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इंडियन मुजाहिदीन का था अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में हाथ, पूर्व DSP ने किया बड़ा खुलासा, 38 को फांसी, 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार

अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के दोषी ठहराए गए 49 लोगों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जबकि 11 दोषियों को उनके प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रहने की सजा दी गई थी.

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08 Jul 2026
( Updated: 08 Jul 2026
02:02 PM )
इंडियन मुजाहिदीन का था अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में हाथ, पूर्व DSP ने किया बड़ा खुलासा, 38 को फांसी, 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार
Image Credits: Gujarat High Court
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अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के 38 दोषियों की फांसी, 11 की उम्र कैद की सजा को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है. वहीं इस केस की जांच में शामिल रहे पूर्व DSP इस हमले में इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क का हाथ होने का बड़ा खुलासा किया है.

गुजरात हाईकोर्ट ने सीरियल बम धमाकों में 49 लोगों को ठहराया दोषी

गुजरात हाईकोर्ट ने बीते दिन 2008 अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखा. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा की पुष्टि करते हुए सजा के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया. वहीं अब इस को लेकर पूर्व DSP का भी बयान  सामने आया है.

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आपको बता दें कि हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति अल्पेश वाई. कोग्जे और न्यायमूर्ति समीर जे. दवे की खंडपीठ ने विशेष अदालत के फरवरी 2022 के फैसले को बरकरार रखा. इस फैसले में भारत के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक में भूमिका निभाने वाले 49 लोगों को दोषी ठहराया गया था.

मौजूदा कानूनों के तहत निचली अदालत द्वारा सुनाई गई हर फांसी की सजा को लागू करने से पहले हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है.

56 लोगों के परिवारों को मिला 10-10 लाख रुपये का मुआवजा

हाईकोर्ट ने सिलसिलेवार बम धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया.

फैसले के बाद जारी आदेश के विवरण के अनुसार, अदालत ने हमलों में घायल हुए 200 से अधिक लोगों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया.

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कैसे हुई आरोपियों की हुई गिरफ़्तारी 

वहीं जांच में शामिल रहे अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के सेवानिवृत्त डीसीपी अभय चुडासमा ने कहा कि इस मामले का खुलासा व्यापक फील्डवर्क, विभिन्न एजेंसियों के समन्वित जांच अभियान और देशभर से बड़ी मात्रा में सबूत जुटाने के जरिए किया गया था.

मंगलवार को उस समय की परिस्थितियों को याद करते हुए चुडासमा ने कहा कि अहमदाबाद धमाकों से पहले जयपुर समेत देश के कई शहरों में बम धमाके हो चुके थे, लेकिन उन मामलों का खुलासा नहीं हो पाया था.

उन्होंने कहा, "जब 2008 में अहमदाबाद में धमाके हुए. उससे कुछ समय पहले जयपुर में भी बम धमाके हुए थे. उससे पहले भी देश के कई शहरों में विस्फोट हुए थे, लेकिन उन मामलों को सुलझाया नहीं जा सका था."

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उन्होंने बताया कि अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने तुरंत कई जांच टीमें बनाई और कुछ ही हफ्तों में बड़ी सफलता हासिल कर ली.

चुडासमा ने कहा, "अहमदाबाद धमाकों के बाद क्राइम ब्रांच ने बहुत मेहनत की. हमने कई टीमें बनाई और 20 दिनों के भीतर कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया." उनके अनुसार, इस जांच से देशभर में सक्रिय इंडियन मुजाहिदीन के नेटवर्क का भी पता चला.

70 मिनट के भीतर हुए थे 21 धमाके 

आपको बता दें कि यह मामला 26 जुलाई 2008 की शाम अहमदाबाद में किए गए समन्वित बम धमाकों से जुड़ा है. उस दिन करीब 70 मिनट के भीतर 21 धमाके हुए थे. ये धमाके बसों, सार्वजनिक स्थानों और उन दो अस्पतालों में किए गए थे, जहां पहले हुए धमाकों के पीड़ितों को इलाज के लिए ले जाया गया था.

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इन हमलों में 56 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे. इसके बाद यह देश की सबसे बड़ी आतंकवाद जांचों में से एक बन गई. विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने 35 एफआईआर दर्ज कीं और सैकड़ों आरोपपत्र दाखिल किए.

मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत के सामने 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और हजारों दस्तावेजी व भौतिक साक्ष्य पेश किए गए. फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए 49 आरोपियों को दोषी ठहराया और 28 अन्य को बरी कर दिया.

हाईकोर्ट ने 38 को सुनाई फांसी की सजा

दोषी ठहराए गए 49 लोगों में से 38 को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जबकि 11 दोषियों को उनके प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रहने की सजा दी गई थी.

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विशेष अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों ने गुजरात हाई कोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी, जबकि राज्य सरकार ने फांसी की सजाओं की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.

हाईकोर्ट ने लंबे समय तक इस मामले की सुनवाई की और मंगलवार को अपना फैसला सुनाया था.

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हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजाएं बरकरार रहेंगी. दोषियों के पास अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का कानूनी अधिकार मौजूद है.

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