अपने बिछाए 'जाल' में फंसेंगे ट्रंप! भारत पर 100% टैरिफ लगाया तो अमेरिका में बढ़ सकती है बंपर महंगाई; जानें क्या होगा असर
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत पर ऐसा शुल्क लगा तो भारतीय उत्पाद महंगे होने से अमेरिकी बाजार और उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है.
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अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत हैं. अमेरिकी संसद ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) को मंजूरी दे दी है. इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को रूस की ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है. भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं. हालांकि, फिलहाल भारतीय सामानों पर 100 फीसदी शुल्क लागू नहीं हुआ है. लेकिन अगर अमेरिका ऐसा करता है तो यह कदम ख़ुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाला साबित हो सकता है.
भारत पर क्यों बढ़ा दबाव?
दरअसल, इस बिल का मुख्य निशाना रूस की ऊर्जा और रक्षा अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना है. अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीद उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा देती है. भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है. ऐसे में नए अमेरिकी कानून से भारत के सामने व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा, दोनों को लेकर नई चुनौती खड़ी हो सकती है. भारत सरकार ने कहा है कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा और अपने व्यापारिक तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा.
क्या अमेरिका में महंगे होंगे भारतीय सामान?
टीवी9 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इन दिनों आम जनता महंगाई का सामना कर रही है. ऐसे में अगर भविष्य में 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ भारतीय निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा. अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है. कपड़ा, दवाइयां और कई अन्य सामान अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगे हो सकते हैं. व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका कितने उत्पादों पर शुल्क लगाता है, दर कितनी तय होती है और इसे कब लागू किया जाता है. फिलहाल इन बिंदुओं पर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है.
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भारतीय एक्सपोर्टर्स की बढ़ी चिंता
नए कानून ने भारतीय निर्यातकों के बीच अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है. फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा है कि वास्तविक प्रभाव का आकलन तभी किया जा सकेगा, जब अमेरिका टैरिफ की दर, उत्पादों की सूची और लागू होने की समयसीमा स्पष्ट करेगा. कुछ निर्यातक संभावित नुकसान को कम करने के लिए अपने शिपमेंट की रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं.
अमेरिकी हाउस में बहुमत से पास हुआ था बिल
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने बिल को 262-159 के वोट से पारित किया, जबकि सीनेट पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी. अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के लिए भेजा गया है. कानून बनने के बाद भी 100 फीसदी टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा, बल्कि राष्ट्रपति के पास परिस्थितियों के आधार पर इसे लगाने का अधिकार होगा. यही वजह है कि फिलहाल इसे भारत पर लागू हो चुका टैक्स कहना सही नहीं होगा.
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बहरहाल, आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका बातचीत और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद पर इस फैसले का असर साफ हो सकता है. फिलहाल भारत के सामने चुनौती यह है कि वह सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखते हुए अपने निर्यात और व्यापारिक हितों को भी सुरक्षित रखे. और अगर अमेरिका बातचीत के बावजूद टैरिफ का बम फोड़ता है तो ज़ाहिर है कि दोनो देशों के बीच रिश्तों में एक बार खटास आ सकती है.