भारत का एक फैसला और घुटने लगा पाकिस्तान का दम...बौखलाई PAK आर्मी, आनन-फानन बुलाई आपात बैठक, मुनीर भी रहे मौजूद
बीते साल पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा लिए गए एक फैसले का असर अब दिखने लगा है. पाकिस्तान का दम घुटने लगा है. लाख गीदड़भभकी दी, लेकिन जब भारत टस से मस नहीं हुआ तो पाकिस्तानी नेता और मुनीर बौखला गए.
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पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सराकर ने पाकिस्तान के सख्त कदत उठाते हुए सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को फिलहाल लागू न रखने का फैसला किया. एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम पाकिस्तान की आम जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि वह आतंकवाद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करती है.
सिंधु जल समझौते पर बौखलाया पाकिस्तान
बार-बार सांस रोक देेंगे, हाथ काट देंगे और परमाणु हमला करेंगे जैसी गीदड़भभकियों के बावजूद भारत की ओर से सिंधु जल संधि की बहाली नहीं किए जाने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है. इसी बीच पाकिस्तान ने कहा कि वो अपने हिस्से के पानी और वैध हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा. पाक फौज ने इस मामले को लेकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है.
पाक फौज की बैठक में सिंधु जल समझौते की बहाली पर चर्चा
पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में 'यह संकल्प लिया गया कि सरकार के निर्देशों और पाकिस्तान की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप देश के हिस्से का पानी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.'
युद्ध की धमकियों पर उतरा पाकिस्तान!
इस दौरान पाकिस्तान ने फिर युद्ध की गीदड़भभकी दी. पाक फौज के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने इस बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक में अपनाए गए प्रस्तावों के अनुपालन और निर्देशों की भी पुष्टि की गई. उस बैठक में ये सहमति व्यक्त की गई थी कि पाकिस्तान के हिस्से का पानी रोकने या उसका मार्ग परिवर्तित करने की किसी भी कार्रवाई को 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा. कोर कमांडर्स ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं की संचालन क्षमता, पेशेवर हथता और राटक तैयारी पर संतोष व्यक्त किया.
भारत ने सिंधु जल समझौते पर साफ कर दिया अपना रुख
इससे पहले पाकिस्तान की ओर से दी जा रही धमकियों पर भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. बीते 3 जुलाई को सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) पर बात करते हुए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कर दिया था कि साल 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से फिलहाल स्थगित रखा जाएगा. यह तब तक लागू नहीं होगी, जब तक पाकिस्तान भरोसेमंद और स्थायी तरीके से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता. सिंधु जल संधि पर भारत का रुख पहले जैसा ही रहेगा.
पाकिस्तान की वजह से खतरे में पड़ा सिंधु जल समझौता
वहीं सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की नीतियों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर किया है. इसका असर सिर्फ भारत-पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य एशिया, दक्षिण एशिया और उससे आगे तक महसूस किया जा सकता है.
सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की गीदड़भभकियों की लिस्ट!
'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान और गैर-कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल करता रहा है. साथ ही, सीमा पार आतंकवाद को उसका लगातार समर्थन और बार-बार की सैन्य आक्रामकता ने सिंधु जल संधि की भावना को कमजोर किया है. हाल ही में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मसूद मलिक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "जो भी हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे."
पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता (डीजी आईएसपीआर) लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कथित तौर पर कहा, "अगर आप हमारा पानी रोकेंगे, तो हम आपकी सांसें रोक देंगे." इससे पहले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के प्रमुख और आतंकवादी हाफिज सईद ने कहा था, "अगर तुम पानी रोकोगे, तो हम तुम्हारी सांसें रोक देंगे और इन नदियों में खून बहेगा."
अब सिंधु समझौते की बहाली का कोई तुक नहीं बनता!
आपको बता दें कि जब 1960 में जब सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे, तब हालात आज से बिल्कुल अलग थे. पाकिस्तान अक्सर इस समझौते को दोनों देशों के बीच सीमा पार नदी सहयोग का सबसे अच्छा उदाहरण बताता है. लेकिन यह संधि इतने वर्षों तक इसलिए चलती रही क्योंकि भारत ने हर परिस्थिति में ईमानदारी से इसका पालन किया और बेहद उदार रुख अपनाया. यह तब भी जारी रहा जब पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 (कारगिल) के युद्ध भारत पर थोपे और लगातार सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा.
समझौते के बाद से घाटे में ही रहा भारत!
अब तक भारत ने इस संधि के तहत इतनी उदारता दिखाई कि उसे खुद भी काफी नुकसान उठाना पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक यह दुनिया का एक अनोखा उदाहरण है, जहां ऊपरी धारा वाला देश होने के बावजूद भारत ने अपनी इच्छा से छह नदियों के पानी का चार गुना से भी ज्यादा हिस्सा निचली धारा वाले पाकिस्तान को दे दिया. इतना ही नहीं, भारत ने अपने ही पानी के इस्तेमाल पर कई सख्त सीमाएं भी स्वीकार कीं. यह सब अच्छे पड़ोसी संबंधों की उम्मीद में किया गया था.
क्या है सिंधु जल समझौता?
इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों के कुल पानी का लगभग 80.52 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान को मिलता है, जबकि ऊपरी धारा वाला देश होने और नदी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भारत में होने के बावजूद भारत को सिर्फ 19.48 प्रतिशत पानी ही मिला है. इसकी वजह से भारत को आर्थिक विकास, कृषि, जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे कई क्षेत्रों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है.
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वहीं पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद, खासकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत ने सिंधु जल संधि के भविष्य को आतंकवाद के मुद्दे से जोड़ दिया है. अब इस संधि को फिर से लागू करना इस बात पर निर्भर करेगा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद करे.
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रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस संधि को रद्द या निलंबित नहीं किया है, बल्कि इसे फिलहाल लागू न रखने का फैसला किया है. यानी अगर पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद कर देता है, तो भविष्य में इस संधि को फिर से लागू किया जा सकता है. हालांकि भारत की जनता की मांग और सरकार के स्पष्ट स्टैंड को देखकर कहा जा सकता है कि पाकिस्तान जबतक घुटनों पर नहीं आ जाता, अपनी आतंकवाद प्रायोजित नीति को नहीं छोड़ता तब तक ये संधि सस्पेंड ही रहेगी.