जिस पर देशकरता है भरोसा
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'OG, Flex और नाराज फूफा', SRCC का वो भाषण जिससे बनी मोदी लहर, 13 साल बाद वहीं पहुंचे PM मोदी, जेन-जी से क्या बोले?

साल 2013...गुजरात के तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी DU के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के मंच पर पहुंचे थे। उस भाषण में पानी के 'आधे भरे गिलास' और गवर्नेंस के जिस मॉडल की बात उन्होंने की थी, उसी से मोदी लहर पैदा हुई थी. 13 साल बाद वहां फिर पहुंचे पीएम मोदी.

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06 Sep 2026
( Updated: 06 Sep 2026
10:32 AM )
'OG, Flex और नाराज फूफा', SRCC का वो भाषण जिससे बनी मोदी लहर, 13 साल बाद वहीं पहुंचे PM मोदी, जेन-जी से क्या बोले?
PM Modi: IANS
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प्रधानमंत्री मोदी ने 13 साल एक बार फिर उस जगह गए, जहां से नरेंद्र मोदी के पीएम मोदी बनने के कैंपेन की आधिकारिक शुरुआत हुई थी, जहां से उनके अबकी बार मोदी सरकार के ख़्वाब को पंख लगे थे, जहां पर दिए उनके संबोधन ने युवाओं, छात्रों और देश में उनके पक्ष में हवा बनाई और चेंज को लेकर नैरेटिव सेट हो गया. पीएम के 2013 की तरह ही 2026 वाले भाषण की भी ठीक वैसी ही चर्चा हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय युवाओं को अपनी ओर मोड़ने की लड़ाई चल रही थी, वहीं अब जेन-जी के गुस्से को कम करने की कोशिश चल रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीती शाम SRCC के अपने संबोधन में जेन-जी की भाषा ‘OG’, ग्रोथ, इकोनॉमी, ट्रांसफॉर्मेशन, डिजिटाइजेशन सहित आदि पर बात की और दिमागी नक्सल का जिक्र कर एक बार फिर  विपक्ष पर तीखा हमला बोला और सरकार की विकास परियोजनाओं के अनावश्यक विरोध को लेकर घेरा और 2013 के संकटों की तुलना आज के सशक्त भारत से की.

'दिमागी नक्सल वो होम्योपैथिक गोली जिसने सबको बाहर निकाल दिया

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इसी दौरान उन्होंने लाल किले से अपने हाल के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने "दिमागी नक्सल" शब्द का इस्तेमाल कर आलोचकों को "होम्योपैथिक गोलियां" दी थीं. उन्होंने आगे कहा कि, "होम्योपैथिक इलाज में थोड़ी देर के लिए बीमारी बढ़ती ही है. जैसे ही मैंने यह गोली दी, सारे दिमागी नक्सल बाहर निकलने लगे. लेकिन जनता उनका असली रंग देख रही है." विरोधियों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने देश में दो तरह के लोगों का जिक्र किया. एक वो जो समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में सकारात्मक रूप से बदलते हैं. दूसरे वो जो हर मुद्दे पर "नाराज फूफा" बन जाते हैं.

उन्होंने कहा, "उनका एक ही डायलॉग है: इसकी क्या जरूरत है? जब हम दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति बना रहे थे, तो उन्होंने कहा, इसकी क्या जरूरत है? बुलेट ट्रेन, यूपीआई, चिप, नई संसद को लेकर भी उन्होंने यही कहा. जब हमने देश के लिए जान देने वाले सेना के वीरों के लिए स्मारक बनाया, तो फिर फूफा जी मैदान में आ गए. लेकिन ऐसे फूफाओं को भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया."

2013 VS 2026, कितना बदला भारत?

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने छात्रों से कहा कि देश अब 2014 से पहले की तुलना में आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है. पीएम मोदी ने कहा, "मैं आपको पुराने दिनों में ले जाना चाहता हूं."

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उन्होंने कहा, "2013 की केदारनाथ आपदा याद कीजिए, जिसने पूरी सरकार को हिला दिया था. 2008 में बैंकिंग संकट आया था, जिसने भारत की बैंकिंग व्यवस्था को तबाह कर दिया था. 2008 में ही मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की." उन्होंने कहा कि उनकी अपनी सरकार ने भी पिछले छह वर्षों में कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान संघर्ष सहित बड़े संकटों का सामना किया है.

‘लोगों ने सोचा था कि वे मोदी को कुचल देंगे’

पीएम ने कहा, "लोगों ने सोचा था कि वे मोदी को कुचल देंगे. लेकिन मेरे देश के लोगों में इतनी ताकत है कि भारत का बुरा चाहने वालों की इच्छाएं दब रही हैं." प्रधानमंत्री ने वैश्विक व्यापार के विस्तार में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला. पिछले एक दशक में लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं. उन्होंने कहा, "जब नए बाजार खुलते हैं, तो भारत के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होते हैं."

