जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

'प्यारे स्वदेश के हित अंगार मांगता हूं...', नीट पेपर लीक पर चर्चा के बीच NSA डोभाल का Gen-Z को इशारों में बड़ा संदेश

देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अजीत डोभाल को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इस दौरान उन्होंने भारत को नेपाल और बांग्लादेश बनाने का ख्वाब देख रहे युवाओं को बता दिया कि असली आजादी क्या होती है और ये मिली कैसे. उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि करार दिया.

Author
01 Aug 2026
( Updated: 01 Aug 2026
04:47 PM )
'प्यारे स्वदेश के हित अंगार मांगता हूं...', नीट पेपर लीक पर चर्चा के बीच NSA डोभाल का Gen-Z को इशारों में बड़ा संदेश
Image Source-IANS
Advertisement

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इस दौरान देश के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि देश के समक्ष बहुत सारी चुनौतियां हैं, जिनके से निपटने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अभी ऐसी ताकतें हैं जो भारत को बढ़ते नहीं देखना चाहते हैं. उन्होंने इस दौरान कहा कि आज के युवा शायद यह सोचें कि भारत हमेशा से ऐसा ही रहा है, या वे आज़ादी का मतलब सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी से कुछ भी करने की छूट समझ बैठें. लेकिन आज़ादी का असली मतलब यह नहीं है."

NSA डोभाल ने युवाओं से समझाया आजादी का असली मतलब

NSA अजीत डोभाल ने कहा, "आज के युवा शायद यह सोचें कि भारत हमेशा से ऐसा ही रहा है, या वे आज़ादी का मतलब सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी से कुछ भी करने की छूट समझ बैठें. लेकिन आज़ादी का असली मतलब यह नहीं है."

Advertisement

नेपाल-बांग्लादेश बनाने का ख्वाब देखने वालों को डोभाल का मैसेज

'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' मिलने के बाद उन्होंने कहा कि, हर भारतीय, खासकर हमारे युवाओं को उनके शब्दों पर सोचना चाहिए, भारत के लिए उनकी सोच और राष्ट्र-निर्माण की उनकी भावना को समझना चाहिए... लोकमान्य तिलक के जीवन और उनके चरित्र की गहराई को सही मायने में समझने के लिए, उस दौर के हालात, मजबूरियों और उस समय की दयनीय स्थितियों को समझना ज़रूरी है - ऐसी सच्चाइयां जिनकी पूरी तरह से कल्पना करना शायद हमारे लिए, और खासकर युवाओं के लिए, मुश्किल है. आज के युवा शायद यह सोचें कि भारत हमेशा से ऐसा ही रहा है, या वे आज़ादी का मतलब सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी से कुछ भी करने की छूट समझ बैठें. लेकिन आज़ादी का असली मतलब यह नहीं है. लोकमान्य तिलक उन लोगों में सबसे आगे थे जिन्होंने इस आज़ादी के लिए अपनी जान दी, संघर्ष किया और नेतृत्व किया. ऐसे दौर में जब बहुत कम लोग आवाज़ उठाने की हिम्मत करते थे - एक ऐसा समय जो बड़े पैमाने पर डर, तकलीफ़ और पीड़ित समाज की सामूहिक कराह से भरा था - वे एक महान हस्ती के तौर पर उभरे..."

'देश बहुत सौभाग्यशाली'

Advertisement

अजित डोभाल ने इस दौरान मौजूदा नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि हम बेहद सौभाग्यशाली हैं कि देश को पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसा मजबूत नेतृत्व मिला है. भारत इस समय आंतरिक, बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से निपट रहा है. देश तेजी से आगे बढ़ रहा है, इसलिए कई विरोधी ताकतें उसकी तरक्की से परेशान हैं. ऐसे समय में हर नागरिक को सबसे पहले सिर्फ देशहित के बारे में सोचना चाहिए.

'आजादी मनमर्जी नहीं'

इस दौरान युवाओं को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को आजादी का असली अर्थ जानना बेहद जरूरी है. कुछ लोग मान लेते हैं कि आजादी का मतलब मनमर्जी या कुछ भी करना है, जबकि ऐसी सोच बिल्कुल गलत है'. उन्होंने साफ कहा कि जो रास्ता राष्ट्रहित के खिलाफ हो, उस पर कदम भी नहीं बढ़ाना चाहिए. भारत को शक्तिशाली बनाना हम सभी का पहला कर्तव्य है.

Advertisement

गृह मंत्री अमित शाह ने अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक नेशनल अवॉर्ड से किया सम्मानित 

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया. 

देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अजीत डोभाल को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. पुरस्कार ग्रहण करने के बाद उपस्थित अतिथियों ने उनके कार्यों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की.

Advertisement

इस समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, लोकमान्य तिलक ट्रस्ट के ट्रस्टी रोहित तिलक सहित विभिन्न क्षेत्रों के अनेक व्यक्ति और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे. उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए इस समारोह ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के राष्ट्रसेवा के विचारों को एक बार फिर स्मरण कराया.

कैसा रहा है NSA डोभाल का करियर?

81 वर्षीय अजीत डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और अभी इस पद पर बने हुए हैं. अपने लंबे करियर में उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में काम किया है. इस्लामाबाद और लंदन में भारतीय मिशनों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. डोभाल भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रह चुके हैं. 2017 में डोकलाम गतिरोध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर उनके रणनीतिक फैसलों और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है.

लोकमान्य तिलक पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में महाराष्ट्र मंडल, पुणे द्वारा की गई थी. यह पुरस्कार हर साल 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने राष्ट्र की प्रगति, विकास और सामाजिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया हो. सबसे पहले यह पुरस्कार समाजवादी नेता एसएम जोशी को प्रदान किया गया था.

यह भी पढ़ें

पिछले वर्षों में यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को मिल चुका है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें