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नौकरी छीनने नहीं, मदद करने आया है AI? Sam Altman ने खुद मानी बड़ी बात

AI Job: Sam Altman ने माना है कि AI को लेकर नौकरी खत्म होने का जो डर दिखाया गया था, वह उतना बड़ा नहीं निकला जितना शुरुआत में लग रहा था. ऑस्ट्रेलिया में एक कार्यक्रम के दौरान सैम ऑल्टमैन ने साफ कहा कि उन्हें पहले लगा था कि बड़ी संख्या में व्हाइट कॉलर नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन असल में ऐसा उतनी तेजी से नहीं हुआ.

नौकरी छीनने नहीं, मदद करने आया है AI? Sam Altman ने खुद मानी बड़ी बात
Image Source: AI
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AI Job: दुनियाभर में पिछले कुछ सालों से एक डर लगातार लोगों के बीच बना हुआ है, क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की नौकरियां छीन लेगा? खासकर जब से OpenAI ने ChatGPT लॉन्च किया, तब से यह बहस और तेज हो गई. लेकिन अब खुद Sam Altman ने माना है कि AI को लेकर नौकरी खत्म होने का जो डर दिखाया गया था, वह उतना बड़ा नहीं निकला जितना शुरुआत में लग रहा था. ऑस्ट्रेलिया में एक कार्यक्रम के दौरान सैम ऑल्टमैन ने साफ कहा कि उन्हें पहले लगा था कि बड़ी संख्या में व्हाइट कॉलर नौकरियां खत्म हो जाएंगी, लेकिन असल में ऐसा उतनी तेजी से नहीं हुआ.

“मेरा अनुमान गलत निकला”

सैम ऑल्टमैन ने कहा कि जब ChatGPT आया था, तब उन्हें लगा था कि एंट्री लेवल ऑफिस जॉब्स पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। उन्हें उम्मीद थी कि कई काम AI बहुत जल्दी संभाल लेगा और इंसानों की जरूरत कम हो जाएगी. लेकिन अब उनका कहना है कि उन्होंने इस असर को जरूरत से ज्यादा बड़ा मान लिया था. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें खुशी है कि उनका अनुमान गलत साबित हुआ. यानि AI जरूर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन इंसानों की जगह लेना अभी भी इतना आसान नहीं है.

तकनीक तेज निकली, लेकिन समाज वैसा नहीं बदला

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ऑल्टमैन ने माना कि AI की तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ी, उसका अंदाजा उनकी कंपनी ने लगभग सही लगाया था। लेकिन इसका समाज और नौकरियों पर क्या असर होगा, इसे लेकर वे पूरी तरह सही साबित नहीं हुए.
उन्होंने कहा कि शुरुआत में लोगों को सच में डर था कि मशीनें इंसानों के कई काम छीन लेंगी. लेकिन अब साफ दिख रहा है कि सिर्फ तकनीक आ जाने से इंसान की जरूरत खत्म नहीं हो जाती.

इंसानी बातचीत की जगह मशीन नहीं ले पाई

सैम ऑल्टमैन ने एक दिलचस्प उदाहरण भी दिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद ईमेल और स्लैक मैसेज के जवाब AI से लिखवाने की कोशिश की थी.
लेकिन कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि मशीन द्वारा लिखे जवाबों में इंसानी एहसास और जुड़ाव की कमी थी। इसलिए उन्होंने फिर खुद जवाब देना शुरू कर दिया.
यहीं से उन्हें एहसास हुआ कि कई नौकरियों में सिर्फ काम करना जरूरी नहीं होता, बल्कि इंसानी बातचीत, समझ और भावनाएं भी उतनी ही जरूरी होती हैं.

फिर भी कंपनियां AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं

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हालांकि AI ने अब तक बड़े स्तर पर नौकरियां खत्म नहीं की हैं, लेकिन इसका असर कंपनियों में जरूर दिखाई देने लगा है. दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब AI टूल्स का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. कुछ जगहों पर काम के तरीके बदले जा रहे हैं और कुछ पदों को ऑटोमेशन के जरिए आसान बनाया जा रहा है. यानी आने वाले समय में नौकरियां पूरी तरह खत्म हों या नहीं, लेकिन काम करने का तरीका जरूर बदलता दिखाई दे रहा है.

डर नहीं, बदलाव को समझने की जरूरत

सैम ऑल्टमैन की बातों से एक चीज साफ होती है, AI इंसानों की जगह लेने नहीं, बल्कि काम करने के तरीके बदलने आया है. कुछ काम मशीनें तेज और आसान बना सकती हैं, लेकिन इंसान की सोच, भावनाएं, बातचीत और समझ अब भी सबसे बड़ी ताकत हैं. शायद यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनी का CEO भी अब कह रहा है कि मशीनें हर जगह इंसानों की जगह नहीं ले सकतीं.

INPUT -IANS 

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