‘विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्प सिद्ध किए’, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर PM मोदी का बड़ा संदेश
पीएम मोदी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस और संघर्ष को याद करते हुए उन्हें नमन किया. उन्होंने कहा कि पीड़ितों ने कठिन दौर से उबरकर देश की प्रगति में अहम योगदान दिया.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कहा कि उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन करता हूं, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया.
विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' में कहा, 'आज हम 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को याद करते हैं जो विभाजन से प्रभावित हुए थे. यह इतिहास का वह दौर था जिसने कई जिंदगियां तहस-नहस कर दीं, परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खो दिया और भारी पीड़ा सही.'
Today we mark #PartitionHorrorsRemembranceDay. We recall the courage of all those who were impacted by Partition. It was a moment in history that tore apart several lives…families were uprooted, loved ones were lost and immense suffering was endured.
At the same time,…— Narendra Modi (@narendramodi) August 14, 2026Advertisement
मुश्किलों से उबरकर देश की प्रगति में दिया योगदान
पीएम मोदी ने आगे कहा, 'इन मुश्किलों से उबरते हुए लोगों ने शून्य से अपनी जिंदगी फिर से बनाई, चुनौतियों को कामयाबी में बदला और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया. उनकी जीवन-यात्राएं हमें इंसानी जब्जे की ताकत की याद दिलाती हैं.' उन्होंने प्रार्थना की कि यह दिन हमारे देश में आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को अधिक मजबूत करे और हम सब मिलकर 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में काम करें.
सद्भावना और एकजुटता का दिया संदेश
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा, 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया. उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है. आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें.'
पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषितम्
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इस अवसर पर उन्होंने 'संस्कृत सुभाषितम्' भी शेयर किया. उन्होंने लिखा, 'उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति.' 'संस्कृत सुभाषितम्' में कहा गया है, 'परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प और नवाचार विकसित होते हैं व सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं. इसलिए, मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है.'
(INPUT-IANS)