अब अचानक नहीं आएगा हार्ट अटैक! AI बताएगा 15 साल पहले दिल का खतरा
AI: यह AI टूल सिर्फ एक ब्लड टेस्ट के जरिए यह समझने कि कोशिश करता है कि आने वाले वर्षो में किसी व्यक्ति को दिल से जुडी गंभीर बीमारियों का कितना खतरा हो सकता है.
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AI: आज के भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल की बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही है. अक्सर लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते है. जब शरीर पहले ही संकेत देने लगता है - जैसे सीने में दर्द , सांस फूलना, थकान या अचानक हार्ट अटैक. लेकिन सोचिए, अगर किसी इंसान को यह 10 -15 साल पहले ही पता चल जाए कि भविष्य में उसके दिल को खतरा हो सकता है, तो शायद वह समय रहते अपनी जिंदगी बदल सके. इसी उम्मीद के साथ The University of Hong Kong के मेडिकल वैज्ञानिकों ने एक नया AI आधारित टूल तैयार किया है, जिसका नाम CardioMics Score रखा गया. यह टूल सिर्फ एक ब्लड टेस्ट के जरिए यह समझने कि कोशिश करता है कि आने वाले वर्षो में किसी व्यक्ति को दिल से जुडी गंभीर बीमारियों का कितना खतरा हो सकता है. इसकी खास बात यह है कि यह बीमारी शुरू होने के बहुत पहले ही शरीर के अंदर हो रहे छोटे-छोटे बदलावों को पहचान सकता है.
बीमारी आने से पहले ही मिल सकता है चेतावनी का संकेत
आमतौर पर लोग तभी सावधान होते हैं, जब शरीर तकलीफ देना शुरू कर देता है. लेकिन कई बार दिल की बीमारी धीरे-धीरे सालों तक शरीर के अंदर बढ़ती रहती है और इंसान को पता भी नहीं चलता. यही वजह है कि कई लोगों को अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक का सामना करना पड़ता है.
CardioMicsScore की सबसे बड़ी ताकत यही मानी जा रही है कि यह शरीर के अंदर होने वाले उन “मॉलिक्यूलर बदलावों” को पहचान सकता है, जो बीमारी आने से काफी पहले शुरू हो जाते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह टूल करीब 15 साल पहले तक यह अंदाजा लगा सकता है कि भविष्य में किसी व्यक्ति को हार्ट से जुड़ी परेशानी हो सकती है या नहीं.
इसका मतलब यह नहीं कि यह भविष्यवाणी 100% तय कर देती है, बल्कि यह एक तरह का “अर्ली वार्निंग सिस्टम” है. जैसे मौसम विभाग तूफान आने से पहले चेतावनी देता है, वैसे ही यह टूल शरीर के अंदर छिपे खतरे की पहले से जानकारी देने की कोशिश करता है.
किन बीमारियों का पता लगाने में मदद करेगा यह टूल?
यह AI टूल सिर्फ एक बीमारी पर फोकस नहीं करता, बल्कि दिल और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं के खतरे को पहचानने में मदद करता है. इनमें हार्ट अटैक का कारण बनने वाली कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी अनियमित धड़कन की समस्या, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और खून के थक्के बनने से जुड़ी वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म जैसी स्थितियां शामिल हैं.
यानी एक ही टेस्ट शरीर के कई बड़े खतरों की दिशा में इशारा कर सकता है. यही वजह है कि मेडिकल दुनिया में इसे भविष्य की हेल्थ स्क्रीनिंग तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है.
आखिर यह AI टूल काम कैसे करता है?
हमारे खून में सिर्फ लाल और सफेद कोशिकाएं ही नहीं होतीं, बल्कि हजारों तरह के प्रोटीन, मेटाबोलाइट्स और जैविक संकेत मौजूद होते हैं. ये संकेत बताते हैं कि शरीर के अंदर क्या चल रहा है, इम्यून सिस्टम कैसा काम कर रहा है, मेटाबॉलिज्म ठीक है या नहीं, और रक्त वाहिकाएं कितनी स्वस्थ है.
वैज्ञानिकों ने AI और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से इन सभी जटिल जानकारियों को एक साथ समझने की कोशिश की. इसके लिए हजारों लोगों के ब्लड सैंपल और हेल्थ डेटा का विश्लेषण किया गया. AI ने खून में मौजूद अलग-अलग मॉलिक्यूल्स के पैटर्न को पढ़कर यह समझना सीखा कि किस तरह के बदलाव आगे चलकर दिल की बीमारी का संकेत बन सकते हैं. यह टूल इंसान के शरीर की “अंदरूनी कहानी” पढ़ने की कोशिश करता है, वह कहानी जो अभी बाहर दिखाई नहीं दे रही.
क्यों माना जा रहा है इसे खास?
आज जो सामान्य हेल्थ चेकअप होते हैं, उनमें उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन और स्मोकिंग जैसी चीजों के आधार पर दिल की बीमारी का खतरा बताया जाता है. यह तरीका उपयोगी जरूर है, लेकिन हर बार पूरी तस्वीर नहीं दिखा पाता.
CardioMicsScore इससे एक कदम आगे जाने की कोशिश करता है. यह सिर्फ बाहरी फैक्टर्स नहीं देखता, बल्कि शरीर के अंदर होने वाले सूक्ष्म जैविक बदलावों को भी समझता है.इससे डॉक्टरों को यह अंदाजा लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन व्यक्ति भविष्य में ज्यादा खतरे में हो सकता है, भले ही अभी वह पूरी तरह स्वस्थ दिखाई दे रहा हो.
लोगों की जिंदगी बदल सकता है यह तरीका
अगर किसी व्यक्ति को समय रहते यह पता चल जाए कि उसे भविष्य में दिल की बीमारी का खतरा है, तो वह अपनी जिंदगी में बड़े बदलाव कर सकता है. जैसे-धूम्रपान छोड़ना, वजन नियंत्रित करना, बेहतर खानपान अपनाना, नियमित व्यायाम करना, तनाव कम करना और समय-समय पर जांच करवाना.
कई बार छोटी-छोटी आदतें ही आने वाले बड़े खतरे को रोक सकती हैं. यही इस तकनीक का सबसे मानवीय पहलू है. इसका उद्देश्य सिर्फ बीमारी पकड़ना नहीं, बल्कि लोगों को बीमारी होने से पहले संभलने का मौका देना है.
भविष्य की हेल्थकेयर की एक झलक
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यह तकनीक अभी रिसर्च के स्तर पर है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में AI आधारित ऐसे टेस्ट हेल्थकेयर का अहम हिस्सा बन सकते हैं.. भविष्य में शायद मेडिकल चेकअप सिर्फ “बीमारी ढूंढने” तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि “बीमारी आने से पहले रोकने” पर ज्यादा ध्यान देंगे..