SC/ST आरक्षण पर NDA के भीतर ही मतभेद! चिराग पासवान ने जीतनराम मांझी और बेटे से क्यों कहा- इस्तीफा दो
आरक्षण पर NDA में ही असमहति नजर आई. जब बिहार के मंत्री संतोष मांझी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान में वार-पलटवार होने लगा. चिराग पासवान ने तो संतोष मांझी से इस्तीफा तक मांग लिया.
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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण को लेकर NDA के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. शनिवार को बिहार में स्थिति उस समय देखने लायक हो गई, जब केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे राज्य मंत्री संतोष सुमन की आरक्षण में प्रणाली में बदलाव वाली मांग पर सवाल उठाते हुए कड़ा विरोध जताया.
बात यहां तक पहुंच गई कि चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और उनके बेटे से इस्तीफा मांग लिया. चिराग ने SC/ST आरक्षण में 'क्रीमी लेयर' प्रावधान लागू करने की मांग का विरोध किया.
उन्होंने हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (HAM) के अध्यक्ष जीतम राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा, ऐसे कदम की वकालत करने वालों को पहले अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.
चिराग पासवान ने क्या कहा?
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण नीति आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, बहिष्कार और अस्पृश्यता को दूर करने के लिए बनाई गई है.
उन्होंने कहा कि ढांचे में किसी भी तरह के बदलाव का प्रस्ताव अत्यंत संवेदनशील है और इसे संसद में बहस के लिए पेश किया जाना चाहिए, न कि इसे राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित कर दिया जाना चाहिए.
जीतनराम मांझी ने क्या कहा था?
मांझी और संतोष सुमन SC/STआरक्षण में उप-वर्गीकरण और 'कोटा के भीतर कोटा' की मांग कर रहे हैं. उनका तर्क है कि इसका लाभ सभी समुदायों को समान रूप से नहीं मिला है. संतोष सुमन ने कहा कि उनकी मांग का उद्देश्य आरक्षण को समाप्त करना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वंचित समूहों को उनका हिस्सा मिले.
जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की मांग की थी. संतोष बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री भी हैं. उन्होंने कहा कि वह एससी-एसटी आरक्षण में सब-कैटगराइजेशन लागू करने के पक्ष में हैं.
संतोष सुमन ने कहा कि बिहार में SC वर्ग में कई ऐसी जातियां हैं जो आज भी अत्यधिक पिछड़ी हुई हैं, उन्होंने दावा किया कि दलित आरक्षण का लाभ पासवान और रविदास जैसी कुछ एक जातियों तक सीमित है, जबकि अन्य जातियां अब भी बहुत पीछे हैं. मुसहर समाज से एक भी IAS नहीं बन पाया है.
आरक्षण पर NDA में ही असहमति!
चिराग ने इसके जवाब में कहा कि आरक्षण को आर्थिक स्थिति के नजरिए से देखने से इसका मूल उद्देश्य कमजोर हो सकता है. उन्होंने किसी भी बदलाव से पहले व्यापक संवैधानिक और संसदीय बहस की मांग की.
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यह असहमति बिहार की दलित राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि चिराग और मांझी-सुमन खेमा दोनों ही खुद को हाशिए पर पड़े समुदायों के हिमायती के रूप में पेश करना चाहते हैं, लेकिन आरक्षण प्रणाली के भविष्य पर उनके विचार बिल्कुल अलग हैं. इन घटनाक्रमों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या NDA के घटक दल इस संवेदनशील मुद्दे पर एकमत हो पाएंगे या बिहार की राजनीति में मतभेद और गहरे हो जाएंगे. ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश में जाति आधारित आरक्षण हटाने की मांग तेज हो रही है. कुछ संगठन इसको लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन भी कर रहे हैं.