भारत से रिश्ते सुधारने को बेताब बांग्लादेश... तारिक रहमान सरकार दिल्ली भेज रही विशेष टीम, जानें क्यों बदला रुख
बंगलादेश के तारिक रहमान सरकार की अकड़ अब ढीली पड़ती हुई दिखाई दे रही है. बंगलादेशी सरकार अब भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तें को सामान्य करने की कोशिश में जुट गया है. यही वजह है कि रिश्तों में सुधार की कोशिशें तेज, व्यापार और वीजा मुद्दों पर बातचीत के लिए 8-9 अक्टूबर को नई दिल्ली आएगा ढाका का प्रतिनिधिमंडल.
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जब दुनिया के तमाम बड़े देश भारत को वैश्विक मामलों में तवज्जो दे रहे हैं, तो उस बीच पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश लगातार अकड़ दिखा रहा था. लेकिन अब इसी बांग्लादेश के तारिक रहमान की सरकार की अकड़ ढीली पड़ती हुई दिखाई दे रही है. भारत के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए ढाका की ओर से कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं. इसी कड़ी में बांग्लादेश अब भारत के साथ व्यापार और वीजा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के जरिए संबंध सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, ढाका भारत के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने के प्रयासों के तहत व्यापार और कॉन्सुलर मामलों समेत कई क्षेत्रों में संस्थागत तंत्र की बैठकें आयोजित करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई दिल्ली यात्रा को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपना नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश का एक प्रतिनिधिमंडल 8 और 9 अक्टूबर को व्यापार से जुड़े संयुक्त कार्य समूह की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेगा. सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कॉन्सुलर मामलों को लेकर होने वाली संयुक्त कार्य समूह की बैठक की तारीख तय करने पर भी बातचीत चल रही है. इस बैठक की मेज़बानी ढाका करेगा.
रिश्तें सामान्य करने की होगी कोशिश
इन बैठकों के जरिए फिलहाल भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में सामान्य स्थिति लौटाने की कोशिश की जा रही है. इसके साथ ही दोनों देश उन अहम और संवेदनशील मुद्दों पर भी समाधान तलाशने में जुटे हैं, जिनका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ा है. अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम प्रशासन के गठन के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में लगातार तनाव देखने को मिला. इसके चलते भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंध लंबे समय के सबसे निचले दौर में पहुंच गए थे.
भारत के निमंत्रण को बंगलादेश ने नहीं स्वीकारा था
जानकारी देते चलें कि फरवरी में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को मिली बड़ी जीत के बाद भारत ने दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में पहल तेज कर दी थी. इसी क्रम में भारत की ओर से तारिक रहमान को दो अलग-अलग निमंत्रण दिए गए. इनमें एक भारत की द्विपक्षीय यात्रा का था, जबकि दूसरा बिम्सटेक (Bimstec) समूह के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने से जुड़ा था. हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने पिछले महीने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया. वहीं, रहमान की भारत यात्रा को लेकर भी दोनों देशों के बीच तारीख तय करने पर सहमति नहीं बन सकी. ढाका की इच्छा है कि व्यापार पर संयुक्त कार्य समूह की बैठक के बाद दोनों देशों के वाणिज्य सचिवों के बीच भी बैठक हो. हालांकि, भारतीय पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि यह बैठक तभी आगे बढ़ सकती है, जब ट्रांजिट और सीमा व्यापार समेत दूसरे अहम मुद्दों से जुड़े संस्थागत तंत्र की बैठकें पहले पूरी कर ली जाएं.
तारिक रहमान का तय नहीं हो पा रहा कार्यक्रम
कॉन्सुलर मामलों को लेकर होने वाली संयुक्त कार्य समूह की बैठक का महत्व इसलिए बढ़ गया है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश दोनों ही वीजा से संबंधित लंबित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं. वहीं, रहमान की भारत यात्रा की तारीख तय होने में भारत का व्यस्त राजनयिक कार्यक्रम भी एक बड़ी वजह बन रहा है. अक्टूबर के दौरान भारत स्विस राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के दौरे और उनसे जुड़ी बैठकों में व्यस्त रहेगा. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 से 18 नवंबर तक आसियान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फिलीपींस की यात्रा करेंगे.
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बताते चलें कि दिसंबर में भी प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने की संभावना है. इस दौरान उनके अमेरिका, कनाडा और बेल्जियम की यात्रा पर जाने की उम्मीद है. दूसरी ओर, सूत्रों का कहना है कि तारिक रहमान अक्टूबर में जापान और इसके बाद नवंबर में तुर्की तथा सऊदी अरब की यात्रा कर सकते हैं.