जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

'नियम नहीं मानें, तो उड़ान रोक दो', त्योहार पर हवाई किराया बढ़ोतरी को लेकर एयरलाइंस कंपनियों पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी की तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है.

Author
17 Aug 2026
( Updated: 17 Aug 2026
04:40 PM )
'नियम नहीं मानें, तो उड़ान रोक दो', त्योहार पर हवाई किराया बढ़ोतरी को लेकर एयरलाइंस कंपनियों पर सख्त सुप्रीम कोर्ट
Image Credit: IANS
Advertisement

त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रूख अपनाते हुए कहा कि अगर एयरलाइंस नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, तो उनकी उड़ानें रोक दी जाएं.  

एयरलाइंस पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट

त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर याचिका पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है.

याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराए और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इस प्रक्रिया को पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा और हम अंतिम रूप दिए गए नियमों को कोर्ट के सामने रखेंगे.

इस मामले में अगली सुनवाई 7 सितंबर को 

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी की तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है.

वहीं, याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते.

SC ने एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी को बताया यात्रियों का शोषण 

Advertisement

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराए तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए.

सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की.

यह भी पढ़ें

याचिका में कहा गया है कि निजी एयरलाइंस अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की आवश्यकता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें