होगा.
डी राजा का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल सीपीआई (एम) और सीपीआई के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय बन चुका है.
सीपीआई ने पिनाराई विजयन से डिप्टी स्पीकर पद देने पर विचार करने की मांग की
सीपीआई नेतृत्व अब विजयन के सार्वजनिक रुख को एलडीएफ नेतृत्व के सामने उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि यह मुद्दा अब तक दोनों दलों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा था. यह घटनाक्रम वाम गठबंधन की दो प्रमुख पार्टियों के बीच मतभेदों के अब खुलकर सामने आने का संकेत माना जा रहा है.
सीपीआई अपने राज्य सचिव बिनॉय विश्वम को उप नेता प्रतिपक्ष का पद देने की मांग कर रही है. बिनॉय विश्वम ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह मांग उठाई है.
हालांकि, पिनाराई विजयन ने इस मांग को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. विवाद उस समय फिर तेज हो गया जब विजयन ने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी दी कि सीपीआई ने इस पद को लेकर एक पत्र भेजा है.
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डी राजा के कारण केरल में सीपीआई के बढ़े हौसले
इसके जवाब में बिनॉय विश्वम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी मांग पूरी तरह उचित है और पूर्व मुख्यमंत्री को इस मामले में अधिक परिपक्वता दिखानी चाहिए. अब डी राजा के हस्तक्षेप से सीपीआई के रुख को राष्ट्रीय स्तर का समर्थन मिल गया है.
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सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी इस गतिरोध और इस मुद्दे को संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं.
सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ उप नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है. कई लोग मानते हैं कि विपक्षी गतिविधियों में समन्वय की कमी का एक कारण यह विवाद बढ़ रहा है.
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सीपीआई का राज्य नेतृत्व अब एलडीएफ अध्यक्ष के रूप में पिनाराई विजयन के खिलाफ और कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है. साथ ही, गतिरोध खत्म करने के लिए वाम दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप की भी उम्मीद कर रहा है.