कश्मीर से खदेड़े जा रहे घुसपैठिए, 150 बांग्लादेशियों को किया गया डिपोर्ट! बंगाल पहुंचा वायुसेना का विमान
भारत से बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने का काम शुरू हो गया है. कश्मीर में छिपे मिले थे 600 बांग्लादेशी, जिन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है. इनमें से 150 को वायुसेना के विमान से बंगाल भेज दिया गया है, ताकि इन्हें इनके देश भेजा जा सके.
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जम्मू और कश्मीर में छिपे क़रीब 600 बांग्लादेशी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ बड़ी कार्रवाई की गई है. इसमें से कुल 150 घुसपैठियों को कश्मीर से बंगाल भेज दिया गया और इन्हें जल्द डिपोर्ट किया जाएगा. कश्मीर से निकाले गए इन 150 अवैध बांग्लादेशियों को डिपोर्ट करने (वापस भेजने) के लिए भारतीय वायुसेना के विमान से पश्चिम बंगाल लाया गया है.
सूत्रों ने पुष्टि की है कि इन अवैध प्रवासियों को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के विमान से श्रीनगर से बागडोगरा हवाई अड्डे तक लाया गया. एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के अधिकारियों को सौंप दिया गया है.
बांग्लादेशी घुसपैठियों को किया जा रहा है डिपोर्ट
उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा और आधिकारिक चैनलों के माध्यम से उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की कोशिश की जाएगी. अधिकारी ने आगे कहा कि अगर बांग्लादेश उन्हें स्वीकार करने से इनकार करता है, तो अवैध प्रवासियों को सीमा पार धकेल दिया जाएगा. यह प्रक्रिया 7 अक्टूबर को होने की संभावना है.
अधिकारी ने कहा कि यह प्रक्रिया सीमा के अलग-अलग हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से होती है. अवैध प्रवासियों को सीमा की बाड़ के पार ले जाया जाता है और जीरो लाइन के करीब पहुंचाया जाता है. फिर वे खुद बांग्लादेश में प्रवेश करते हैं.
150 बांग्लादेशियों को कश्मीर से बंगाल भेजा गया
पश्चिम बंगाल में बीएसएफ ने पहले भी इसी तरह के डिपोर्टेशन का काम किया है. देश के अलग-अलग हिस्सों में पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार डिपोर्ट करने के लिए पश्चिम बंगाल भेजा जाता है.
अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में बांग्लादेशी अधिकारी अपने नागरिकों को वापस लेने के लिए तैयार हो जाते हैं, जबकि अन्य मामलों में वे जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देते हैं.
जम्मू और कश्मीर में सर्वे के दौरान छिपे मिले थे 600 बांग्लादेशी
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर से और भी अवैध प्रवासियों को दूसरी जगह भेजा जा सकता है. इसके परिणामस्वरूप, डिपोर्टेशन (देश से बाहर भेजने) के लिए और भी बांग्लादेशी नागरिकों को पश्चिम बंगाल लाया जा सकता है. इससे पहले भी गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को पश्चिम बंगाल के रास्ते ही डिपोर्ट किया गया है.
खबरों के मुताबिक, अकेले 2026 में पश्चिम बंगाल के रास्ते लगभग 4,800 से 5,000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश डिपोर्ट किया गया है. विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2009 और 2011 के बीच 23,653 लोगों को डिपोर्ट किया गया था. गृह मंत्रालय ने यह भी बताया है कि 2014 तक 28,131 अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था.
SIR के बाद और भी बांग्लादेशियों को भेजा जाएगा
कई राज्यों में वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) का काम चल रहा है, ऐसे में अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में और भी लोगों को डिपोर्ट किया जा सकता है.
केंद्र सरकार ने डेमोग्राफी चेंज के लिए बनाई है हाई लेवल कमेटी
आपको बता दें कि सरकार की ओर से ये कार्रवाई ऐसे वक्त में हो रही है जब गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों में गैर-कानूनी प्रवास और डेमोग्राफी बदलाव की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी गठित की हुई है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसका ऐलान स्वतंत्रता दिवस के अवसर लाल किले की प्राचीर से बीते साल किया था.
सरकार ने अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों (डेमोग्राफी चेंज) का अध्ययन करने और उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है.
कौन-कौन हैं इस कमेटी में?
जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) समिति के अध्यक्ष हैं. जनगणना आयुक्त के अलावा, तीन प्रतिष्ठित व्यक्ति—श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (Retd IAS), श्री बालाजी श्रीवास्तव (Retd IPS) और डॉ. शमिका रवि (सदस्य PMEAC)— समिति के सदस्य हैं. जुलाई में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में इस कमेटी की बैठक हुई थी.
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बंगाल में तेज हुआ घुसपैठ विरोधी अभियान!
इतना ही नहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने बंगाल-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग की प्रक्रिया तेज की है, BSF को लाखों एकड़ जमीन सौंप दिया गया है, पुलिस को डिटेन करने के पावर दिए गए हैं, BSF को डिपोर्ट करने की जिम्मेदारी पूरी करने को काम दिया गया है और हर जिले में एक होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिए गए हैं. यहां पकड़े गए बांग्लादेशियों को रखा जाएगा, जिसकी अवधि अधिकतम 1 महीने की होगी. इस दौरान कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें डिपोर्ट करना ही होगा.
डेमोग्राफी चेंज को लेकर देशभर से जानकारी और डेटा जुटा रही कमेटी
यह हाई लेवल कमेटी देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का वैज्ञानिक रूप से आकलन करेगी, उनके कारणों का विश्लेषण करेगी और उचित नीतिगत, विधायी तथा प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करती है.
गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई कमेटी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पिछले 15 सालों के दौरान जिलों, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और सीमावर्ती जिलों में धार्मिक डेमोग्राफी में हुए स्पष्ट बदलावों की जानकारी मांगी थी.
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कई राज्यों से मांगी कई जानकारी
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पिछले दो महीनों की ही बात करें तो कमेटी ने राज्यों को भीजे चिट्ठी में साल दर साल बदलाव दिखाने वाला टाइम सीरीज डेटा, दूसरे प्रशासनिक आंकड़े, धार्मिक जनसंख्या में उभरते प्रमुख रुझानों पर राज्य सरकारों का आकलन और 2011 से आदिवासी आबादी की धार्मिक संरचना से जुड़े डेटा की भी मांग की थी.