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जब जिंदगी में पहली बार इन आदिवासी महिलाओं ने देखा शहर, किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन, UP पुलिस ने वादा किया पूरा

वाराणसी से 95 KM दूर स्थित पंडी गांव की आदिवासी महिलाओं ने जिंदगी में पहली बार देखा शहर का मुंह, किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन. यूपी पुलिस ने इन महिलाओं से अपना वादा पूरा किया. इसके बाद इन्हें बस से काशी के मॉल होटलों, और गोल्फ कोर्ट का दौरा कराया गया.

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01 Jul 2026
( Updated: 01 Jul 2026
01:44 PM )
जब जिंदगी में पहली बार इन आदिवासी महिलाओं ने देखा शहर, किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन, UP पुलिस ने वादा किया पूरा
Image Source: @IgRangeVaranasi/ X
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ऐसे वक्त में दुनिया शहरों की ओर भाग रही है, गांव के गांव खाली हो रहे हैं और गांवों का भी शहरीकरण हो रहा, उस वक्त में भी कई ऐसे गांव, इलाके हैं जहां की महिलाओं और बुजुर्गों ने कभी शहरों का मुंह तक नहीं देखा ना ही कभी गांव से भी बाहर गए. ऐसे में यूपी पुलिस के DIG वैभव कृष्ण की ने चंदौली के पंडी गांव की आदिवासी महिलाओं से किया अपना वादा पूरा किया और उन्हें ना सिर्फ वाराणसी का दौरा कराया बल्कि उन्हें बाबा काशी विश्वनाथ के भी दर्शन कराए. ये कदम योगी सरकार और यूपी पुलिस की मिशन शक्ति के तहत नारी सशक्तिकरण के तहत उठाया गया है.

पहली बार शहर पहुंचीं पंडी गांव की आदिवासी महिलाए

आपको बताएं कि  वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक वैभव कृष्ण की पहल पर पुलिस अधीक्षक चंदौली आकाश पटेल ने इन महिलाओं के लिए विशेष बस की व्यवस्था की, उन्हें काशी का दौरा कराया बल्कि उन्हें वो खुशी देने की कोशिश की जिसकी वो हकदार थीं और अब तक महरूम थीं.

आदिवासी महिलाओं ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन

पंडी गांव से 3 घंटे के सफर के बाद वाराणसी पहुंचीं इन महिलाओं ने श्री काशी विश्वनाथ धाम, विशालाक्षी शक्तिपीठ, संकटमोचन मंदिर और दुर्गाकुंड मंदिर में दर्शन-पूजन किया. इसके बाद इन्हें कैंटोनमेंट स्थित जेएचवी मॉल का भी भ्रमण कराया गया. इस दौरान काशी दर्शन कर अभिभूत हुईं आदिवासी महिलाओं ने यूपी पुलिस का आभार व्यक्त किया और बाबा विश्वनाथ के जयकारे भी लगाए. मालूम हो कि सरकार की ये पहल आदिवासी महिलाओं को सम्मान देने और मुख्यधारा से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है.

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भीड़ देखकर घबरा गईं आदिवासी महिलाएं, पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर किया सहज

इनके लिए गांव से निकलना, बस से इतनी देरी का सफर और फिर शहर की भारी भीड़ किसी अचंभे से कम नहीं था. इसका अंदाजा इसी से लग सकता है कि   वाराणसी में मैदागिन पर बस पहुंचने के बाद भारी भीड़ देखकर महिलाएं और बच्चे घबराने लगे. हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर उन्हें सहज किया.

इसके बाद 49 ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के दल ने मैदागिन से गोल्फ कार्ट की सवारी की, जिसके बाद उनकी खुशी देखते ही बनती थी, उनके चेहरे खिलखिला उठे. फिर उन्हें गोल्फ कार्ट से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंचाया गया. यहां उनका दूसरे श्रद्धालुओं को देखकर काफी अच्छा लगा और ये इतने मग्न हो गए कि उन्हें विशालाक्षी मंदिर ले जाने के लिए पुलिसकर्मियों को आग्रह करना पड़ा.

फिर लगा इतना मन, पुलिस को वापस चलने के लिए करना पड़ा आग्रह

विशालाक्षी शक्तिपीठ पहुंचने पर महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ तस्वीरें खिंचवाईं. इसके बाद दल ने संकट मोचन मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया. सभी मंदिरों में महिलाओं का अंगवस्त्र और रुद्राक्ष की माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया. इस दौरान पुलिसकर्मी खुद उन्हें मंदिरों की ऐतिहासिक महत्ता के बारे में बताते रहे, जिससे महिलाओं और पुलिस के बीच एक बेहद मित्रवत माहौल बन गया. गांव की रहने वाली सरस्वती, प्रमिला, गोविंद और संतोष ने बताया कि पहली बार शहर देखकर वे बेहद खुश हैं और पुलिसकर्मियों के इस आत्मीय व्यवहार से काफी प्रभावित भी हैं.

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मंदिर दर्शन के बाद सभी को बनारस शहर घूमने का अवसर मिला, जिससे बच्चों के चेहरे भी खिल उठे. जेएचवी मॉल पहुंचने पर वहां मौजूद एस्केलेटर और लिफ्ट ने सभी को रोमांचित कर दिया. बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन के उपरांत, महिलाओं ने जालान प्रसादम रेस्टोरेंट में स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया. इसी सफर के दौरान, बस से ट्रेन को गुजरते देख पीयूष नाम के एक छोटे बच्चे ने अपनी मां से चहकते हुए कहा कि, "मम्मी देखो, किताबों वाली रेलगाड़ी जा रही है." इस यात्रा से अभिभूत महिलाएं आपस में यही चर्चा कर रही थीं कि यह सब 'बड़े साहब' की सकारात्मक पहल की देन है, अन्यथा उन्हें ऐसा दुर्लभ मौका कभी नहीं मिल पाता.

DIG वैभव कृष्ण ने पूरा किया वादा

15 जून को वाराणसी रेंज के डीआईजी (DIG) वैभव कृष्ण चंदौली के पंडी गांव पहुंचे थे. यह गांव वाराणसी जिला मुख्यालय से करीब 95 किलोमीटर दूर एक जंगली इलाके में स्थित है, जो आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है.

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महिलाओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन की जताई थी इच्छा

दौरे के दौरान डीआईजी साहब वहां की महिलाओं से बातचीत कर रहे थे. बातों ही बातों में महिलाओं ने बताया कि वे आज तक अपने गांव से बाहर नहीं निकली हैं और उन्होंने कभी कोई शहर नहीं देखा है. उनकी यह बात सुनकर वैभव कृष्ण काफी भावुक हो गए.

उन्होंने महिलाओं से पूछा कि अगर आप लोगों को घूमने का मौका मिले, तो कहां जाना चाहेंगी? इस पर महिलाओं के बीच से आवाज आई कि हम बनारस शहर जाएंगे और बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन करेंगे.

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यह सुनकर वैभव कृष्ण ने तुरंत आदेश दिया कि इन महिलाओं की यात्रा का पूरा बंदोबस्त करवाया जाए. इसी पहल के तहत 29 जून को बकायदा पुलिस की एक बस गांव पहुंची. गांव की 30 बुजुर्ग महिलाओं और 10 पुरुषों को ससम्मान बस में बैठाकर वाराणसी दर्शन के लिए लाया गया.

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टिप्पणियाँ 1
G
Guest (अतिथि)
S
Shrikant Shringarputale
2 weeks ago

संपूर्ण भारतियों की ओर से मैं इस व्यवस्थाशा है के व्यवस्थापकों का अभिनंदन करता हूँ ! आशा है कि यह केवल शुरुआत है तथा यही अनुभव अलग अलग आदिवासी रहिवासियों को एक संगठित तौर पर भविष्य में भी दिलाया जाता रहेगा !

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