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'इसे हटाइए, वरना नहीं दूंगा भाषण...', PM मोदी की इस जिद ने रातोंरात बदली लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था: जानें पूरा किस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार बुलेटप्रूफ शीशे चलते स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से अपना भाषण ना देने की ज़िद पर अड़ गए थ. ये क़िस्सा है 2014 का जब वो पहली बार प्रधानमंत्री बने थे.

'इसे हटाइए, वरना नहीं दूंगा भाषण...', PM मोदी की इस जिद ने रातोंरात बदली लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था: जानें पूरा किस्सा
Image Source: Screengrab
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडा फहराया. लेकिन इस ऐतिहासिक मंच तक पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर बेहद कड़े इंतजाम किए जाते हैं. एक समय ऐसा भी था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक कारण के चलते लाल किले की प्राचीर से भाषण ना देने ज़िद पर अड़ गए थे. 

दरअसल, लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर जब प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं तो वो बुलेटप्रूफ शीशे के पीछे खड़े होते थे. हालांकि 2014 में इस सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ और बुलेटप्रूफ बैरियर को हटा दिया गया. इस बदलाव के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक दिलचस्प कहानी सामने आई है. पूर्व रक्षा सचिव आरके माथुर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी चाहते थे कि वे देशवासियों को बिना किसी शीशे की रुकावट के सीधे संबोधित करें. उन्होंने अधिकारियों के सामने साफ कर दिया था कि अगर बुलेटप्रूफ बैरियर नहीं हटाया गया, तो वह भाषण नहीं देंगे.

सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की थी बड़ी चिंता

हिंदुस्तान में छपी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक ने प्रधानमंत्री को लालकिले पर सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी दी थी. इसी दौरान प्रधानमंत्री के सामने लगाए जाने वाले बुलेटप्रूफ बैरियर का भी जिक्र हुआ. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर उनके और जनता के बीच शीशा रहेगा, तो वह लोगों को ठीक तरह से संबोधित नहीं कर पाएंगे. हालांकि सुरक्षा अधिकारियों के लिए इसे हटाना आसान फैसला नहीं था. लालकिला दिल्ली के बेहद व्यस्त इलाके में स्थित है. प्राचीर से सामने का बड़ा इलाका साफ दिखाई देता है और आसपास घनी इमारतें भी हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए अधिकारियों को बुलेटप्रूफ शीशा जरूरी लग रहा था. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को भी कहा.

रात 2 बजे लिया गया बड़ा फैसला

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आरके माथुर के अनुसार, प्रधानमंत्री अपने फैसले पर कायम रहे. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर बैरियर नहीं हटाया गया, तो वह भाषण नहीं देंगे. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया गया. माथुर ने बताया कि उन्होंने और आईबी निदेशक ने मिलकर रात में ही इस मुद्दे पर फैसला किया. इसके बाद करीब रात 2 बजे बुलेटप्रूफ शीशा हटा दिया गया. अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना किसी बुलेटप्रूफ बैरियर के लालकिले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. तब से प्रधानमंत्री मोदी स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान बिना बुलेटप्रूफ शीशे के ही देश को संबोधित करते रहे हैं. यह बदलाव सिर्फ सुरक्षा प्रोटोकॉल में परिवर्तन नहीं था, बल्कि प्रधानमंत्री और जनता के बीच सीधे संवाद की उनकी शैली का भी हिस्सा बन गया.

भाषण के बाद बच्चों के बीच पहुंचते हैं पीएम

लालकिले से भाषण खत्म होने के बाद प्रधानमंत्री छात्रों और एनसीसी कैडेट्स के बीच भी पहुंचते हैं. इस दौरान कई बार ऐसे भावुक और सहज पल देखने को मिलते हैं, जो लोगों का ध्यान खींच लेते हैं. ऐसे ही एक मौके पर एक बच्ची ने प्रधानमंत्री के पैर छूने की कोशिश की. इसी दौरान उसकी टोपी नीचे गिर गई. प्रधानमंत्री ने तुरंत टोपी उठाई और बच्ची के सिर पर रख दी. आसपास मौजूद बच्चों ने तालियां बजाकर इस पल का स्वागत किया. 

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बताते चलें कि लालकिले का मंच जहां देश की सुरक्षा और जिम्मेदारियों का प्रतीक है, वहीं भाषण के बाद बच्चों के बीच प्रधानमंत्री की मौजूदगी उस समारोह को एक मानवीय और आत्मीय रंग भी देती है.

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