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रक्षा मंत्रालय की मिनीरत्न HSL को मिला बड़ा भरोसा, नौसेना ने कहा- अब रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभानी होगी

Hindustan Shipyard Limited: नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने सोमवार को HSL के दौरे के दौरान यह संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में शिपयार्ड की भूमिका सिर्फ नए युद्धपोत बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके पूरे जीवनचक्र के रखरखाव, अपग्रेड और आधुनिकीकरण तक बढ़ेगी.

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08 Jul 2026
( Updated: 08 Jul 2026
10:31 AM )
रक्षा मंत्रालय की मिनीरत्न HSL को मिला बड़ा भरोसा, नौसेना ने कहा- अब रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभानी होगी
Image Source: X/@CMD_HSL
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HSL: भारतीय नौसेना अब हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) को केवल जहाज निर्माण करने वाले सार्वजनिक उपक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रही है. नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (DCNS) वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने सोमवार को HSL के दौरे के दौरान यह संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में शिपयार्ड की भूमिका सिर्फ नए युद्धपोत बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके पूरे जीवनचक्र के रखरखाव, अपग्रेड और आधुनिकीकरण तक बढ़ेगी. वाइस एडमिरल सोबती ने 6 जुलाई को विशाखापत्तनम स्थित HSL का दौरा किया. इस दौरान हाल ही में नियुक्त चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) सी. रघुराम ने उन्हें शिपयार्ड में चल रही परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण और भविष्य की तैयारियों की जानकारी दी.

जीवनचक्र तक निभाएगा HSL अहम भूमिका

निरीक्षण के बाद सोबती ने HSL के हाल के बदलावों और उपलब्धियों की सराहना की. उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना और HSL का रिश्ता दशकों पुराना है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे नए स्तर पर ले जाया जाए. उनके मुताबिक, नौसेना चाहती है कि HSL केवल जहाज बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न करे, बल्कि युद्धपोतों के पूरे सेवा काल में उनके रखरखाव, तकनीकी उन्नयन और मिड-लाइफ अपग्रेड जैसे कामों में भी प्रमुख भूमिका निभाए.

Image Source: X/@CMD_HSL
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नौसेना के विस्तार के साथ बढ़ेगी HSL की जिम्मेदारी

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय नौसेना अगले कुछ वर्षों में अपने बेड़े का तेजी से विस्तार कर रही है. नए युद्धपोतों के साथ-साथ पहले से सेवा में मौजूद जहाजों के अपग्रेड और लाइफ साइकिल सपोर्ट की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में HSL जैसी सरकारी शिपयार्ड की जिम्मेदारियां पहले के मुकाबले कहीं अधिक व्यापक हो सकती हैं.

Image Source: X/@CMD_HSL
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गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता

डिप्टी नेवल चीफ ने इस दौरान गुणवत्ता और समय पर परियोजनाएं पूरी करने को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया. उन्होंने कहा कि रक्षा परियोजनाओं में देरी का सीधा असर नौसेना की परिचालन तैयारियों पर पड़ता है. इसलिए गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा का पालन बेहद जरूरी है.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी शिपयार्ड की असली ताकत उसकी मशीनें नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले अनुभवी लोग होते हैं. डिजाइन क्षमता बढ़ाने, कुशल मानव संसाधन तैयार करने और तकनीकी विशेषज्ञता में लगातार निवेश करने पर जोर देते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि HSL आने वाले समय में अपनी क्षमता का और विस्तार करेगा.

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देश के सबसे बड़े शिपयार्ड में शामिल है HSL

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HSL देश के सबसे पुराने सरकारी शिपयार्डों में गिना जाता है. 1941 में स्थापित इस शिपयार्ड को 1952 में केंद्र सरकार के अधीन लाया गया था. क्षमता के लिहाज से यह कोचीन शिपयार्ड के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा शिपयार्ड है. यहां 80 हजार डेडवेट टन (DWT) तक के जहाजों पर काम किया जा सकता है.

Image Source: X/@CMD_HSL
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पनडुब्बी निर्माण की दिशा में भी बढ़ सकता है HSL

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HSL सिर्फ जहाज बनाने वाला शिपयार्ड नहीं है. यह देश के गिने-चुने ऐसे शिपयार्डों में शामिल है, जहां पनडुब्बियों की मरम्मत और आधुनिकीकरण की क्षमता मौजूद है. भारतीय नौसेना की कई किलो-क्लास सबमरीन यहां बड़े तकनीकी अपग्रेड से गुजर चुकी हैं. अब सरकार HSL को अगले चरण में पनडुब्बी निर्माण से भी जोड़ने की तैयारी में है. रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत की स्वदेशी सबमरीन निर्माण क्षमता को बड़ा बल मिल सकता है.

रणनीतिक साझेदार के रूप में उभर सकता है HSL

हाल के वर्षों में HSL ने जहाज निर्माण के साथ मरम्मत, रिफिट और रक्षा परियोजनाओं में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है. नौसेना के शीर्ष नेतृत्व की यह टिप्पणी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भविष्य में HSL को केवल एक निर्माण इकाई नहीं, बल्कि भारतीय नौसेना के दीर्घकालिक तकनीकी और रणनीतिक सहयोगी के रूप में तैयार किया जा सकता है.

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