न झुकेंगे, न पीछे हटेंगे...फिर एक्टिव हुए सोनम वांगचुक, सरकार के सामने रख दीं ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें
Sonam Wangchuk: प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी मांग लद्दाख के लिए सीधे चुनी जाने वाली विधानसभा की है. उनका कहना है कि विधानसभा के पास सिर्फ नाम का अधिकार नहीं, बल्कि बजट, टैक्स, सरकारी खर्च, कर्ज और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में वास्तविक वित्तीय शक्तियां भी होनी चाहिए.
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Sonam Wangchuk: लद्दाख में अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर चल रहा आंदोलन एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है. सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख के दूसरे प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की. इस बैठक में केंद्र सरकार के सामने कई ऐसी मांगें रखी गईं, जिन्हें प्रतिनिधियों ने ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी मांगें बताया, जिन पर अब कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
लेह में हुई बैठक में कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के प्रतिनिधियों के साथ लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, सज्जाद करगिली, सोनम वांगचुक और चेरिंग दोरजे समेत कई लोग मौजूद रहे.
लद्दाख के लिए चुनी हुई विधानसभा की मांग
प्रतिनिधियों की सबसे बड़ी मांग लद्दाख के लिए सीधे चुनी जाने वाली विधानसभा की है. उनका कहना है कि विधानसभा के पास सिर्फ नाम का अधिकार नहीं, बल्कि बजट, टैक्स, सरकारी खर्च, कर्ज और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में वास्तविक वित्तीय शक्तियां भी होनी चाहिए.
इसके साथ ही उन्होंने कंसोलिडेटेड फंड और कंटीजेंसी फंड जैसी वित्तीय व्यवस्थाओं को संवैधानिक सुरक्षा देने की मांग की है. उनका मानना है कि इससे लद्दाख के लोगों को अपने क्षेत्र के विकास और पैसों से जुड़े फैसलों में ज्यादा अधिकार मिलेंगे.
अलग लोक सेवा आयोग और प्रशासनिक सेवाओं की मांग
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र के लिए अलग लोक सेवा आयोग बनाने की मांग भी रखी है. साथ ही लद्दाख प्रशासनिक सेवा और लद्दाख पुलिस सेवा के गठन की बात कही गई है. उनका तर्क है कि लद्दाख की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए प्रशासन में स्थानीय जरूरतों और युवाओं को ज्यादा महत्व मिलना चाहिए.
24 सितंबर की पुलिस फायरिंग पर न्याय की मांग
बैठक में 24 सितंबर 2025 की पुलिस फायरिंग का मुद्दा भी उठाया गया. प्रतिनिधियों ने इस घटना में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए न्याय और सम्मानजनक मुआवजे की मांग की. घायलों और दूसरे प्रभावित लोगों को उचित सहायता देने के साथ घटना से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी गई. पहली बरसी नजदीक आने के कारण यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और प्रतिनिधि चाहते हैं कि पीड़ित परिवारों को जल्द न्याय मिले.
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जमीन, रोजगार और कारोबार की सुरक्षा पर जोर
प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक लद्दाख के लिए स्थायी संवैधानिक समाधान नहीं मिलता, तब तक यहां की जमीन, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय हितों की अंतरिम सुरक्षा की जाए. इसके अलावा करोबार और ट्रेड लाइसेंस के लिए लद्दाख रेजिडेंस सर्टिफिकेट (LRC) को जरूरी बनाने की मांग की गई है. प्रतिनिधियों का कहना है कि व्यापारिक इकाइयों के पंजीकरण और लाइसेंस से जुड़े मामलों में स्थानीय निवास प्रमाणपत्र को महत्व मिलना चाहिए.अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों और लाभों की सुरक्षा के लिए लद्दाख-विशिष्ट ST प्रमाणन की मांग भी रखी गई है.
अब केंद्र के जवाब का इंतजार
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लद्दाख के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी मांगें सिर्फ राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें जमीन, रोजगार, कारोबार, प्रशासन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े सवाल शामिल हैं. सोनम वांगचुक पहले भी आंदोलन और भूख हड़ताल के जरिए इन मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठा चुके हैं.
अब देखना होगा कि केद्र सरकार इन ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगों पर क्या रुख अपनाती है और लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है.