उन्होंने कहा, "आज देश 2013 की तुलना में आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है. लेकिन कुछ लोगों को घबराहट होने लगी है." युवा पीढ़ी में विश्वास व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "मुझे देश पर भरोसा है. मुझे देश के युवाओं पर भरोसा है. मेरा मानना है कि हम 140 करोड़ भारतीय मिलकर विकसित भारत को संभव बनाएंगे. भविष्य में भारत अनुसंधान और नवाचार का केंद्र बनेगा. भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा और आप वह दिन भी देखेंगे. आप देखेंगे कि एक दिन भारत ओलंपिक की मेजबानी करेगा, जिसे दुनिया देखेगी."

‘SRCC मोड में चल रही आपकी जिंदगी’

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उन्होंने छात्रों से कैंपस से बाहर की जिंदगी के बारे में भी सीधे बात की. उन्होंने कहा, "दोस्तों, अभी आपकी जिंदगी SRCC मोड में चल रही है. इसमें कोल्ड कॉफी पर चर्चाएं, आखिरी मिनट में परीक्षा की तैयारी और बिजनेस कॉन्क्लेव में कड़ी मेहनत शामिल है. लेकिन इस कैंपस के बाहर आपको एक अलग दुनिया मिलेगी." प्रधानमंत्री ने कहा कि 2013 से पहले छात्र स्टार्टअप, यूनिकॉर्न या अंतरिक्ष उद्यम बनाने का सपना भी नहीं देख सकते थे.

उन्होंने कहा, "आज हमारे युवा साथी कहते हैं, 'मैं स्टार्टअप बनाऊंगा. मैं यूनिकॉर्न बनाऊंगा. मैं अंतरिक्ष से जुड़ा स्टार्टअप शुरू करूंगा.' 2013 से पहले आपके सीनियर्स ने इस तरह के सपने नहीं देखे थे. लेकिन समय बदल गया है."

उन्होंने युवाओं से एक संकल्प लेने का आग्रह किया: "दुनिया की ग्लोबल फर्में हमारी क्यों नहीं हो सकतीं? हम गर्व से कहते हैं कि भारतीय दुनिया की शीर्ष कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं, तो वे कंपनियां भारतीय क्यों नहीं हैं?"

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा, "नाव भी हमारी, नाविक भी हमारा. लहरों पर जीत लिखने का हौसला भी हमारा. उड़ान भी हमारी, हवाओं का सामना करने का जुनून भी हमारा. सपना भी हमारा, संकल्प भी हमारा. आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी हमारा. विकसित भारत के मार्ग पर हमारा हर कदम भी हमारा हो."

‘2013 में निराशा और नीति पक्षाघात के दौर में था देश’

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प्रधानमंत्री ने कहा कि एसआरसीसी के पूर्व छात्रों ने दुनिया भर में संस्थान का नाम रोशन किया है. उन्होंने युवाओं की भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, "SRCC के एलुमनाई असली ‘OG’ हैं. उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है."

उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को याद करते हुए कहा कि शायद ही कोई ऐसी मुलाकात होती थी, जिसमें जेटली एसआरसीसी के दिनों का कोई किस्सा साझा न करते हों. पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए कहा कि कई बार वे उन्हें वही घटनाएं बार-बार सुनाया करते थे. उन्होंने बताया कि उनकी टीम के सदस्य संजीव सान्याल भी एसआरसीसी के पूर्व छात्र हैं.

‘धुरंधर न हों, लेकिन धूम तो मचाई है’

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पीएम मोदी ने कहा कि एसआरसीसी ने केवल अर्थशास्त्र के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि कला, राजनीति, कानून और न्यायपालिका सहित विभिन्न क्षेत्रों में देश को अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व दिए हैं. उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, "धुरंधर न हों, लेकिन धूम तो मचाई है."

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनके वर्ष 2013 के एसआरसीसी संबोधन की काफी चर्चा हो रही है. लोगों ने उस भाषण को फिर से सुना, पढ़ा और नई पीढ़ी ने भी उसे दोबारा देखा. उन्होंने कहा कि उस भाषण का प्रभाव आज भी 13-14 साल बाद महसूस किया जा रहा है.

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाला एक "गैंग" सक्रिय रहता है, इसलिए वह पहले ही सावधान कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने 2013 की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय सैनिकों की शहादत की खबरें सुर्खियों में रहती थीं, विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया था, चालू खाते का घाटा रिकॉर्ड स्तर पर था और महंगाई करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच गई थी.

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फ्रैजाइल फाइव से टॉप फ़ाइव में शामिल हुआ भारत

उन्होंने कहा कि उस दौर में औद्योगिक क्षेत्र मंदी की चपेट में था, हेलीकॉप्टर सौदे में भ्रष्टाचार उजागर हुआ था और हैदराबाद में बम विस्फोट हुए थे. उनके अनुसार, उस समय देश में विकास दर निचले स्तर पर थी, जबकि महंगाई और घोटाले चरम पर थे. अर्थव्यवस्था संकट में थी, नीति पक्षाघात की चर्चा हर जगह थी और दुनिया भारत को "फ्रैजाइल फाइव" देशों में गिन रही थी. प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय देश हर मोर्चे पर संघर्ष कर रहा था और चारों ओर निराशा और हताशा का माहौल था.

