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‘खैरात में नहीं मिला आरक्षण…’, रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन पर भड़के केंद्रीय मंत्री, मायावती ने भी साधा निशाना

विपक्ष समेत NDA के साथी नेताओं ने आरक्षण हटाओ आंदोलन का विरोध किया है. इसमें BSP सुप्रीमो मायावती और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी शामिल हैं.

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23 Aug 2026
( Updated: 23 Aug 2026
03:49 PM )
‘खैरात में नहीं मिला आरक्षण…’, रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन पर भड़के केंद्रीय मंत्री, मायावती ने भी साधा निशाना
Image Source- IANS
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प्रदर्शन का केंद्र दिल्ली का जंतर मंतर अब एक और आंदोलन का गवाह बन रहा है. पहले NEET पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम की खामियों के खिलाफ आवाज मुखर हुई तो अब जाति आधारित आरक्षण पर विरोध तेज हो रहा है. रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन को लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है. 

एक तरफ UP के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शनकारी हर्ष दुबे से लखनऊ में मुलाकात की है तो दूसरी ओर विपक्ष समेत NDA के साथी नेताओं ने इस आंदोलन का विरोध किया है. इसमें BSP सुप्रीमो मायावती और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी शामिल हैं. 

मायावती ने RHA पर क्या कहा? 

मायावती ने एक्स पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन पर कहा, 'जंतर मंतर पर संविधान में SC, ST और OBC समाज को मिले आरक्षण के खिलाफ अभी हाल ही में जमा हुए कुछ लोगों की ओर से आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई मांग कतई उचित और देशहित में नहीं है. उन्हें आरक्षण के संबंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुंचे.' 

EWS की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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मायावती ने आर्थिक आधार पर दिए जा रहे EWS (Economically Weaker Section) पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, जहां तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है तो केंद्र और राज्य सरकारों ने भी गरीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर साल खर्च किया, लेकिन उसमें भ्रष्टाचार के चलते इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है. मायावती ने कहा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है. इसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के गरीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा ज्यादा है.

चिराग पासवान ने क्या कहा? 

केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस आंदोलन का विरोध किया. उन्होंने कहा, चर्चा का कोई सवाल ही नहीं उठता. 

'किसी के कहने से आरक्षण खत्म होने वाली चीज नहीं है. यह कोई खैरात भी नहीं है बल्कि संवैधानिक अधिकार है. इसके तहत यह सोच रही है कि ऐसे लोगों को मुख्यधारा में जोड़ा जाए, जिनके साथ किसी न किसी कारण से अत्याचार हुआ है. ऐसे लोगों को अनुसूचित जाति में रखा गया है और उन्हें आरक्षण दिया जा रहा है. ऐसे लोगों का रहन-सहन और वेशभूषा अलग है. उन्हें मुख्य धारा में लाने की भावना से आरक्षण मिला था. बाबासाहेब आंबेडकर ने यह आरक्षण दिया था और इसे सशक्त भी किया गया था. आज की तारीख में तो उच्च जाति से आने वाले गरीबों को भी आरक्षण का लाभ मिलता है. ऐसे में इतने विस्तृत दायरे वाले आरक्षण को कोई यूं ही खत्म कराना चाहे तो यह संभव नहीं है.'

चिराग पासवान और मायावती ने आरक्षण हटाओ आंदोलन के कॉन्सेप्ट को ही अमान्य करार दिया है और इसे संविधान के खिलाफ बताया. 

जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन में क्या हैं मांगें? 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सिस्टम में बदलाव करने और UCC के नियमों के विरोध में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण में सुधार की मांग बहुत पहले उठनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसलिए अब हमें आगे आना पड़ रहा है. आरक्षण सिर्फ जरूरतमंद लोगों को ही मिलना चाहिए. गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए, क्योंकि गरीबी जाति देखकर नहीं आती. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा, आर्थिक स्थिति और गरीबी के आधार पर आरक्षण मिले, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति हो.

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