WhatsApp हैकिंग को लेकर सरकार का बड़ा अलर्ट, 10,000 से ज्यादा भारतीयों को साइबर हमले से बचाया गया
WhatsApp: गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कहा कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित कई कदम उठाए गए, जिससे इस साइबर हमले के प्रभाव को रोका जा सका.
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WhatsApp: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की समन्वित कार्रवाई के जरिए व्हाट्सऐप अकाउंट हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कहा कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (C2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित कई कदम उठाए गए, जिससे इस साइबर हमले के प्रभाव को रोका जा सका.
WhatsApp अकाउंट टेकओवर की शिकायतों में बढ़ोतरी
गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर हाल के दिनों में व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर से जुड़ी शिकायतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है. ये हमले ऐसे मैलवेयर के जरिए किए जा रहे हैं, जिन्हें अकाउंट स्टेटमेंट या किसी सरकारी नियामक संस्था के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में छिपाकर भेजा जाता है.
मंत्रालय ने कहा, "इन समन्वित प्रयासों के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस साइबर अभियान से सुरक्षित किया गया है; सहयोग पोर्टल के जरिए मैलवेयर से जुड़े सर्वरों को लगातार ब्लॉक किया जा रहा है."
कई राज्यों में सामने आए मामले
गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान समेत कई राज्यों में सामने आई हैं. I4C ने इससे पहले 22 जून को भी एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसे साइबर हमलों के प्रति सतर्क किया था, जिनमें सरकारी या नियामक अधिकारियों का रूप धारण कर व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश की जाती है.
ऐसे भेजी जा रही हैं फर्जी ZIP फाइलें
मंत्रालय ने बताया कि साइबर अपराधी आमतौर पर व्हाट्सऐप, एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से "Statement of Account.zip", "RBI.zip" या "MCA.zip" जैसे नामों वाली संपीड़ित (.ZIP) फाइलें भेजते हैं. कई मामलों में फाइलों के नाम के आगे तारीख भी लिखी होती है, ताकि वे अधिक विश्वसनीय दिखाई दें.
ये संदेश इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे किसी बैंक खाते के विवरण, वित्तीय दस्तावेज या किसी नियामक संस्था की तत्काल सूचना जैसे प्रतीत हों.इससे लोग बिना सोचे-समझे फाइल खोल लेते हैं.
फाइल खोलते ही सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है मैलवेयर
मंत्रालय ने बताया, "जब कोई व्यक्ति अपने विंडोज डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इन ZIP फाइलों को एक्सट्रैक्ट कर खोलता है, तो उसके सिस्टम में एक ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो डिवाइस को हैक कर लेता है और पीड़ित के सक्रिय WhatsApp Web सेशन को हाईजैक कर लेता है."
मंत्रालय ने यह भी बताया कि कई मामलों में साइबर अपराधी आयकर विभाग के नाम से फर्जी ई-मेल भी भेज रहे हैं, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके.
हैक होने के बाद ऐसे फैलता है संक्रमण
एक बार WhatsApp अकाउंट हैक होने के बाद अपराधी उस अकाउंट का इस्तेमाल पीड़ित के सभी संपर्कों और ग्रुप्स में वही संक्रमित फाइल भेजने के लिए करते हैं. अक्सर संदेश में लिखा होता है कि फाइल को "कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजें" और कंप्यूटर पर खोलें.
सरकार के अनुसार, इस तरीके से संक्रमण की शृंखला तेजी से आगे बढ़ती है और कई बार कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुंचकर बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है.
सरकार ने लोगों से की यह अपील
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या संदिग्ध ZIP फाइल को डाउनलोड या ओपन न करें. यदि कोई संदेश बैंक, RBI, MCA, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी संस्था के नाम से प्राप्त होता है, तो उसकी सत्यता की जांच आधिकारिक माध्यमों से अवश्य करें.
साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें..
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Input - IANS