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ब्रिटेन में हिंदुओं को बड़ा झटका! मंदिर बनाने पर रोक, चर्च और मुस्लिम समूह को मिली मंजूरी

Church and Muslim Group Granted Approval: ब्रिटेन में रहने वाले करीब 150 हिंदू परिवार कई सालों से अपने पहले मंदिर का सपना देख रहे थे. इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जमीन भी मांगी थी, लेकिन काउंसिल ने वह जमीन हिंदू संगठन को देने के बजाय चर्च नेटवर्क को लीज पर दे दी.

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04 Jul 2026
( Updated: 04 Jul 2026
12:34 PM )
ब्रिटेन में हिंदुओं को बड़ा झटका! मंदिर बनाने पर रोक, चर्च और मुस्लिम समूह को मिली मंजूरी
Image Source: Meta AI
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Church and Muslim Group Granted Approval: ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में बसे नए शहर नॉर्थस्टोव में रहने वाले हिंदू परिवारों को बड़ा झटका लगा है. यहां रहने वाले करीब 150 हिंदू परिवार कई सालों से अपने पहले मंदिर का सपना देख रहे थे. इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जमीन भी मांगी थी, लेकिन काउंसिल ने वह जमीन हिंदू संगठन को देने के बजाय चर्च नेटवर्क को लीज पर दे दी. इस फैसले के बाद हिंदू समुदाय में काफी निराशा है. उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ पूजा की जगह नहीं चाहिए थी, बल्कि ऐसा केंद्र बनाना चाहते थे जहां आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों से जुड़ी रह सकें...

काउंसिल ने चर्च नेटवर्क को दी 999 साल की लीज

साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने करीब 0.25 हेक्टेयर जमीन 999 साल की लंबी लीज पर नॉर्थस्टोव चर्च नेटवर्क (NCN) को देने का फैसला किया. इसके बदले चर्च नेटवर्क को केवल नाममात्र का किराया देना होगा. इसी जमीन के लिए हिंदू समाज नॉर्थस्टोव (HSN) ने भी आवेदन किया था. हिंदू संगठन की योजना सिर्फ मंदिर बनाने की नहीं थी, बल्कि वहां एक ऐसा सर्वधर्म और वेलबीइंग सेंटर तैयार करने की थी, जहां अलग-अलग समुदायों के लोग भी आ सकें. लेकिन मूल्यांकन के दौरान चर्च नेटवर्क के प्रस्ताव को ज्यादा अंक मिले और जमीन उन्हें दे दी गई.

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मुस्लिम समुदाय भी इस परियोजना का हिस्सा बनेगा

जिस प्रस्ताव को मंजूरी मिली है, उसमें नॉर्थस्टोव के मुस्लिम समुदाय को भी अहम जगह दी गई है. योजना के मुताबिक वहां मुस्लिम समुदाय के लिए अलग नमाज कक्ष और इस्लामिक शिक्षा केंद्र बनाया जाएगा. स्थानीय मुस्लिम प्रतिनिधियों का कहना है कि शहर में रहने वाले करीब 200 मुसलमानों के पास पांचों वक्त की नमाज के लिए कोई स्थायी जगह नहीं है. इसलिए उन्होंने इस परियोजना में शामिल होने का फैसला किया. वहीं चर्च नेटवर्क का कहना है कि भविष्य में अन्य धार्मिक और सामाजिक समूह भी जरूरत पड़ने पर इस जगह का इस्तेमाल कर सकेंगे.

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हिंदू परिवारों की सबसे बड़ी परेशानी क्या है?

हिंदू समुदाय का कहना है कि पूरे इलाके में चर्च और मस्जिदें तो मौजूद हैं, लेकिन एक भी हिंदू मंदिर नहीं है. पूजा या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए उन्हें कई बार घंटों का सफर तय करना पड़ता है. गणेश उत्सव, शिवरात्रि, हवन या अन्य धार्मिक आयोजन करना भी आसान नहीं होता, क्योंकि कम्युनिटी हॉल सीमित समय के लिए ही मिलते हैं. मजबूरी में कई परिवार भगवान की मूर्तियों को घर के गैराज या बैग में रखकर संभालते हैं. बार-बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के कारण कई मूर्तियां भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. ऐसे हालात में मंदिर की जरूरत उनके लिए केवल आस्था का नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को बचाए रखने का भी सवाल बन गई है.

बच्चे अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं

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ब्रिटेन में रहने वाले कई भारतीय परिवारों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के कानपुर से यूके गए अभिषेक श्रीवास्तव बताते हैं कि उनके बच्चे हिंदू त्योहारों का माहौल ही नहीं देख पाते. उन्हें कभी-कभी लगता है कि विदेश आने का फैसला सही था या नहीं. वहीं एक किशोरी इवा का कहना है कि उसने आज तक पूरी रात जागकर शिवरात्रि नहीं मनाई और न ही कभी हवन में हिस्सा लिया. भारत में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को त्योहार मनाते देखकर उसे महसूस होता है कि विदेश में पली-बढ़ी नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से दूर होती जा रही है.

हिंदू संगठन ने फैसले की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जमीन नहीं मिलने के बाद हिंदू समाज नॉर्थस्टोव की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने पूरे फैसले की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि प्रस्ताव के मूल्यांकन में जिन बातों के आधार पर अंक काटे गए, उनके बारे में पहले स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी. अगर काउंसिल को कुछ अतिरिक्त दस्तावेज या वित्तीय जानकारी चाहिए थी तो इसके लिए साफ दिशा-निर्देश देने चाहिए थे. उन्होंने कहा कि संगठन इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर भी विचार कर रहा है.

काउंसिल ने कहा- नियमों के तहत ही लिया गया फैसला

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वहीं काउंसिल का कहना है कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है. अधिकारियों के मुताबिक सभी आवेदनों का मूल्यांकन पहले से तय मानदंडों के आधार पर किया गया और उसी के अनुसार अंक दिए गए. काउंसिल का दावा है कि किसी भी संगठन के साथ पक्षपात नहीं किया गया और अंतिम फैसला केवल प्रस्तावों की गुणवत्ता और तैयारियों को देखते हुए लिया गया. हालांकि, इस फैसले के बाद नॉर्थस्टोव का हिंदू समुदाय अब भी उम्मीद लगाए बैठा है कि भविष्य में उन्हें भी अपने मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र के लिए उचित जगह मिल सकेगी.

इस्लामिक संस्था के सदस्यों का पाकिस्तान कनेक्शन 

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पीटरबरो सिटी में करीब 12% मुस्लिम आबादी रहती है, लेकिन इनका प्रभाव सबसे ज्यादा है. आरोप है कि पीटरबरो सिटी काउंसिल को कथित तौर पर शरिया काउंसिल और शरिया सेंटर में बदल दिया है. पीटरबरो सिटी काउंसिल के ज्यादातर सदस्य पाकिस्तान मूल के हैं. काउंसिल की लीडर डॉ. शबीना कय्यूम हैं, फाइनेंस और कॉर्पोरेट मामलों के प्रमुख मोहम्मद जमील हैं, सार्वजनिक सुरक्षा मामलों के प्रमुख ज़मीर अली हैं, डेवलपमेंट से जुड़े मामलों के प्रमुख नुमान अली इकबाल हैं जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग एन शहीद के पास है.

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