SRCC शताब्दी समारोह में PM मोदी का भाषण छात्रों को आया पसंद

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दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन को छात्रों ने प्रेरणादायक और यादगार बताया. छात्रों ने प्रधानमंत्री के भाषण में भारत की आर्थिक प्रगति, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र, फिनटेक, मेक इन इंडिया और देश की भविष्य की संभावनाओं से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किए जाने की सराहना की. 

छात्रा धनिष्ठा ने कहा कि प्रधानमंत्री का SRCC परिसर में होना सम्मान की बात थी. उनके शब्दों ने छात्रों को प्रेरित किया और यह पूरे एसआरसीसी परिवार के लिए गर्व का क्षण था. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब पहले कॉलेज आए थे तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अब प्रधानमंत्री के रूप में आए हैं. इस दौरान भारत और उसकी अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव और सुधार देखने को मिला है.

पीएम मोदी का भाषण अमेजिंग!

आरुषि ने प्रधानमंत्री के संबोधन को 'अमेजिंग' और प्रेरणादायक अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अर्थव्यवस्था के पुराने और मौजूदा दौर की तुलना जिस तरह समझाई, उससे नई पीढ़ी को आगे निर्माण करने की प्रेरणा मिली. एसआरसीसी के छात्र सरकार के सहयोग से देश को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाने का प्रयास करेंगे.

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स्वांतिका ने कहा कि SRCC के शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का परिसर में आना विशेष अवसर था. उन्होंने प्रधानमंत्री के मंच पर आने, बैठने और संबोधन के तरीके को यादगार बताया. पीएम ने 2013 के अपने विजन का भी उल्लेख किया और यह बताया कि देश को आगे किस दिशा में बढ़ाना है. यह संबोधन लंबे समय तक याद रहेगा.

निष्ठा ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा अवसर मिलेगा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने छात्रों को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. इससे युवाओं के भीतर देश के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी का अहसास भी होता है.

SRCC के छात्रों ने पीएम मोदी के 2013 vs 2026 के भाषण को किया याद

अनन्या ने भी प्रधानमंत्री के जेनजी से जुड़े शब्दों के इस्तेमाल को पसंद किया. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें प्रधानमंत्री को इतने करीब से देखने और सुनने का अवसर मिला. उनका संबोधन प्रभावशाली था और छात्रों के बीच प्रधानमंत्री की शैली को लेकर उत्साह दिखाई दिया.

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रचित ने कहा कि प्रधानमंत्री को सामने से देखना उनके लिए पहली बार का अनुभव था. उन्होंने प्रधानमंत्री के आत्मविश्वासपूर्ण संबोधन की सराहना की. रचित के मुताबिक, भाषण में 2013 से पहले और बाद के भारत की तुलना, ‘मेक इन इंडिया’ और विकास योजनाओं का उल्लेख किया गया. उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े प्रधानमंत्री के बयानों का भी जिक्र किया.

आर्या जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री का भाषण उनके लिए उत्साह से भरा अनुभव था. उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा विभिन्न आंकड़ों और डेटा का इस्तेमाल किए जाने को रोचक बताया. आर्या के मुताबिक, भाषण में 2013 से पहले के भारत और उसके बाद हुए विकास की चर्चा की गई. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि भारत फिलहाल एक अच्छी स्थिति में है.

'आधा गिलास' बनाम ‘पूरा गिलास’

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अंशिका भाटिया ने प्रधानमंत्री द्वारा 'आधा गिलास' वाली पुरानी धारणा को नए नजरिए से समझाने की बात को खास तौर पर सराहा. उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने कहा कि गिलास को केवल आधा खाली या आधा भरा देखने के बजाय उसमें मौजूद पानी के साथ हवा को भी देखा जाना चाहिए. अंशिका ने इसे एक अलग दृष्टिकोण बताया.

पीएम मोदी के जेनजी स्लैंग का इस्तेमाल छात्रों को आया पसंद!

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जेनजी स्लैंग का इस्तेमाल छात्रों को पसंद आया और इससे माहौल हल्का-फुल्का भी रहा. हालांकि, अंशिका ने यह भी कहा कि विकास के बावजूद कुछ क्षेत्रों में और सुधार की गुंजाइश है और सरकार को उन क्षेत्रों पर भी ध्यान देना चाहिए.

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पीयूष गौड़ ने भी 'आधा गिलास' वाले उदाहरण को भाषण की खास बात बताया. उन्होंने इसे विज्ञान और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल देश की प्रगति में मदद कर सकता है. छात्रा सिमरन ने कहा कि प्रधानमंत्री को सुनना अपने आप में बड़ा अवसर है और इतनी कम उम्र में ऐसा अनुभव मिलना उनके लिए खास रहा. उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण में आंकड़ों के इस्तेमाल को विशेष रूप से सराहा.

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