हाफिज सईद को लाया जाएगा भारत, सरकार ने कस ली कमर, पाकिस्तान भेजा जा रहा समन, प्रक्रिया तेज!
केंद्र की मोदी सरकार ने नए कानूनों के प्रभाव में आने के बाद पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है. इस लिहाज से भारतीय उच्चायोग के जरिए लश्कर सरगना को नोटिस भेजकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
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भारत पहलगाम आतंकी हमले सहित अन्य आतंकी हमलों के गुनहगारों को कठघरे में लाने और भारत लाने की तैयारी कर रहा है. इसी कड़ी में भारत राजनयिक चैनलों के जरिए पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी हाफिज सईद को समन भेजने की तैयारी कर रहा है.
बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों को गोलियां मारी गई थीं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिसंबर 2025 में पहली चार्जशीट दायर की थी. इसमें लश्कर के सरगना और पाकिस्तानी आतंकियों के प्रॉक्सी TRF के प्रमुख हाफिज सईद को गुनहगार ठहराया गया था. ऐसे में भारत नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता सहित अन्य दूसरे कानूनों के प्रभाव में आने के बाद पाकिस्तानी आतंकियों को भी कानून के दायरे में लाने के लिए कमर कस ली है.
भारत लाया जाएगा हाफिज सईद
यानी कि अब विदेशी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई और एक्शन का तरीका भारत ने बदल लिया है. इससे ना सिर्फ आतंक को प्रश्रय देने वाले पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा बल्कि उसके खिलाफ एक ऐसा डोजियर तैयार होगा, जिसका इस्तेमाल FATF जैसी दूसरी एजेंसियों के दायरे में पाकिस्तान को लाने में आसानी होगी.
इस लिहाज से देखें तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 का यह पहला टेस्ट है. पहली बार है जब भारतीय कोर्ट को विदेश में बैठे आतंकी के खिलाफ भी सजा सुनाने का मौका मिल रहा है. भारत कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए एक पुख्ता कानूनी रिकॉर्ड तैयार कर रहा है.
इससे क्या होगा?
अदालत का शिकंजा: यदि कोर्ट के समन पर आरोपी कोई जवाब नहीं देता, तो उसे कानूनी रूप से अपराधी मान लिया जाएगा. अदालत के साथ सहयोग न करने का उसका यह रवैया एक आधिकारिक डोजियर (दस्तावेज) के रूप में दर्ज होगा, जिससे आगे की सीधी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुख्ता सबूत: भेजे गए हर समन और गैर-जमानती वॉरंट का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और इसे इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को सौंपा जाएगा. इसका मकसद यह साबित करना है कि भारत ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया है, ताकि भविष्य में सजा सुनाए जाने पर कोई भी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था भारत पर सवाल न उठा सके.
वहीं इस पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान किसी आतंकी को भारत को सौंप देगा, यह सोचना बिल्कुल बेमानी है. उनका तर्क है कि 26/11 मुंबई हमले में अपने नागरिकों का हाथ होने की बात खुद कबूलने के बाद भी जब पाकिस्तान ने कोई कदम नहीं उठाया, तो अब उससे किसी कार्रवाई की उम्मीद करना सिर्फ एक कल्पना है.
उन्होंने आगे कहा कि, "असल बात यह है कि पहलगाम आतंकी हमला हुआ था, जिसमें लोगों की पहचान धर्म के आधार पर की गई और उनके परिवारों के सामने उनकी हत्या कर दी गई. इसके बाद 7 से 10 मई तक भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया था. इसका मुख्य मकसद वहां मौजूद आतंकवाद के नेटवर्क और आतंकी संगठनों को खत्म करना था." उन्होंने कहा कि आतंकी हमलों का जवाब यही है कि 'ईंट का जवाब पत्थरों से दिया जाए.' बाकी कानूनी प्रक्रिया चलती रहेगी.
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मनीष तिवारी ने आगे कहा, " पाकिस्तान के यह मानने के बाद कि 26/11 के आतंकी हमले में उसके लोग शामिल थे, पाकिस्तान में जो कार्रवाई शुरू हुई थी, वह किसी नतीजे तक नहीं पहुंची. इसलिए, यह उम्मीद करना कि पाकिस्तान किसी आतंकवादी को भारत भेजेगा, या उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा, महज एक काल्पनिक बात है. बुनियादी बात है कि आतंकवाद से निपटने का एक ही तरीका है. जितने भी शक्तिशाली मुल्क हैं, वही रास्ता अख्तियार करते हैं."