अरुणाचल पर तनाव के बीच चीन जा रहे NSA डोभाल, सीमा विवाद और जिनपिंग के BRICS समिट के लिए भारत दौरे पर बनेगी बात
NSA अजित डोभाल चीन के दौरे पर सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे. वे सीमा विवाद पर चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत करेंगे. वहीं इस दौरान जिनपिंग के ब्रिक्स के लिए दिल्ली दौरे पर भी बात हो सकती है.
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अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों को लेकर चीन के साथ पैदा हुए सीमा विवाद के बीच इस वक्त की बड़ी ख़बर सामने आ रही है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का चीन के दौरे पर जा रहे हैं. वो 24 अगस्त सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे. ख़बर के मुताबिक़ वो सीमा विवाद पर भारत-चीन स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव मैकेनिज़्म के तहत चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत करेंगे. वहीं बातचीत का 25वां दौर मंगलवार को होना है. यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पक्षों ने व्यापक रिश्तों के लिए सीमा पर शांति बनाए रखने के महत्व पर फिर से ज़ोर दिया है.
अचानक चीन के दौरे पर क्यों पहुंच रहे NSA अजित डोभाल?
भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से पहले डोभाल का ये दौरा काफी अहम है. उम्मीद जताई जा रही है कि उम्मीद है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस समिट में शामिल होंगे. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. कहा जा रहा है कि डोभाल के इस दौरे में जिनपिंग के दिल्ली दौरे को लेकर कुछ बात आगे बढ़ सकती है. दोनों देशों के आला अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि शी के भारत दौरे में उनकी प्रधानमंत्री मोदी से साइडलाइंस पर बातचीत भी हो सकती है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करने का मौका मिलेगा.
आपको बता दें कि अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीनी सेना की बढ़ती गतिविधियों की खबरों पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति "फिलहाल आम तौर पर स्थिर है". उन्होंने कहा कि चीन और भारत ने 'चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र' की 36वीं बैठक की थी. उन्होंने कहा, "दोनों पक्ष राजनयिक और सैन्य चैनलों के ज़रिए बातचीत जारी रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए."
क्या शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए भारत आएंगे?
वहीं भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को "बेहद गंभीर" मानता है और 'लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना "सबसे ज़रूरी" है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी. इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले की बीजिंग द्वारा की गई आलोचना को भी खारिज कर दिया था. भारत ने कहा कि यह राज्य भारत का "अटूट और अभिन्न" हिस्सा है और कोई भी चीज़ इस "अविवादित सच्चाई" को बदल नहीं सकती.
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की हठधर्मी और एग्रेसर नीति लगातार सामने आती रही है. चीन का अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवादास्पद इतिहास रहा है. बीजिंग अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, 2017 से इस इलाके की जगहों के लिए अपने नाम जारी कर रहा है.
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चीन, जो अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, 2017 से इस इलाके की जगहों के लिए अपने नाम जारी कर रहा है. वहीं भारत ने चीन के इस कदम को बेकार और बेतुका करार दिया है और कहा है कि ऐसी हरकतें उस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकतीं कि यह राज्य हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है, है और रहेगा. ऐसे में NSA डोभाल की बीजिंग यात्रा और चीनी अधिकारियों के बीच बातचीत पर सबकी नज़र रहेगी, क्योंकि दोनों पक्ष उच्च-स्तरीय बातचीत के अगले चरण की तैयारी कर रहे हैं.